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बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण विधेयक पर जो रुख अपनाया है, वह सिर्फ समर्थन या विरोध की सामान्य राजनीतिक स्थिति नहीं है, बल्कि इसके भीतर एक गहरी सामाजिक और चुनावी रणनीति छिपी हुई है.
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से महिला आरक्षण पर विशेष सत्र बुलाने और 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने का मायावती ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने इस पूरे विमर्श को एक नए कोण से मोड़ने की कोशिश भी की है.































