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लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान में दो महीने पहले जब शकुंतला देवी विश्वविद्यालय के छात्र राजेश अपने दोस्तों के साथ पहुंचे तो उनके लिए यह सिर्फ एक सैर नहीं थी. बचपन से नेत्रहीन राजेश के लिए चिड़ियाघर का मतलब अब तक केवल आवाज़ों और दूसरों के बताए वर्णन तक सीमित था. 

लेकिन उस दिन उन्होंने पहली बार अपने हाथों से जानवरों के बारे में ‘पढ़ा’. बाड़ों के बाहर लगे ब्रेल लिपि के बोर्ड पर उंगलियां फेरते हुए वे शेर, हाथी, हिरण और पक्षियों की जानकारी हासिल कर रहे थे. राजेश बार-बार मुस्कुरा रहे थे. वे जानवरों को देख नहीं सकते थे लेकिन पहली बार उन्हें लगा कि चिड़ियाघर उनके लिए भी बना है.

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