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पश्चिम एशिया में जब तनाव बढ़ता है तो भारत आमतौर पर तेल की चिंता करता है. लेकिन अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी ताजा जंग एक और रणनीतिक कमजोरी को उजागर कर सकती है और वह है उर्वरक. ईरान यूरिया और अमोनिया का एक महत्वपूर्ण वैश्विक निर्यातक है. साथ ही इस युद्ध की वजह से समुद्री मार्ग में जो बाधाएं उत्पन्न हुई हैं, उनसे भी भारत में यूरिया और गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है.
यह कहना गलत नहीं होगा कि किसी भी देश की खाद्य सुरक्षा उस देश की उर्वरक सुरक्षा पर काफी हद तक निर्भर होती है. ऐसे में अगर उर्वरकों के उत्पादन और आपूर्ति पर इस युद्ध का असर पड़ता है तो इसका प्रभाव भारत के खाद्य प्रबंधन पर भी पड़ेगा. राहत की बात यह है कि खेती के लिहाज से यह ऑफ सीजन है.































