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उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक ज़िला एक व्यंजन’ (ODOC) योजना का मकसद राज्य की खान-पान परंपराओं को पहचान देना, उन्हें ब्रांड बनाना और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना बताया गया है. लेकिन 5 मई को जैसे ही 75 ज़िलों और 208 व्यंजनों की सूची सामने आई, सबसे ज़्यादा चर्चा उन चीज़ों की होने लगी जो इस सूची में नहीं हैं. 

सूची में पेड़ा, पेठा, गजक, रेवड़ी, इमरती, जलेबी, चाट, समोसे, दाल बाफला और ठेकुआ जैसे व्यंजनों को जगह मिली, लेकिन लखनऊ के गलावटी कबाब, काकोरी कबाब, अवधी बिरयानी, मुरादाबादी बिरयानी, रामपुरी गोश्त, आज़मगढ़ का हांडी मटन या पूर्वांचल के कई मांसाहारी व्यंजन पूरी तरह गायब रहे. यही अनुपस्थिति अब इस योजना के सांस्कृतिक और राजनीतिक अर्थों पर बहस का केंद्र बन गई है.

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