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30 मई की रात कुशीनगर पुलिस की कई टीमें अलग-अलग दिशाओं से कसया कस्बे की ओर बढ़ रही थीं. कुछ घंटे पहले तक पुलिस अधिकारी आम इलेक्ट्रीशियन बनकर इलाके की इमारतों की रेकी कर चुके थे. बिजली के लोड और वायरिंग की जांच के बहाने वे उन किराए की इमारतों के भीतर झांक आए थे, जहां कुछ असामान्य गतिविधियां होने की सूचना थी.
पुलिस को शक था कि यहां कोई बड़ा नेटवर्क संचालित हो रहा है लेकिन अंदर जो तस्वीर सामने आई, उसने जांचकर्ताओं को भी हैरान कर दिया. कमरों में ठुंसे हुए सैकड़ों नेपाली युवक-युवतियां, जिनके हाथों में नौकरी के सपने थे लेकिन हकीकत में वे एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बन चुके थे, जहां उनसे पैसा वसूला जा रहा था, नए लोगों को जोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था और विरोध करने पर उनकी गतिविधियों पर लगाम लगा दी जाती थी.




























