जब एक अधिकारी के लिए सोनिया से टकराए मनमोहन; तस्वीरों में जानिए ऐसे ही और भी किस्से

साल 2004 की बात है. पीएम मनमोहन सिंह और तत्कालीन कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी वित्त मंत्री के लिए नाम तय नहीं कर पा रहे थे. मनमोहन सिंह ने मोंटेक सिंह अहलूवालिया का नाम वित्त मंत्री के लिए आगे किया, लेकिन सोनिया ने तुरंत खारिज कर दिया. इसके बाद सोनिया की पसंद पर पी. चिदंबरम को वित्त मंत्री बनाया गया.
हालांकि, सोनिया के इस फैसले को मनमोहन का मन स्वीकार नहीं कर पा रहा था. सिंह सोनिया के वफादार माने जाते थे, लेकिन अहलूवालिया के लिए मानो वे आलाकमान से भी भिड़ने के लिए तैयार हो गए थे. सिंह को पीएम बने अभी कुछ ही महीने हुए थे, वे किसी भी तरह अहलूवालिया को सरकार में शामिल कराना चाहते थे.
अपने नाम की घोषणा होने के बाद अहलूवालिया सबसे पहले मनमोहन सिंह के पास गए. उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें सोनिया गांधी से मिलना चाहिए. इसपर मनमोहन ने मुस्कराते हुए कहा, “जाओ सबसे पहले 80 साल के कॉमरेड सुरजीत से मिलो.” इस तरह सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही मनमोहन ने सोनिया की मर्जी के खिलाफ अहलूवालिया को सरकार में शामिल किया. 26 दिसंबर 2024 को 92 साल की उम्र में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया. आइए उनके पर्सनल और पॉलिटिकल लाइफ से जुड़े कुछ इंट्रेस्टिंग किस्से जानते हैं…(1987 की इस तस्वीर में मनमोहन सिंह के साथ मोंटेक सिंह अहलूवालिया)

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी अपनी किताब ‘हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ में लिखती हैं कि मनमोहन ने कुछ दिनों बाद दोबारा योजना आयोग (अब नीति आयोग) के उपाध्यक्ष पद के लिए अहलूवालिया का नाम आगे किया. मनमोहन सिंह गठबंधन की सरकार के मुखिया थे. ऐसे में दूसरे दलों का समर्थन भी जरूरी था. सबसे बड़ी समस्या लेफ्ट पार्टियां थीं. वामपंथी नेता हरकिशन सिंह सुरजीत भी अहलूवालिया को पसंद करते थे.
सुरजीत ने मनमोहन सिंह के प्रस्ताव का समर्थन किया और मोंटेक सिंह अहलूवालिया योजना आयोग के उपाध्यक्ष बन गए. अपने नाम की घोषणा होने के बाद अहलूवालिया सबसे पहले मनमोहन सिंह के पास गए. उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें सोनिया गांधी से मिलना चाहिए. इसपर मनमोहन ने मुस्कराते हुए कहा, “जाओ सबसे पहले 80 साल के कॉमरेड सुरजीत से मिलो.” (बाएं से) हरकिशन सिंह सुरजीत, सोनिया गांधी, अमर सिंह और मनमोहन सिंह, 2008)

13 मई 2004 को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए. UPA के पास सत्ता की चाबी थी. सोनिया गांधी का पीएम बनना लगभग तय माना जा रहा था. पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह अपनी किताब 'वन लाइफ इज नॉट एनफ' में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखते हैं कि उस समय राहुल ने अपनी मां से कहा, “वो PM नहीं बनेंगी.” दोनों मां बेटे में उस समय ऊंची आवाज में बातें हो रही थीं. दरअसल, राहुल को डर था कि मां PM बनीं तो उन्हें भी दादी और पिता की तरह मार दिया जाएगा.
सोनिया गांधी के PM नहीं बनने का फैसला सुनते ही UPA सांसद परेशान हो गए. कांग्रेस सांसदों ने सोनिया गांधी को PM बनने के लिए राजी करने की कोशिश की. 22 मई 2004 की दोपहर जब कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हो रही थी तो सोनिया ने प्रधानमंत्री पद के लिए मनमोहन सिंह के नाम का ऐलान कर दिया. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब ‘टर्निंग पॉइंट्सः ए जर्नी थ्रू चैलेंजेज’ में लिखा, “जब सोनिया गांधी उनसे मिलीं और डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे किया तो वे चकित रह गए थे.” (एक कार्यक्रम के दौरान सोनिया, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी)

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई मनमोहन सिंह के साथ बिताए वक्त को याद करते हुए लिखते हैं कि एक बार वह मनमोहन सिंह के साथ एक इंटरव्यू कर रहे थे. तभी उन्हें पता चला कि डॉ. सिंह के पोते का जन्मदिन है और गार्डन में एक छोटी सी पार्टी रखी गई है. सरदेसाई ने अनुरोध किया, “क्या हम परिवार के साथ एक शॉट फिल्मा सकते हैं, यह अच्छा टीवी शो बनेगा.” इस पर सिंह ने सख्त लहजे में कहा, “नहीं, इसमें कोई सवाल ही नहीं, आप कैमरे को मेरे मेरे परिवार की तरफ नहीं घुमाएंगे, यह हमारी निजी जगह है.”
राजदीप सरदेसाई बताते हैं, “मुझे याद है कि परमाणु समझौता पारित होने के बाद हमने एक टीवी शो में 'सिंह इज किंग' गाना बजाया था और उनके दफ्तर ने फोन करके कहा था कि इस तरह के उत्साह दिखाने को टाला जा सकता था. सरदेसाई आगे बताते हैं कि एक बार हमने उनकी कई उपलब्धियों के लिए उन्हें 'वर्ष का सर्वश्रेष्ठ भारतीय' चुना. पांच सितारा होटल में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में आने के बजाय, उन्होंने अनिच्छा से प्रधानमंत्री के निवास पर पुरस्कार लेने की सहमति व्यक्त की. उनका विनम्र जवाब था, “ऐसे कई भारतीय हैं जिन्होंने मुझसे कहीं अधिक उपलब्धियां हासिल की हैं.” (मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी के साथ राजदीप सरदेसाई)

सीनियर जर्नलिस्ट रितु सरीन के मुताबिक मनमोहन सिंह को पीएमओ के लोग डॉक्टर साहब कहकर पुकारते थे. मनमोहन सिंह जब भी अमेरिका जाते थे तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के बाद वह अपनी बेटी अमृत के साथ समय बिताने के लिए जरूर जाते थे. वह न्यूयॉर्क में एक वकील के रूप में काम करती हैं. 26 सितंबर 2011 को अपने बर्थडे के दिन मनमोहन सिंह अमेरिका के दौरे पर थे. संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद वह न्यूयॉर्क से वापस आ रहे थे.
उनके विशेष विमान एयर इंडिया वन में अधिकारियों ने शुगर-फ्री केक तैयार रखा था. जब मनमोहन सिंह से इसके बारे में बताया गया तो उन्होंने विमान में किसी भी तरह के जश्न मनाने से विनम्रता पूर्वक मना कर दिया. शरीन बताती हैं, “बाद में जब वे पत्रकारों का अभिवादन करने के लिए मीडिया सेक्शन में गए, तो आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने मुझसे उन्हें मनाने की कोशिश करने के लिए कहा. मेरे आग्रह पर उन्होंने शर्मीते हुए सहमति जताई. तब जाकर पीएम के बर्थडे पर केक-कटिंग सेलिब्रेशन संभव हुआ.” (24 सितंबर 2011 को न्यूयॉर्क में 66वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह)

संजय बारू ने अपनी 2015 की किताब, 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर: द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह' में लिखा, 'परमाणु समझौते पर उनके द्वारा अपनाए गए रुख ने सोनिया गांधी के प्रति उनकी अधीनता की याद को लोगों की सोच में मिटा दिया. अंत में मनमोहन सिंह राजा थे.' बारू ने इस डील को 'सिंह का सर्वोच्च गौरव' बताया. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने 2009 के लोकसभा चुनाव में 206 सीटें जीतीं. (तस्वीर में मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी. (फोटो - इंडिया टुडे ग्रुप))

डॉ. सिंह को मिले कई पुरस्कारों और सम्मानों में सबसे प्रमुख सम्मान हैं – भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण(1987), भारतीय विज्ञान कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी पुरस्कार (1995), वर्ष के वित्त मंत्री के लिए एशिया मनी अवार्ड (1993 और 1994), वर्ष के वित्त मंत्री के लिए यूरो मनी अवार्ड (1993), कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (1956) का एडम स्मिथ पुरस्कार से नवाजा गया. (तस्वीर में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और अन्य कांग्रेस नेता प्रेस से बात करते हुए. (फोटो - इंडिया टुडे ग्रुप))

मनमोहन सिंह को कैम्ब्रिज के सेंट जॉन्स कॉलेज में विशिष्ट प्रदर्शन के लिए राइट पुरस्कार (1955) भी मिला था. डॉ. सिंह को जापानी निहोन किजई शिम्बुन एवं अन्य संघों द्वारा भी सम्मानित किया गया था. उन्हें कैंब्रिज एवं ऑक्सफोर्ड तथा अन्य कई विश्वविद्यालयों द्वारा मानद उपाधियां प्रदान की गई थीं. (30 सितंबर 2017 को नई दिल्ली में दशहरा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मनमोहन सिंह और अन्य भाजपा नेताओं के साथ. (फोटो: चंद्रदीप कुमार/ इंडिया टुडे )