स्पेस से धरती तक, सुनीता विलियम्स की घर वापसी; तस्वीरों में देखें

मार्च की 18 तारीख को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 10.30 बजे सुनीता विलियम्स समेत चार एस्ट्रोनॉट्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से धरती पर वापसी के लिए रवाना हुए. सुनीता मंगलवार देर रात 3:27 बजे पृथ्वी पर लौट आईं.
अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने उन्हें एक खास मिशन के तहत वहां भेजा था. करीब 9 महीने से भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में फंसी हुई थी. सुनीता समेत 4 अंतरिक्ष यात्रियों की स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल के जरिए घर वापसी हो चुकी है. ये कैप्सूल में सवार होने के वक्त की तस्वीर है.

भारतीय समयानुसार सुबह 08:35 बजे इस स्पेसक्राफ्ट का हैच यानी, दरवाजा बंद हुआ था और 10:35 बजे स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से अलग हुआ. यह 19 मार्च की सुबह अपने तय समय पर लैंड हुआ.

कुछ इस तरह से सुनीता को स्पेस स्टेशन से धरती पर लाया गया. इस प्रोसेस के शुरुआती दो स्टेप को इस तस्वीर में दिखाया गया है. सबसे पहले धरती से स्पेस स्टेशन पहुंचने के बाद स्पेसक्राफ्ट स्पेस स्टेशन से जुड़ता है. इसके बाद अंतरिक्ष यात्री इसमें सवार होते हैं और फिर स्पेसक्राफ्ट तय समय पर धरती पर वापसी के लिए रवाना हो जाता है.

ISS से धरती पर लौटने के वक्त घर्षण की वजह से करीब 1,500°C तापमान से होकर स्पेसक्राफ्ट को गुजरना होता है. इस दौरान उसकी स्पीड करीब 28,000 Km/h होती है. हालांकि, पृथ्वी के वायुमंडल में रीएंट्री के दौरान, स्पेसक्राफ्ट 28,000 Km/घंटे की गति से धीमा होना शुरू हो जाता है.
इस गर्मी से बचने के लिए स्पेसक्राफ्ट के आगे टाइल्स और कार्बन फाइबर कम्पोजिट्स से बनी हीट शील्ड लगी होती है. यह स्पेसक्राफ्ट को गर्म होने से रोकती है. अगर स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी खराबी आ गई तो यह जल सकता है.
अगर स्पेसक्राफ्ट का एंगल गलत हुआ तो यह पृथ्वी के वायुमंडल में नहीं घुस पाता है. ऐसे में कैप्सूल अनिश्चित समय के लिए स्पेस में ही रह सकता है. अगर सब ठीक रहता है तो वायुमंडल में रीएंट्री के बाद पैराशूट सिस्टम की सुरक्षा के लिए स्पेसक्राफ्ट की आगे लगी हीट शील्ड को हटा दिया जाता है. दो ड्रैग और तीन मुख्य पैराशूट स्पेसक्राफ्ट की गति को और धीमा कर देते हैं. सुनीता को लाने के दौरान इन्हीं स्टेप को फॉलो किया गया.

स्पेसक्राफ्ट के पृथ्वी के वायुमंडल में रिएंट्री की पहली तस्वीर में देखा जा सकता है कि सुनीता जिस स्पेसक्राफ्ट से आ रही थी, वह आग के गोले की तरह दिख रहा था

ISS से धरती की दूरी 400 किमी है. धरती से पृथ्वी का वायुमंडल आसमान की ओर 100 किमी दूर है. ISS से निकलने के बाद स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वायुमंडल यानी एटमॉस्फियर में एंटर करता है, जिसे 'रीएंट्री' कहते हैं. यह प्रोसेस सबसे ज्यादा खतरनाक और जानलेवा होता है. इसी समय पैराशूट के जरिए स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग की कोशिश होती है.

यह स्पेस स्टेशन से धरती पर आने का आखिरी चरण होता है. इस स्टेप में कैप्सूल फ्लोरिडा के संमदर में पैराशूटों के सहारे छपाक की आवाज के साथ सफल लैंडिंग हुई.

स्पेसक्राफ्ट का पैराशूट इस तरह खुला. स्पेसक्राफ्ट में लगे कैमरों ने इस मोमेंट को कैद किया.

लैंडिंग के कुछ देर बाद ही रिकवरी क्रू स्पेसक्राफ्ट के पास पहुंच गए

सावधानी के साथ स्पेसक्राफ्ट ड्रैगन का दरवाजा खोला गया

तीसरे नंबर पर सुनीता विलियम्स को स्पेसक्राफ्ट ड्रैगन से बाहर लाया गया। उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन किया