बिहार के लोक कलाकारों की नजर में कैसी दिखती हैं जनकनंदिनी सीता, देखें तस्वीरें

मिथिला में पैदा हुई सीता को बिहार वासी अपनी बेटी और बहन माना करते हैं. इसलिए जब बिहार के लोक कलाकार अपनी अपनी निगाह से सीता की अलग-अलग छवियां गढ़ते हैं तो उसे देखने का आकर्षण सहज ही होता है. ये छवियां बुधवार सात अगस्त को बिहार म्यूजियम में एक साथ दिखीं, जब बिहार की लोक कलाएं मिथिला पेंटिंग, टिकुली पेंटिंग, सुजनी पेंटिंग, एप्लिक/कशीदाकारी और मंजूषा के कलाकारों ने अपनी अपनी निगाह से सीता को अपने अपने कैनवास पर उतारा.
इन कलाकृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन बुधवार को बिहार म्यूजियम के स्थापना दिवस के मौके पर हुआ. ये कलाकार 31 जुलाई से ही बिहार म्यूजियम में रहकर इन कृतियों को तैयार कर रहे थे. इन कृतियों को तैयार करने में पांच कलाकार पद्मश्री से सम्मानित थे, इनके अलावा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय अवार्ड पाने वाले कलाकारों ने भी इसमें भागीदारी की. कुल तीस कलाकारों की कृतियों में से चुनिंदा कृतियों को आप इस फोटो गैलरी में देख सकते हैं. (जनकनंदिनी सीता की तस्वीर का एक स्क्रीनशॉट)

वन में सीता - 14 साल के वनवास के दौरान सीता के जीवन की अलग-अलग गतिविधियों को एप्लिक/कशीदाकारी की कलाकार रूमा वर्मा ने तैयार किया है. वे राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाली कलाकार हैं.

लांछना - जब अयोध्या के दरबार में सीता के चरित्र पर संदेह किया गया और उन्हें एक बार फिर से वन जाना पड़ा, उस दृश्य को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मिथिला पेंटिंग की चित्रकार आशा झा ने कुछ यूं उकेरा है.

सीता को भ्रमित करने के प्रयास में रावण - सीता हरण के मौके की इस तस्वीर को मिथिला पेंटिंग की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता चित्रकार महनमा देवी ने तैयार किया है.

अशोक वाटिका में हनुमान और सीता - इस कलाकृति को मंजूषा कला की राज्य पुरस्कार प्राप्त पेंटर उलूपी झा ने तैयार किया है.

जटायु युद्ध - एप्लिक-कशीदाकारी राज्य पुरस्कार प्राप्त कलाकार कमला देवी ने इस कृति को तैयार किया है. इसमें सीता हरण कर लंका जा रहे रावण से युद्ध करते जटायु नजर आ रहे हैं.

रावण द्वारा सीता का हरण - पद्मश्री शिवन पासवान जो मिथिला पेंटिंग के चोटी के कलाकार माने जाते हैं, ने इस पेंटिंग को तैयार किया है.

स्वर्ण मृग और सीता - टिकुली पेंटिंग की राज्य पुरस्कार विजेता कलाकार रूपा कुमारी ने इस पेंटिंग को तैयार किया है.

केवट प्रसंग - हिंदू मिथक पर आधारित इस प्रदर्शनी में दो मुस्लिम कलाकार भी शामिल हुए, टिकुली पेंटिंग की शबीना इमाम और एप्लिक की सूफिया कौसर. यह कलाकृति एप्लिक-कशीदाकारी की राज्य पुरस्कार विजेता सूफिया ने तैयार की है.

राम सीता स्वयंवर- इस पेंटिंग को टिकुली की राज्य पुरस्कार विजेता कलाकार शबीना इमाम ने तैयार किया है.

धनुष यज्ञ - सुजनी कला की राज्य पुरस्कार विजेता आशा देवी की यह कलाकृति है.

जनक वाटिका में राम से सीता की पहली मुलाकात - इस पेंटिंग को मिथिला पेंटिंग की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कलाकार हेमा देवी ने तैयार किया है.

पृथ्वी से पृथ्वी तक - सीता धरती से जन्मी और आखिर में धरती में ही समा गया, उनके जीवन की इस विडंबना को मिथिला पेंटिंग की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पेंटर मनीषा झा ने कुछ यूं उकेरा है.

सीता का जन्म - जब अकाल पड़ने पर राजा जनक ने हल चलाया और सीता धरती में एक घड़े में मिली. इस दृश्य को मिथिला पेंटिंग की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कलाकार विभा दास ने यूं उकेरा है.