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बिहार: रामविलास पासवान के परिवार में क्यों मचा घमासान; पैतृक घर या कुछ और है वजह

रामविलास पासवान के परिवार में मचे विवाद की असल वजह सिर्फ पैतृक गांव शहरबन्नी स्थित उनका घर नहीं बल्कि अलौली विधानसभा सीट भी है

अपने पैतृक गांव में पिता रामविलास की मूर्ति अनावरण करते चिराग पासवान
अपडेटेड 1 अप्रैल , 2025

मार्च की 31 तारीख को दिवंगत लोजपा नेता रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी ने अलौली थाना में पशुपति कुमार पारस के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है. 

राजकुमारी देवी के लिखित शिकायत के मुताबिक, पशुपति पारस की पत्नी शोभा देवी और सुनयना देवी (पति स्व. रामचंद्र पासवान) रविवार 30 मार्च 2025 को उनके कमरे में आकर उनके कपड़े खींचने लगी और उनके जेवरात भी खोल लिए. इतना ही नहीं उसे घर से बाहर निकालकर कमरे में ताला लगा दिया. 

बाद में एक वीडियो में राजकुमारी देवी ये कहती नजर आती हैं कि चिराग पासवान को बुलाकर उनका बंटवारा कर दिया जाए. उनके हिस्से में जितना भी आयेगा वे उसी में रह लेंगी.

इस वीडियो के सोशल मीडिया में शेयर किए जाने के बाद रामविलास पासवान के राजनीतिक कुनबे में एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है.  राजकुमारी देवी से हुई मारपीट को लेकर दोनों पक्षों के प्रवक्ता एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और यह विवाद बढ़ता ही जा रहा है. 

लोजपा (रामविलास) के प्रवक्ता राजेश भट्ट कहते हैं, “पद्मभूषण रामविलास पासवान जी की धर्मपत्नी के साथ पशुपति कुमार पारस जी के परिजनों द्वारा जिस तरह घर से बेघर करने की साजिश रची गयी और अभद्रता का व्यवहार किया गया, वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है.” 

वहीं, पशुपति पारस की पार्टी रालोजपा के प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल कहते हैं, “राजकुमारी देवी को पारस जी मां के समान मानते हैं, अगर उन्हें बताया गया होता तो पारस जी पूरा घर ही राजकुमारी देवी के हवाले कर देते. दरअसल यह पूरी साजिश चिराग पासवान और उनकी पार्टी ने पारस जी की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से उन्हें बदनाम करने के लिए रची है.”

दिलचस्प है कि इस पारिवारिक विवाद में जहां दोनों पार्टियों ने अपने-अपने प्रवक्ताओं को मैदान में उतार दिया है. वहीं, राजकुमारी देवी के छोटे दामाद राजद नेता अनिल कुमार साधु इस मामले में कहते हैं, “इस पारिवारिक विवाद में प्रवक्ताओं का क्या काम. घर का झगड़ा है, हमें आपस में मिल-बैठकर निपटाना चाहिए.”

साथ ही अनिल साधु यह भी कहते हैं, “चिराग इस मामले में हमारी सास राजकुमारी देवी का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं. जब उन्हें मां का सम्मान दिया जाना चाहिए, तब तो वे देते नहीं हैं. जब उन्हें अपना मतलब निकालना होता है, मां को आगे कर देते हैं. यह राजनीतिक विवाद है ही, इसमें जबरन परिवार को घसीटा जा रहा है.”

अनिल इशारा करते हैं कि सबकुछ उस अलौली विधानसभा सीट की वजह से हो रहा है, जिस पर पशुपति कुमार पारस सात बार विधायक रहे और अब उनके बेटे यशराज चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. 

वहीं, दूसरी तरफ चिराग पासवान ने अलौली सीट से उनकी बड़ी साली उषा देवी के बेटे सीमांत मृणाल को चुनाव लड़ाने का वादा किया है, इसलिए इस पूरे मामले में मृणाल अपनी नानी राजकुमारी देवी के साथ काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं.
इस बात का इशारा रालोजपा के प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल की बातों से भी मिलता है. इंडिया टुडे से बातचीत में वे कहते हैं, “यशराज पिछले तीन महीने से अलौली में घूम रहे हैं. मगर वे चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह तय नहीं.”

रामविलास के पारिवारिक विवाद से जुड़ा पूरा मामला क्या है?

रामविलास पासवान के पैतृक गांव शहरबन्नी में उनकी पहली पत्नी राजकुमारी देवी पिछले 60 वर्षों से रह रही हैं. स्व. रामविलास पासवान ने काफी पहले अपने गांव में रहना छोड़ दिया था, वे ज्यादातर दिल्ली और पटना में रहते थे. 

1983 में उन्होंने एयर होस्टेस रीना शर्मा से दूसरी शादी कर ली, जिनसे उनके पुत्र चिराग पासवान हुए. 2014 में जब उनके लोकसभा चुनाव के नॉमिनेशन पेपर को चुनौती दी गई तो उन्होंने कहा कि 1981 में ही राजकुमारी देवी से तलाक ले लिया था. राजकुमारी देवी को दो बेटियां हैं. बड़ी उषा और छोटी आशा. 

बड़ी उषा के पुत्र सीमांत मृणाल हैं और छोटी आशा के पति अनिल कुमार साधु राजद में अनुसूचित जाति-जनजति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं. जिस मकान को लेकर विवाद है, उसमें पहले रामविलास के छोटे भाई पशुपति कुमार पारस भी रहा करते थे, जब वे अलौली के विधायक होते थे. मगर बाद में उन्होंने भी गांव में रहना छोड़ दिया. 

उनके छोटे भाई रामचंद्र पासवान ज्यादातर समय गांव में नहीं रहते थे. अपनी दोनों बेटियों की शादी के बाद राजकुमारी देवी उस मकान में अकेली रहती हैं. हालांकि, पर्व-त्योहार, शादी-ब्याह और किसी खास मौके पर परिवार कभी-कभार आया-जाया करता है.

2013 में इंडिया टुडे के वर्तमान संवाददाता पुष्यमित्र जब शहरबन्नी गया था, तब उसे उस मकान में रात गुजारने का मौका मिला, जिसको लेकर अभी विवाद हो रहा है. तब भी राजकुमारी देवी वहां अकेली ही रहती थीं. उन्होंने संवाददाता को खुद खाना पका कर खिलाया था.

उस साधारण से दो मंजिला मकान में नीचे तीन कमरे और बड़ा सा हॉल है. ऊपर दो कमरे हैं. गांव कोसी और बागमती की धाराओं के बीच बसा है, वहां अक्सर बाढ़ आती है और बारिश के दिनों में इस गांव में आने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है.

बारिश के मौसम में कुछ साल पहले पड़ोस के गांव फुलतोड़ा में एक बड़ी नौका दुर्घटना हो चुकी है, जिसमें पांच दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. बाद में एक सीमेंट की सड़क बनी, जिससे वहां आना-जाना सुलभ हुआ.

रामविलास पासवान की मूर्ति स्थापित करने पर शुरू हुआ विवाद

रामविलास पासवान अपने गांव कम ही जाते थे. कई बार चार-पांच साल बीत जाते थे, लेकिन वो अपने गांव नहीं जाते थे. मगर जबसे रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान राजनीति में आए हैं, उन्होंने अक्सर गांव आना-जाना शुरू किया और वे कई बार पूरे परिवार के साथ गांव जाने लगे. 

2020 में रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद जब उनकी पार्टी लोजपा दो टुकड़ों में बंट गई और एक हिस्से पर चिराग और दूसरे पर पशुपति कुमार पारस और उनके भतीजे प्रिंस से अधिकार कर लिया तो रामविलास पासवान के परिवार में रंजिश बढ़ने लगी. 

फिलहाल दोनों धड़े खुद को रामविलास पासवान का राजनीतिक उत्तराधिकारी बताते हैं और कहते हैं कि वे उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. इसी सिलसिले में आठ अक्तूबर, 2023 को चिराग पासवान ने अपने पिता रामविलास पासवान की तीसरी पुण्यतिथि पर उनकी विशाल मूर्ति अपने गांव में स्थापित की. 

उस समारोह में रामविलास पासवान का अपना पूरा परिवार जुटा. हालांकि, पशुपति कुमार पारस और रामचंद्र पासवान के परिवार ने इस आयोजन से दूरी ही रखी. चिराग के जवाब में 30 नवंबर, 2024 को लोजपा के 25वें स्थापना दिवस के मौके पर पशुपति कुमार पारस ने शहरबन्नी में रामविलास पासवान और अपने छोटे भाई रामचंद्र पासवान की मूर्ति की स्थापना की. 

रामचंद्र पासवान की मृत्यु 2019 में ही हो गई थी, जिसके बाद उनके पुत्र प्रिंस राज सांसद बने थे. मूर्तियों की स्थापना में भी एक विवाद हो गया. जहां चिराग पासवान ने अपने पिता की मूर्ति का अनावरण अपनी मां रीना पासवान से कराया. 

वहीं, पशुपति कुमार पारस ने मूर्ति अनावरण कार्यक्रम के लिए राजकुमारी देवी को मुख्य अतिथि बनाया. हालांकि राजकुमारी देवी उस मौके पर उपस्थित नहीं हो सकीं. श्रवण कहते हैं, “चिराग के लोग उन्हें पटना लेकर चले गये थे.”
पिछले साल पशुपति कुमार पारस ने भी शहरबन्नी में अपना छोटा सा घर बनाया है. बताया जाता है कि यह घर उनके बेटे यशराज की चुनावी गतिविधियों की वजह से बनाया गया है.

रामविलास के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप

इंडिया टुडे से बातचीत में अनिल कुमार साधु चिराग पर राजकुमारी देवी के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हैं. वे कहते हैं, “मैं रामविलास पासवान के साथ एक अरसे से कार्यकर्ता के तौर पर रहा हूं. मगर जब वे आखिरी वक्त में दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थे, तब न मुझे, न मेरी पत्नी आशा को और न मेरी सास राजकुमारी देवी को उनसे मिलने दिया गया. उनके निधन के बाद भी मेरी सास राजकुमारी देवी पटना की सड़कों पर कई घंटे इंतजार करती रहीं, उन्हें अपने पति का अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिया गया.”

इसके आगे अनिल कुमार साधु बताते हैं कि अगर चिराग मेरी सास को अपनी मां मानते हैं तो उन्होंने उन्हें इस बुढ़ापे में शहरबन्नी में क्यों छोड़ रखा है? दिल्ली में अपने साथ क्यों नहीं रखते? उन्हें पारिवारिक पेंशन का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?   

इसके आगे साधु कहते हैं, “मेरी सास राजकुमारी देवी को चिराग हमेशा राजनीतिक फायदे के लिए मोहरा बनाते हैं. अभी भी वे पशुपति कुमार पारस की छवि धूमिल करने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे हैं. कहा जाता है कि रामविलास पासवान ने मेरी सास को तलाक दे दिया था. मगर जो तलाक के कागजात पेश किये गये वे फर्जी हैं. उस पर मेरी सास के अंगूठे के निशान नहीं हैं.”

वे अनौपचारिक बातचीत में कहते हैं, “अभी जिस बात का विवाद है, बहुत छोटी और घरेलू बात है. छोटा सा झगड़ा हुआ था. कमरा बिल्कुल बंद नहीं किया गया था. इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है.”

इस घटना के बारे में हमने पशुपति कुमार पारस से उनका पक्ष जानने की कोशिश की, मगर बात नहीं हो पाई. उनके प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल उनका पूरा पक्ष रखते हुए कहते हैं, “रामविलास पासवान जी के निधन के बाद जब चिराग की वजह से परिवार बिखर गया तो हमारे नेता पारस जी ने उनकी जितनी जमीन पटना और हाजीपुर में थी, उसे चिराग को सौंप दिया. शहरबन्नी का घर साझा है. पारस जी चाहते नहीं हैं कि इसका बंटवारा हो. वहां राजकुमारी देवी स्थायी रूप से रहती हैं और पारस और रामचंद्र जी पत्नी यदा-कदा जाती हैं.”

वे कहते हैं, “इस बार भी जब दोनों चार दिन पहले वहां गईं तो तीनों मिल-जुलकर रह रही थीं. एक साथ खाना भी बन रहा था. मगर जब चिराग को इस बारे में पता चला तो उन्होंने अपनी पार्टी के बिहार के प्रधान महासचिव संजय पासवान और उषाजी के बेटे मृणाल को दल-बल के साथ भेजा. उन लोगों ने राजकुमारी देवी के कमरे के आगे कुछ कपड़े रखकर फोटो सेशन करवा लिया. उन लोगों ने सीधी महिला राजकुमारी देवी को समझा-बुझा कर बयान दिलाया.” 

पशुपति के प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल दावा करते हुए कहते हैं, “दिलचस्प है कि अलौली थाने में राजकुमारी देवी के नाम से जो आवेदन पेश किया गया है, उस पर राजकुमारी देवी के दस्तख्वत हैं, जबकि राजकुमारी जी लिखना नहीं जानतीं, वे अंगूठे का छाप देती हैं. उन्होंने लोकल मीडिया को बुलाकर इसे प्रसारित कराया, ताकि पारस जी की बदनामी हो.”

इन आरोपों के जवाब में लोजपा (रामविलास) के मुख्य प्रवक्ता राजेश भट्ट कहते हैं, “अगर पारस जी को हिस्सा नहीं चाहिए तो उनके लोगों ने ताला क्यों लगाया? एक तरफ वे रामविलास पासवान को अपना भगवान कहते हैं और दूसरी तरफ अपने भगवान की धर्मपत्नी से ऐसा व्यवहार कर रहे हैं. जहां तक राजकुमारी देवी को इस्तेमाल करने का आरोप है, इसकी फिक्र वे क्यों कर रहे हैं? राजकुमारी देवी चिराग की माता जी हैं, उनके साथ वे कैसा व्यवहार करते हैं वे बेहतर बता रही हैं. माताजी ने कभी चिराग के विरुद्ध कुछ कहा है क्या? ये मनगढंत बाते हैं.”

जब हमने इस पूरे मसले में राजकुमारी देवी का पक्ष जानना चाहता तो उनका लगातार मोबाइल स्विच्ड ऑफ बता रहा था. आशा देवी और सुनयना देवी से बातचीत नहीं हो पाई.    
 

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