गुजरात की कारोबारी राजधानी अहमदाबाद, अब उन्हीं दिक्कतों का सामना कर रही है जो शहरी विकास के साथ-साथ बढ़ती जाती हैं. एक तरफ जहां हर दिशा में शहर बेतरतीबी से फैल रहा है तो वहीं, साबरमती नदी के तट पर स्थित 'पुराना शहर' पुनर्विकास की मांग कर रहा है.
राज्य सरकार नदी के लगभग 7 किलोमीटर के दायरे में पुनर्विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए सोच-विचार कर रही है. वहीं नदी के किनारे से हासिल जमीन, जहां साबरमती रिवरफ्रंट बनाया गया है, शहर के सबसे महत्वपूर्ण इलाके के ऑर्गनिक रिवाइटलाइजेशन (किसी चीज़ को प्राकृतिक और जीवंत अवस्था में पुनर्जीवित या बहाल करना) का नेतृत्व कर रही है. यह सब रिवरफ्रंट भूमि पर एक नई 'स्काईलाइन' को सावधानीपूर्वक तैयार करके हो रहा है.
साबरमती रिवरफ्रंट के तहत, अहमदाबाद के बीच से होकर बहने वाली नदी के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर 11.25 किलोमीटर तक नदी को 263 मीटर की निरंतर चौड़ाई तक प्रवाहित किया गया. इससे करीब 204.91 हेक्टेयर जमीन शहर के खाते में आई. इसी तकनीक को अब देश भर में झील और रिवरफ्रंट को विकसित करने के लिए एक मॉडल के रूप में प्रचारित किया जा रहा है.
अगस्त 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए जाने के बाद, शुरुआती उत्साह के बावजूद, निकली हुई जमीन पर वाणिज्यिक विकास नहीं हो सका, जैसा कि अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने शुरू में योजना बनाई थी. हालांकि, अब राज्य सरकार अहमदाबाद में 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और उससे पहले और बाद में कई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए भारत की तरफ से बोली की तैयारी कर रहा है. इसके तहत, साबरमती रिवरफ्रंट पर मोटेरा में सरदार वल्लभभाई स्पोर्ट्स एन्क्लेव में, मलबे और सीवेज की नदी की सफाई और रिवरफ्रंट का विकास पहले से कहीं अधिक तेजी से किया जा रहा है.
अगले एक दशक में राज्य सरकार ने पांच चरणीय योजना के तहत शहर के हर तरफ अतिरिक्त 19.5 किलोमीटर क्षेत्र के विकास की घोषणा की है, जिससे नदी के पूर्वी तट पर स्थित GIFT (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंशियल टेक-सिटी) तक बिना किसी रुकावट के नदी संपर्क उपलब्ध हो सकेगा.
एएमसी ने रिवरफ्रंट के विकास के लिए 1997 में साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआरएफडीसीएल) की स्थापना की थी. नदी के किनारे की भूमि, जो मूल रूप से राज्य सरकार के पास थी, एएमसी को हस्तांतरित कर दी गई. इसके एएमसी ने नदी से निकाली गई जमीन के लिए एसआरएफडीसीएल को डेवलपमेंट राइट्स प्रदान किए. 2024 में, एसआरएफडीसीएल ने 'आइकोनिक रियल एस्टेट फॉर ए ग्रीन, हार्मोनियस एंड मेमोरेबल स्काइलाइन' के लिए एक भूमि निपटान नीति (एलडीपी) जारी की.
इस नीति को एएमसी की एलडीपी की तुलना में ज्यादा मुफीद और डेवलपर्स के लिहाज से फायदेमंद बताया जा रहा है. एएमसी की एलडीपी राज्य सरकार की नीति है जिसका उपयोग राज्यव्यापी विकास के लिए किया जाता है, जिसमें एक अलग जीडीसीआर (सामान्य विकास नियंत्रण विनियम) शामिल है. यह राष्ट्रीय डेवलपर्स को आकर्षित करने के लिए गिफ्ट सिटी की निपटान नीति की तर्ज पर है.
देश के दूसरे इमेजिका मनोरंजन पार्क का उद्घाटन लगभग दो साल में अटल ब्रिज के बगल में पूर्वी तट पर डेव एंड बस्टर्स, एक अमेरिकी मनोरंजन और रेस्तरां श्रृंखला के साथ साझेदारी में होने की उम्मीद है. 130 करोड़ रुपये के निवेश से लंदन आई की तर्ज पर एक मौसम-नियंत्रित बड़ा फेरिस व्हील, रेस्तरां, खुदरा स्थान और एक गो कार्टिंग और इनडोर खेल क्षेत्र की घोषणा की गई है.
शहर की भूमि की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, 66 मीटर, यानी लगभग 18 मंजिल की स्काइलाइन हाइट प्रदान की गई है. हालांकि, जानकार सूत्रों का कहना है कि एक ओर जहां नीति के तहत डेवलपर्स को काफी लचीलापन दिया गया है, वहीं प्रत्येक इमारत के लिए 'प्रतिष्ठित' होने की आवश्यकता भी रखी गई है.
ई-सिटी रियल एस्टेट अतुल गोयल समूह पश्चिमी तट पर एक मिश्रित उपयोग वाला कमर्शियल डेवलपमेंट प्लॉट विकसित कर रहा है, जबकि एक अन्य वाणिज्यिक विकास की बोली जल्द ही शुरू हो सकती है. कई पांच सितारा होटल और फूड कोर्ट, एक भव्य कन्वेंशन सेंटर, मॉल, आर्ट डिस्ट्रिक्ट और नदी के किनारे होने वाली गेमिंग अंतिम चरण में हैं.
इस नीति ने सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को डेवलपमेंट राइट्स देने के लिए पारंपरिक निविदाओं को समाप्त कर दिया है. ऑनलाइन बोली के साथ प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है और गुणात्मक प्रस्तुतियों के आधार पर विकास के अधिकार प्रदान किए गए हैं. डेवलपर्स को इन राइट्स को गिरवी रखकर फंड जुटाने की अनुमति देना, एएमसी के 45 दिनों से भुगतान की समयसीमा को बढ़ाकर दो साल करना, बाजार कारकों के आधार पर निर्णय लेने में लचीलापन जैसे कुछ इंसेंटिव इस नीति के तहत दिए गए हैं.
अहमदाबाद को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने के महत्वाकांक्षी दीर्घकालिक नजरिए के साथ, शहरी डेवलपर्स का मानना है कि एक आकर्षक स्काइलाइन जो शहर के चरित्र और संस्कृति को भी दर्शाता हो, अनिवार्य हो गया है.