
इटावा के लोहन्ना चौराहे से लायन सफारी पार्क की तरफ बढ़ते समय शीतलपुर गांव के सामने की सड़क पर लगभग दो एकड़ जमीन पर काम करती क्रेनें और बड़ी संख्या में मजदूरों के बीच बन रहा एक मंदिर लोगों के बीच कौतुहल का केंद्र बना हुआ है. परिसर में लगभग 10 फीट ऊंचे चबूतरे पर इतने ही ऊंचे पत्थर के बने नंदी जी विराजमान हो चुके हैं.
सामने मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है. यह केदारेश्वर महादेव मंदिर है जिसका निर्माण समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव करवा रहे हैं. मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि यह मंदिर ज्योतिर्लिंग देशांतर रेखा पर बनाया जा रहा है. ऐसे में इसका देश-दुनिया में बड़ा महत्व होगा.
केदारनाथ की प्रतिकृति के तौर पर बनने वाले इस मंदिर का भव्य शुभारंभ 2025 में होने की उम्मीद है, हालांकि अभी इसकी कोई घोषणा नहीं की गई है. ज्योर्तिलिंग देशांतर रेखा उत्तर से दक्षिण तक है. इस सीधी रेखा पर उत्तराखंड से रामेश्वरम तक कुल सात ज्योर्तिलिंग अभी तक बने हैं. उत्तराखंड में एक छोर पर केदारनाथ मंदिर है तो दक्षिण में रामेश्वरम मंदिर. वहीं बीच में श्री कालाहस्ती मंदिर, एकम्बरेश्वर मंदिर, अरुणाचलेश्वर मंदिर, जम्बूकेश्वर मंदिर, थिल्लई नटराम मंदिर हैं. जिस तरह देशांतर रेखा पर ही इटावा में केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण किया जा रहा है उससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में यह भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनेगा. इटावा लायन सफारी घूमने आने वाले पर्यटकों को पास में ही मौजूद केदारेश्वर महादेव मंदिर एक नया गंतव्य प्रदान करेगा. करीब 25 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाला यह मंदिर एक वर्ष के भीतर बनकर तैयार होने की उम्मीद लगाई जा रही है. इसको आंध्र प्रदेश में बने ज्योर्तिलिंगों की तर्ज पर बनवाने के उद्देश्य से आंध्र प्रदेश की कंपनी को ही काम दिया गया है.
अपने गृह जनपद इटावा में बन रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर के लिए अखिलेश यादव ने नेपाल से शालिग्राम शिला मंगवाई है. इस शिला से मंदिर में प्रतिष्ठित होने वाले शिवलिंग का निर्माण होगा. 12 फरवरी को देर शाम शालिग्राम शिला नेपाल से ट्रक के जरिए लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर मौजूद सपा कार्यालय पहुंची. पवित्र शालिग्राम की शिला को आंध्र प्रदेश के मधु बोट्टा और जौनपुर के कृपाशंकर नेपाल से लेकर लखनऊ पहुंचे. नेपाल की काली गंडकी नदी में ही ऐसी शिलाएं मिलती है. इन्हें देवशिला कहते हैं.
इटावा ले जाने से पहले लखनऊ लाई गई देवशिला 7 फीट ऊंची, 6 फुट चौड़ी और 13 टन वजन की है. अगले दिन 13 फरवरी को अखिलेश यादव ने पत्नी डिंपल यादव और अन्य नेताओं के साथ पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में शालिग्राम भगवान की विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की. गौरीगंज के सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने बताया कि पहले 11 फरवरी को इटावा में शिला पूजन का कार्यक्रम होना था, लेकिन नेपाल से शिला आने में देर हो गई. इस कारण 13 फरवरी को प्रदेश मुख्यालय में शालिग्राम का पूजन किया गया. शिलाग्राम के पूजन कार्यक्रम में अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव, राज्य सभा सांसद जया बच्चन और 101 विधायक मौजूद थे.

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का यह कदम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के राम मंदिर कार्ड के काउंटर के तौर भी देखा जा रहा है. विधायकों के साथ अयोध्या में राम मंदिर का दर्शन करने न जाने से सपा भाजपा नेताओं के निशाने पर है. हालांकि अखिलेश यादव यह कह चुके हैं कि वे शिव पूजा के बाद ही सपरिवार अयोध्या दर्शन के लिए जाएंगे.
जिस शिव पूजा की बात अखिलेश ने की वह इटावा में बन रहे केदाश्वर महादेव मंदिर में स्थापित होने वाले भगवान शिव ही हैं. अखिलेश ने पहले यह भी कहा था कि भगवान जब बुलाएंगे तभी हम जाएंगे, आपके (भाजपा) बुलावे पर नहीं जाएंगे. भाजपा यह कहकर अखिलेश को लगातार घेर रही है कि अल्पसंख्यक वोट खिसकने के डर से सपा मुखिया अयोध्या नहीं गए. अब अखिलेश केदारेश्वर महादेव मंदिर बनवा कर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वो भी सनातन धर्म को मानने वाले हैं. सपा प्रमुख ने 13 फरवरी को ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर अयोध्या में अपनी सरकार के समय बनाए गए भजन संध्या स्थल के शिलान्यास पत्थर की फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था, “सपा का काम, आस्था के नाम.” इसके जरिए अखिलेश यादव सपा सरकार में अयोध्या में कराए गए विकास कार्यों की याद दिला रहे हैं. आम चुनाव से पहले मोदी
अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के इटावा में केदारेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण की जानकारी सामने लाने से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी की नजर भी धार्मिक रुझान को ज्यादा अहमियत देने वाले हिंदू मतदाताओं पर है.
क्या केदारेश्वर महादेव मंदिर के जरिए अखिलेश यादव हिंदू मतदाताओं में वैसा करंट पैदा करने में कामयाब होंगे जैसा राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भाजपा पैदा करने में कामयाब हुई है? इटावा के एक डिग्री कालेज में प्रोफेसर पद्मा त्रिपाठी कहती हैं, “केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराकर अखिलेश यादव हिंदू मतदाताओं में सपा को लेकर फैली नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादास्पद बयान और राम मंदिर से सपा की दूरी से साइकिल के प्रति बहुसंख्यक हिंदू मतदाताओं में बने नकारात्मक महौल को कम करने की रणनीति के तहत ही केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है. इसमें अखिलेश यादव कितना कामयाब होंगे यह तो समय ही बताएगा. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने लखनऊ में भगवान परशुराम का मंदिर बनवाया था लेकिन चुनाव बाद वे इसे भूल गए.”
अखिलेश यादव के पिता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने खुद को हनुमान भक्त के रूप में स्थापित किया था. उन्होंने अपने पैतृक गांव सैफई में हनुमान मंदिर भी स्थापित किया था. अब अखिलेश यादव भगवान शिव के जरिए भाजपा द्वारा बनाए जा रहे राममय माहौल को काउंटर करना चाह रहे हैं. हालांकि सपा नेता गोपाल यादव इस बात को खारिज करते हुए कहते हैं, “इटावा का केदारेश्वर महादेव मंदिर लोगों के लिए बड़ा आस्था का केंद्र बनेगा. इसके कोई राजनीतिक मायने नहीं है. सपा धार्मिक कार्य भी शांति से करती है.”