अप्रैल की 2 तारीख को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत करीब 50 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. अमेरिका ने सबसे ज्यादा कंबोडिया पर 49 फीसद टैरिफ, जबकि ब्राजील, ब्रिटेन समेत 10 देशों पर सबसे कम 10 फीसद टैरिफ लगाया है.
ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताते हुए भारत पर 26 फीसद टैरिफ लगाने का ऐलान किया. हालांकि, जब ट्रंप के दफ्तर से नया एग्जिक्यूटिव ऑर्डर का एनेक्सर जारी हुआ तो इसमें भारत पर लगने वाले टैरिफ को बढ़ाकर 27 फीसद कर दिया गया.
राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 अप्रैल के दिन को अमेरिका के लिए ‘मुक्ति दिवस’ के रूप में सेलिब्रेट करने का ऐलान किया है. लेकिन, उनके इस ऐलान से भारत के बाजार और आमलोगों पर क्या असर होगा, दुनिया के बाजार पर इसका क्या और कितना प्रभाव पड़ेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत समेत 50 देशों पर क्यों टैरिफ लगाया है?
अमेरिका का व्यापार घाटा करीब 1.2 लाख करोड़ डॉलर है. व्यापार घाटा अमेरिका से दूसरे देशों को बेचे जाने वाले सामानों की कीमत और अमेरिका में आयात की जाने वाली वस्तुओं की कीमत के बीच का अंतर है.
इसका मतलब ये हुआ कि अमेरिका जितना सामान दूसरे देशों को बेचता है, उसकी तुलना में 1.2 लाख करोड़ डॉलर ज्यादा कीमत की वस्तुओं को दूसरे देश से खरीदता है. इसी घाटे को कम करने के लिए अमेरिका ने 50 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाया है.
इसकी तैयारी अमेरिका ने 13 फरवरी 2025 को तभी शुरू कर दी थी, जब ट्रंप ने एक नोटिफिकेशन जारी कर अमेरिकी वाणिज्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे पारस्परिक टैरिफ यानी रेसिप्रोकल टैरिफ की समीक्षा करें.
रेसिप्रोकल टैरिफ वे टैक्स हैं, जिन्हें अमेरिका उसके साथ व्यापार करने वाले दूसरे देशों के सामानों पर लगा रहा है. अमेरिका का कहना है कि ये टैक्स विदेशी मुल्क द्वारा अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए मौजूदा टैरिफ के बराबर होंगे.
मतलब ये हुआ कि अगर अमेरिका के अनाज पर भारत 100 फीसदी टैक्स लेता है तो अमेरिकी बाजार में बिकने वाले भारतीय अनाज पर भी अमेरिका इतना ही टैक्स ले सकता है. लेकिन, किसी देश में किसी चीज की मांग कम और कहीं ज्यादा होती है. ऐसे में रेसिप्रोकल टैरिफ लगाते वक्त अलग-अलग देशों और चीजों पर अलग-अलग टैक्स लगाया जाता है.
ट्रंप सरकार के मुताबिक भारत अमेरिकी सामानों पर करीब 52 फीसद टैक्स लेता है, इसलिए हम उनके सामानों पर आधा टैरिफ लगाएंगे. साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिकी लोग दयालु हैं और यही कारण है कि वह केवल आधे टैरिफ लगा रहे हैं.
ट्रंप के टैरिफ का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर होगा?
भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 4.6 हजार करोड़ डॉलर है. ट्रंप ने साफ कहा है कि ये टैरिफ तब तक लागू रहेंगे जब तक कि अमेरिका के ये घाटा खत्म नहीं हो जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले का भारतीय बाजार पर असर पड़ना तय है. हालांकि, ये देखने वाली बात होगी कि भारत पर इसका कितना असर होगा. अमेरिकी के पारस्परिक टैरिफ पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में वाणिज्य विभाग ने कहा है, "भारत सरकार टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणाओं से होने वाले प्रभावों की सावधानीपूर्वक जांच कर रहा है."
ट्रंप के टैरिफ लगाए जाने के बाद 3 अप्रैल को निफ्टी और सेंसेक्स में इसका नेगेटिव असर देखने को मिला है. दुनिया भर के बाजार ने ट्रंप के फैसले पर नेगेटिव रिएक्ट किया है.
भारत के आईटी और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को बिकवाली दबाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ऐसा लगता है कि लॉन्ग टर्म में बाजार ट्रंप के फैसले से पैदा होने वाले इस प्रभाव को झेल लेगा. एसोचैम के अध्यक्ष संजय नायर ने तर्क दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ योजना का अन्य देशों की तुलना में भारत पर कम प्रभाव पड़ेगा.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा, "भारत पर 27 प्रतिशत का टैरिफ चीन, ताइवान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ की तुलना में अधिक नहीं है. बाजार में इस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया होने की संभावना है. हालांकि. आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता होने वाली है, इससे टैरिफ में कमी आने की संभावना है."
वहीं, एसकेआई कैपिटल सर्विसेज के प्रबंध निदेशक और सीईओ नरिंदर वाधवा के मुताबिक, “भारतीय शेयर बाजार आमतौर पर संरक्षणवादी अमेरिकी नीतियों के प्रति नकारात्मक प्रतिक्रिया करता है. अंतराष्ट्रीय स्तर पर शेयर बाजारों में बढ़ रहे जोखिम को देखते हुए विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में निवेश कम कर सकते हैं, जिससे अस्थिरता बढ़ सकती है.”
इसके अलावा वीटी मार्केट के बाजार विश्लेषक अंकुर शर्मा के मुताबिक, ऑटो, दवा यानी फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है. शर्मा ने आगे कहा, “अब अगर हम भारतीय बाजार पर विचार करें तो जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) की मूल कंपनी टाटा मोटर्स है, जो अमेरिका में गाड़ी बेचती है. टैरिफ की घोषणा के बाद कंपनी को 5% की गिरावट का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा भारतीय दवा पर भी ट्रंप के फैसले का असर देखने को मिल सकता है.”
अंतराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के फैसले का क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका के टैरिफ का दुनिया के देशों पर दो तरह से असर होगा- पहला- विकास की रफ्तार धीमी होगी, दूसरा- महंगाई बढ़ सकती है.
किसी देश पर इसका कितना असर पड़ेगा, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि वह देश अमेरिका पर कितना ज्यादा निर्भर है. वैश्विक व्यापार में अमेरिका की हिस्सेदारी सिर्फ 13% है, जबकि यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 38% है.
अगर यूरोप और एशिया एक-दूसरे से अपने संबंध बेहतर करता है तो लॉन्ग टर्म में अमेरिका पर निर्भरता कम हो सकती है. इसकी बड़ी वजह ये है कि वैश्विक व्यापार में यूरोप और एशिया के बीच व्यापार लगभग 35% है. हालांकि, शॉर्ट टर्म में ट्रेड वॉर से दुनिया भर में काफी आर्थिक नुकसान हो सकता है.
दुनिया के कम आय वाले देशों पर इसका कितना असर होगा, इस बात से समझ सकते हैं कि जिस कंबोडिया की प्रति व्यक्ति आय मात्र 2,950 डॉलर (भारत से थोड़ी ही अधिक) है, उसपर अमेरिका ने सबसे ज्यादा 49 फीसद टैरिफ लगाया है. इसी तरह बेहद कम प्रति व्यक्ति आय वाले बांग्लादेश पर 37% टैरिफ लगाया गया है. इससे इन देशों की इकोनॉमी बुरी तरह से प्रभावित होगी.
क्या ट्रंप के टैरिफ का अमेरिका पर भी कोई असर होगा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट की नीति के तहत जो फैसला लिया है, वो 1930 के दशक की महामंदी की याद को ताजा कर देती है. कई मायने में ये फैसला 9 दशक पहले अमेरिका के टैरिफ अधिनियम यानी स्मूट-हॉले अधिनियम से भी बदतर है.
तब भी इस कानून के जरिए घरेलू उद्योग और किसानों को बचाने के लिए अमेरिका में आयात शुल्क बढ़ा दिया था. इससे दुनिया बुरी तरह से मंदी की चपेट में आ गई थी.
अब एक बार फिर अमेरिका के इस कदम ने दुनिया के बाजार पर दबाव बनाया है, जिससे आर्थिक मंदी का डर सताने लगा है. आर्थिक मंदी से न सिर्फ वस्तुओं के उत्पादन में कमी आती है, बल्कि बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ती है. आमदनी घटने से घर-परिवार के रोज के खर्च चलाने के लिए लोगों के पास पैसा नहीं होता है.
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने जो कहा है वो दुनिया को एक बार फिर आर्थिक मंदी की ओर धकेलने का ही संकेत देता है. दरअसल, बेसेंट ने अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने पर कहा है कि फिलहाल इसका ज्यादा असर नहीं लगता, लेकिन अगर टैरिफ से घबराकर कोई देश जवाबी कार्रवाई करता है, तो जवाब में अमेरिका टैरिफ को और बढ़ा सकता है.
इसमें कोई दो राय नहीं कि कोई देश प्रतिक्रिया नहीं भी करते हैं तो भी अमेरिका के व्यापार पर इसका असर पड़ना तय है. अमेरिका में सामान महंगे होंगे, लेकिन कितने ये देखने वाली बात है. अगर ट्रंड वॉर की स्थिति बनी तो इसका बुरा असर शेयर बाजार पर पड़ेगा. इससे अमेरिका में मंदी की शुरू हो सकती है. यह सबकुछ यूरोपीय यूनियन और बाकी देशों के जवाबी कार्रवाई पर निर्भर करेगा. अगर बाकी देशों ने अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाया तो इससे मंदी आने की संभावना मजबूत हो जाएगी.
भारत के आमलोगों पर टैरिफ का क्या असर होगा?
अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतर अर्थव्यस्था है और यहां के लोग सबसे ज्यादा सामानों का इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि दुनियाभर में उत्पादन होने वाले सामानों का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है. ट्रंप के टैरिफ का भारतीय लोगों पर दो तरह से असर पड़ेगा-
1. टैरिफ से सरकार के खजाना पर दबाव बढ़ेगा: सिटी रिसर्च के अनुसार, भारत को सालाना 7 बिलियन डॉलर (करीब ₹61 हजार करोड़) तक का नुकसान हो सकता है. स्टैंडर्ड चार्टर्ड का अनुमान है कि 10% एक समान टैरिफ बढ़ोतरी से भारत के निर्यात में 11-12% की गिरावट हो सकती है.
मतलब साफ है कि ट्रंप के टैरिफ से भारत सरकार की कमाई में कमी आएगी. सरकार इस पैसे को इंफ्रा या आमलोगों की भलाई पर खर्च करती है. जब आमदनी कम होगी तो सरकार खर्च कम करेगी, या फिर सरकार इस आमदनी की भरपाई के लिए टैक्स बढ़ाएगी. इसका सीधा असर भारत के आमलोगों पर पड़ेगा. हालांकि, सरकार अमेरिका के बजया दुनिया के दूसरे देशों के साथ अपने कारोबार को बेहतर कर इस घाटे की पूर्ति कर सकती है.
2. अमेरिकी बाजार का असर: अगर अब ट्रेड वॉर और ज्यादा आगे नहीं बढ़ा तो अमेरिका और दुनिया के बाजार पर शॉर्ट टर्म असर रह सकता है. लेकिन, अगर ट्रेड वॉर जारी रहा तो अमेरिका में मंदी आ सकती है. इससे भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है. खासकर डिमांड घटने से फार्मा, टेक्सटाइल और आईटी सेक्टर को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
इतना ही नहीं वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ने की वजह से भारत समेत दूसरे देशों के सामानों का निर्यात कम होगा. निवेशकों में डर का माहौल बनेगा इससे वो इंवेस्टमेंट कम कर देंगे. इन सब चीजों की वजह से कंपनियां प्रोडक्शन कम कर देगी और घाटा कम करने के लिए छंटनी करेगी. इससे बेरोजगारी और महंगाई दोनों बढ़ेगी.
अमेरिका ने टैरिफ लगाते हुए भारत पर जो कहा वह चिंताजनक क्यों है?
अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाते हुए जो कहा वह बेहद चिंताजनक है. अमेरिकी सरकार ने अपनी रिपोर्ट में 2014 के बाद से भारत सरकार के अपने बाजार को लेकर बढ़ते संरक्षणवादी रुख की कड़ी आलोचना की गई है.
अमेरिका ने कहा कि कृषि उत्पादों पर भारत की टैरिफ दरें दुनिया में सबसे अधिक औसतन 113.1 फीसद से 300.0 फीसद तक है. WTO के नियमों में बड़ी असमानता की वजह से भारत के पास किसी भी समय कृषि और गैर-कृषि उत्पादों दोनों के लिए टैरिफ दरों को बदलने की काफी लचीलापन है. इसकी वजह से अमेरिकी श्रमिकों, किसानों, पशुपालकों और निर्यातकों को घाटा होता है.
भारत सरकार ने 2019/2020 के बजट में लगभग 70 उत्पाद श्रेणियों पर बिना किसी सूचना या सार्वजनिक परामर्श किए बिना WTO के नियमों का फायदा उठाकर टैरिफ बढ़ा दिया था.