scorecardresearch

भगदड़ की रात कुंभ में क्या हुआ था?

मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान के लिए 28 और 29 जनवरी को 12.5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु महाकुंभ नगर पहुंचे जो उत्तर प्रदेश की आधी आबादी थी

मौनी अमावस्या पर संगम मेला क्षेत्र में हुई भगदड़ के बाद घायल और मृत तीर्थयात्रियों को बाहर निकालते यूपी पुलिस के जवान
मौनी अमावस्या पर संगम मेला क्षेत्र में हुई भगदड़ के बाद घायल और मृत तीर्थयात्रियों को बाहर निकालते यूपी पुलिस के जवान
अपडेटेड 18 फ़रवरी , 2025

मौनी अमावस्या के मौके पर 29 जनवरी को अमृत चखकर पुण्य कमाने और अजर होने प्रयागराज पहुंची करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ बेकाबू हो गई, नतीजतन मची भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई. भीड़ प्रबंधन के सारे दावे और सुरक्षा के वादे धरे रह गए और लोग अपनों की तलाश में दर-दर भटकते रहे.

जैसे-जैसे मौनी अमावस्या की तारीख 29 जनवरी नजदीक आ रही थी, संगम में डुबकी लगाकर पुण्य पाने की लालसा लिए दुनिया भर से श्रद्धालु प्रयागराज के महाकुंभ नगर में जुटने लगे थे. पंडितों का भी दावा था कि मौनी अमावस्या पर ग्रहों का अनोखा संयोग 144 वर्षों के बाद बन रहा है. उसी में भागीदार बनने की लालसा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज के अस्थाई महाकुंभ नगर पहुंचने लगे थे.

सरकारी आंकड़ों की मानें तो मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या पर ही 28 जनवरी की देर शाम तक लगभग 5.5 करोड़ लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई. मौनी अमावस्या के पर्व पर अमृत स्नान के लिए हर कोई महाकुंभ नगर के सेक्टर दो पर संगम नोज (ठीक जहां गंगा और यमुना का पानी मिलता है) पर ही स्नान करना चाहता था. प्रशासन ने मौनी अमावस्या की सुबह 5 बजे से शुरू होने वाले अलग-अलग अखाड़ों के अमृत स्नान के लिए भी एक पूरा 'अखाड़ा मार्ग' रिजर्व किया था.

28-29 जनवरी की रात लगभग एक बजे से भीड़ को जिस रास्ते से स्नान के लिए जाना था, वहां भीड़ क्षमता से अधिक होने लगी. पुलिस-प्रशासन उनको चिह्नित बैरिकेडिंग से ही घाट पर जाने और वापस करने की योजना में था, लेकिन भीड़ बेकाबू हो गई. लगभग 1.45 बजे से 2 बजे के बीच लोग अनियंत्रित होकर बैरिकेडिंग कूदकर संगम जाने लगे. बैरिकेडिंग कूदकर जाने में लोग उन परिवारों पर गिर गए जो वहां सो रहे थे, इसके बाद लकड़ी की बल्ली टूटी तो भीड़ अचानक लोगों को रौंदकर बढ़ने लगी.

जो लोग सो रहे थे या स्नान करने जा रहे थे वे इसी भगदड़ में दब गए. इसके बाद अफरातफरी का माहौल हो गया. कुछ देर में एंबुलेंस और पुलिस वाहनों के तेज सायरन बजाते वाहनों ने दहशत भर दी. कंबल, बैग और जूते समेत लोगों के सामान इधर-उधर बिखरे पड़े थे. अपने परिजनों से बिछड़ने वाले बदहवास घूमते देखे गए. घायलों को मेला क्षेत्र के केंद्रीय अस्पताल ले जाया गया.

गंभीर रूप से घायलों को फिर एसआरएन अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया. अधिकारियों ने मेला क्षेत्र में पहले से ही मौजूद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ में दहशत को रोकने के लिए शाम को आधिकारिक हताहतों की संख्या की घोषणा की. महाकुंभ नगर के जिलाधिकारी ने शाम को मीडिया सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया, "बचावकर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 90 घायलों को अस्पताल पहुंचाया. दुर्भाग्य से, उनमें से 30 की मौत हो गई, जबकि 36 का अभी भी इलाज चल रहा है."

महाकुंभ की ग्लोबल ब्रांडिंग कर रही यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार मौनी अमावस्या के दौरान भगदड़ से हुई मौतों के बाद विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई. विपक्ष के सभी बड़े नेताओं ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही करार दिया. भगदड़ के बाद और संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की खबरों के बीच अखाड़ा परिषद के प्रमुख रवींद्र पुरी ने दूसरे अमृत स्नान को रद्द करने की घोषणा की. हालांकि, मुख्यमंत्री योगी के हस्तक्षेप के बाद, सभी 13 अखाड़े निर्धारित सुबह 5 बजे के बजाए 29 जनवरी की दोपहर 2.30 बजे अमृत स्नान को रवाना हुए.

मेला क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेला प्रशासन और अधिकारियों के संपर्क में बने रहे. प्रधानमंत्री मोदी ने भी फोन पर योगी आदित्यनाथ से मौके का हाल लिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 25-25 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा के साथ ही घटना की न्यायिक जांच के भी आदेश दिए. पूर्व हाइकोर्ट जज हर्ष कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है. कमेटी में रिटायर्ड आइपीएस अफसर वी.के. गुप्ता और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डी.के. सिंह शामिल हैं. न्यायिक जांच दल घटना के मूल कारणों का पता लगाएगा, जबकि पुलिस समानांतर जांच कर यह पता लगाएगी कि यह त्रासदी कैसे और क्यों हुई? इसके लिए योगी ने पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार और प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद को प्रयागराज रवाना किया.

मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान के लिए 28 और 29 जनवरी को 12.5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु महाकुंभ नगर पहुंचे जो उत्तर प्रदेश की आधी आबादी थी. महाकुंभ में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 40,000 पुलिसकर्मी और जवान और 2,700 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं लेकिन इसके बावजूद ये भगदड़ को रोक नहीं पाए. इलाहाबाद से कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह कहते हैं, "सरकार के दावे के अनुसार अगर व्यवस्था चाक-चौबंद थी तो यह हादसा कैसे हो गया? यूपी सरकार के वीआईपी कल्चर ने महाकुंभ में पधारे आम श्रद्धालुओं को भगवान भरोसे छोड़ दिया था." 29 जनवरी की शाम महाकुंभ नगर के मीडिया सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब विजय किरण आनंद से पूछा गया कि क्या वीआईपी प्रोटोकॉल के कारण सुरक्षा व्यवस्था में ढील आई, तो उन्होंने कहा, "आम जनता के लिए अप्रतिबंधित तीर्थयात्रा अनुभव सुनिश्चित करने के लिए किसी भी वीआईपी वाहन को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी."

मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान के लिए संगम नोज पर पहुंचे लोगों की भीड़

हालांकि भगदड़ की इस घटना पर सरकार और चश्मदीदों का पक्ष अलग-अलग है. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस भगदड़ में कुछ बैरिकेड्स टूट गए थे, जिसकी वजह से भीड़ का एक जत्था जमीन पर सो रहे कुछ श्रद्धालुओं पर चढ़ गया. लेकिन चश्मदीदों का कहना है कि संगम घाट पर आने और जाने के लिए एक ही मार्ग था, जिससे लोगों में धक्का-मुक्की हुई और इसके बाद वहां भगदड़ मच गई.

मौनी अमावस्या के दौरान संगम नोज पर मौजूद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर बताते हैं, "महाकुंभ के लिए सरकार ने सिंचाई विभाग और आईआईटी गुवाहाटी के विशेषज्ञों के साथ संगम नोज वाले घाट का अतिरिक्त दो हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया है. पहले इस घाट पर एक बार में 50,000 श्रद्धालु आ सकते थे लेकिन इस दफा एक बार में संगम पर दो लाख लोग आ सकते हैं. लेकिन संगम नोज तक लोगों के आने और वापस जाने के मार्ग काफी संकरे थे. इसलिए इन पर भीड़ का दबाव बढ़ने पर भगदड़ के हालात पैदा हुए."

मौके पर कवरेज कर रहे कई मीडियाकर्मियों के मुताबिक, कई भक्त प्रवेश और निकास के लिए एक ही मार्ग का उपयोग करने लगे, जिससे बाधा उत्पन्न हुई. जब दहशत फैली तो भागने की कोशिश करने वालों को कोई रास्ता नहीं मिला. घनी भीड़ ने उसी संकरे रास्ते से पीछे हटने की कोशिश की, जिससे लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े. प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि अमृत स्नान के मद्देनजर झूंसी की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं को संगम नोज क्षेत्र में जाने से रोकने के लिए अधिकांश पोंटून पुलों को बंद कर देना भी एक बड़ी चूक थी. हालांकि, बड़ी संख्या में तीर्थयात्री संगम घाट तक पहुंचने के लिए विपरीत किले की ओर से प्रवेश कर गए. पोंटून पुलों से बाहर निकलने का रास्ता न मिलने से भीड़ नियंत्रण से बाहर हो गई थी.

महाकुंभ में भगदड़ के बाद स्थानीय प्रशासन के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, बीएसएफ और एनडीआरएफ के त्वरित हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली. सुरक्षाकर्मियों ने घायल श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित मार्ग बनाने को जल्दी से एक मानव शृंखला बनाई. मौके पर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 100 से ज्यादा एंबुलेंस को गुजारा गया. 

भगदड़ में मारे गए लोग अपने पीछे कई सवाल जिंदा छोड़ गए, जिनमें से एक यह भी है कि सिर पर गठरियां लादे कई किलोमीटर पैदल घिसटते हुए जो लोग गांव गिरामों से अपने पाप धोने प्रयागराज पहुंचे और वापस अपनों के बीच नहीं पहुंच सके, उनकी मौत की जिम्मेदार अव्यवस्था का पाप किसके सिर लगेगा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 25-25 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा के साथ ही घटना की न्यायिक जांच के भी आदेश दिए.

Advertisement
Advertisement