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गंदगी और प्रदूषण के बाद अब इंदौर का अगला मिशन - 'भिखारी मुक्त शहर'!

भिखारियों के पुनर्वसन के दौरान इंदौर में कुछ ऐसे भी भिखारी मिले जिनके बैंक बैलेंस और अपने घर थे या जिन्होंने लग्जरी यात्राएं की थीं

एक भिखारिन को ले जाते प्रशासन के लोग
एक भिखारिन को ले जाते प्रशासन के लोग
अपडेटेड 18 फ़रवरी , 2025

भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने एक और सफाई मिशन शुरू किया है: भिक्षावृत्ति को खत्म करना. फरवरी 2024 में शुरू इस पहल के आशाजनक नतीजे सामने आए हैं. इसने एक ऐसा मॉडल पेश किया है जिसे देशभर में अपनाया जा सकता है. यह पहल जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) की अगुआई में चलाई जा रही है. तीन चरण वाले इस कार्यक्रम में भिक्षावृत्ति को लेकर काउंसलिंग, उससे मुक्ति और अमल शामिल हैं.

पहले चरण में अधिकारियों ने 3,500 भिखारियों और उनके परिजनों की काउंसलिंग के साथ भिक्षावृत्ति छोड़ने की सलाह दी. दूसरे चरण में उससे मुक्त करा कर उनका पुनर्वास किया गया. काउंसलिंग के बावजूद बात न मानने वालों को सेवा धाम आश्रम ले जाया गया. वहां उन्हें चिकित्सा देखभाल की सुविधा दी गई. जिन लोगों के पास आधार और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा कार्ड नहीं थे, उन्हें जरूरी चीजें मुहैया कराई गईं. पारिवारिक सहयोग से महरूम विकलांग भिखारियों को आश्रम में स्थायी निवास की पेशकश की गई. दिसंबर, 2024 तक 470 भिखारियों का पुनर्वास किया गया.

कुछ चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए: एक भिखारी ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल से एसी थ्री-टियर कोच में यात्रा की थी; एक अन्य भिखारी के खाते में 2 लाख रुपए थे. एक भिखारी के पास इंदौर में 50 लाख रुपए का मकान था. डब्ल्यूसीडी विभाग के प्रोजेक्ट अफसर और परियोजना के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्र के मुताबिक, "हमें ऐसे 22 भिखारी मिले जो बस से इंदौर आए थे और रोज 450 रुपए चुकाकर होटल में रुकते थे."

पता चला कि शनि देव के नाम पर भीख लेने के लिए पास के रतलाम से आने वाले युवाओं के समूह शामिल हैं. भिखारियों से पता चला कि उन्हें रोज 1,000 से 1,500 रु. तक की कमाई हो जाती है. ऐसे में उनके लिए कड़ी मेहनत वाले काम के मुकाबले भीख मांगना मुफीद पड़ता है.

यह अभियान इस महीने तीसरे चरण में प्रवेश कर गया. जिलाधिकारी आशीष सिंह ने बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की जो भिखारियों और भीख देने वालों पर मामला दर्ज करने की अनुमति देती है. उसके तहत उन्हें छह महीने तक की जेल हो सकती है. भिखारियों या फिर भीख देने वालों की सूचना देने वालों को 1,000 रुपए का इनाम दिया जाता है. आदेश लागू होने के पहले दो हफ्तों में 25,000 रुपए के इनाम दिए गए.

राज्य के भिक्षावृत्ति निषेध (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत, भीख मांगना या भिक्षावृत्ति को बढ़ावा देना अपराध है. यह अधिनियम मूल रूप से 1973 में पारित किया गया था. आशीष सिंह कहते हैं, "नागरिकों और पुलिस से कई शिकायतें मिल रही थीं कि भिक्षावृत्ति एक बड़ा खतरा बन गई है, यह खासकर ड्रग तथा बालश्रम सरीखे अपराधों से जुड़ी हुई है. इसके अलावा, स्माइल प्रोग्राम के तहत भी भिक्षावृत्ति को खत्म किया जाना है."

फिलहाल इस पहल ने शहरी सामाजिक सुधार के लिए एक नई मिसाल पेश की है. कई ऐसे भिखारी भी मिले जिनके बैंक बैलेंस और अपने घर थे या जिन्होंने लग्जरी यात्राएं की थीं.

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