
आर.जी. कर रेप और हत्या मामले में 20 जनवरी को अदालत ने अपना फैसला सुनाया. इसमें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास ने मुख्य आरोपी संजय रॉय को उम्र कैद की सजा सुनाई. अदालत के फांसी की सजा न सुनाने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो और बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाइकोर्ट का रुख किया, ताकि बंगाल समेत पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस जघन्य अपराध को लेकर जनाक्रोश को देखते हुए आरोपी को कड़ी सजा दिलाई जा सके. 27 जनवरी को प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाइकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
पीड़िता के माता-पिता ने सबूतों से छेड़छाड़ और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया लेकिन साथ ही हाइकोर्ट को यह भी बताया कि वे रॉय को फांसी की सजा देने की मांग नहीं कर रहे. अदालत ने जांच में चूक पर कड़ी फटकार लगाई लेकिन अभियोजन पक्ष के साक्ष्य बरकरार रखे, जिसमें गहन पड़ताल के जरिए इस मामले को लेकर कई गलत धारणाओं को दूर कर दिया गया था.
शुरू में यही धारणा हावी रही कि मामला सामूहिक रेप से जुड़ा था और घटनास्थल पर स्थिति बेहद भयावह थी. लेकिन जांचकर्ता कोलकाता पुलिस और सीबीआई ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और फोटोग्राफिक साक्ष्यों और गवाहों पर भरोसा किया जिससे यह बात सामने आई कि अपराध को एक ही व्यक्ति ने अंजाम दिया था.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि पीड़िता की मौत 'गला दबाए जाने और दम घुटने' के कारण हुई थी. जस्टिस दास ने दोनों कारण 'एक-दूसरे से जुड़े होने' पर जोर दिया, जिसमें गला घोंटना प्राथमिक कारण माना गया जबकि दम घुटना सहवर्ती या द्वितीयक कृत्य दर्शाया गया. पीड़िता के गले पर अंगूठे और अंगुलियों के निशानों से स्पष्ट है कि अपराधी ने दाहिने हाथ का इस्तेमाल कर उसका गला दबाया जबकि पीड़िता के होठों पर खरोंच और उसके दांतों के ब्रेसेज का एक-दूसरे से घिसना इसकी पुष्टि करता है कि मुंह दबाए जाने से उसका दम घुट गया.
पीड़िता की पीठ पर ज्यादा चोटें न होने से एक ही हमलावर के हाथों सामने से निशाना बनाए जाने के निष्कर्ष की पुष्टि होती है. आंख-नाक से खून निकलना दम घुटने से मौत की पुष्टि करता है और एक व्यक्ति के नाखूनों के निशान भी आरोपी के अकेले होने की गवाही देते हैं.
रॉय के अपराध में शामिल होने को फोरेंसिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और उसके विरोधाभासी बयानों के माध्यम से स्थापित किया गया. फुटेज में रॉय घटना के दिन सुबह 4:03 से 4:31 बजे के बीच इमरजेंसी बिल्डिंग की तीसरी मंजिल में प्रवेश करते दिखा था, जहां सेमिनार रूम है. उसे हेलमेट और ब्लूटूथ इयरफोन ले जाते देखा गया, हालांकि बाहर आते वक्त उसका इयरफोन गायब था. रॉय का इयरफोन अपराध स्थल से बरामद किया गया. मेटाडेटा ने यह डिवाइस उसके फोन के साथ लगातार कनेक्ट होने की पुष्टि की जिसे गलत साबित करने में रॉय नाकाम रहा. गद्दे और डायस की तस्वीरों से पता चला कि हमले के दौरान इयरफोन फिसलकर गद्दे के नीचे गिर गया था.
फोरेंसिक सबूतों ने रॉय के दोषी होने को और भी ज्यादा पुख्ता किया. उसकी जींस और जूतों पर मिले खून के धब्बे पीड़िता के डीएनए से मेल खाते थे और दोनों के बालों के नमूनों ने भी इस कड़ी को जोड़ा. पीड़िता के बचाव की कोशिश करने के दौरान चेहरे, जांघों और उंगलियों पर लगे खरोंच के निशान आरोपी की बाइक चलाने के दौरान लगी चोटों की दलील को पूरी तरह निराधार साबित करने वाले हैं.

पीड़िता के पिता समेत कई लोग मान रहे थे कि सेमिनार रूम अपराधस्थल नहीं था लेकिन यह धारणा भी गलत साबित हुई. पीड़िता के पिता ने एक निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें फर्श पर खून के दाग या गद्दे पर संघर्ष के निशान न मिलने की बात कही गई थी. लेकिन अदालत ने माना कि अहम सबूत पहले ही जुटाए जा चुके थे. बिस्तर की चादरें, कंबल और गद्दे के नमूने आदि महत्वपूर्ण सुराग कोलकाता पुलिस ने 9 अगस्त, 2024 को अपराध के दिन तुरंत ही जब्त कर लिए थे. जांच के दौरान ली गई तस्वीरों, वीडियो में सेमिनार कक्ष में हिंसा के स्पष्ट निशान दिखे, जिसमें पीड़िता की चादर पर संघर्ष के निशान मिलना शामिल था. इससे यह साफ हो गया कि अपराध को सेमिनार रूम में ही अंजाम दिया गया था.
शव पर चोट के निशान हमले की क्रूरता को दर्शाते थे और इससे यह भी पता चलता है कि घटना की अधिकतम अवधि के दौरान पीड़िता जीवित थी और उसने संघर्ष किया. शव परीक्षण विशेषज्ञों ने रेप की पुष्टि की और किसी कठोर, धारदार वस्तु के कारण लगी चोटों के बारे में बताया. हालांकि, ऐसी कोई वस्तु बरामद नहीं हुई लेकिन चोटों ने पीड़िता के साथ बर्बरता की पुष्टि की. हालांकि, वीर्य या पुरुष के बाल न मिलने से कुछ अनिश्चितता जन्मी लेकिन साक्ष्यों ने घटना की भयावहता दर्शाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सिर पर लगी चोट खासी गंभीर होने के कारण पीड़िता लगातार हमले का विरोध करने में असमर्थ हो गई.
यह दावा सबसे विवादास्पद पहलू था कि पीड़िता के शव पर 151 ग्राम वीर्य मिला था. जांच ने इस गलत धारणा को खारिज करते हुए स्पष्ट किया: कुछ सफेद और गाढ़े तरल पदार्थ की जांच से पता चला कि यह वीर्य नहीं था. लेकिन यह भी पता नहीं चल सकता कि वह क्या था. इसके बावजूद, तमाम निष्कर्ष यौन हमले की बात से इनकार नहीं करते. डीएनए मिलान, चोटों और पीड़िता की तरफ से बचाव की कोशिशों तक, हर सबूत रॉय के इस कृत्य में शामिल होने के बारे में कोई संदेह नहीं रहने देते.
पीड़िता के माता-पिता ने अदालती आदेश पर 17 लाख रुपए मुआवजे लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मुख्यमंत्री 'अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकतीं.' अदालत ने राज्य प्रशासन की कड़ी खिंचाई की लेकिन अपराध को सीधे ममता और उनके प्रशासन से जोड़ने वाले आरोप साबित नहीं हो सके. यह सियासी तौर पर ममता को बड़ी राहत थी.
- अर्कमय दत्ता मजूमदार