
थीं कितनी दुश्वारियां
पश्चिम बंगाल में अभी कुछ समय पहले तक ड्राइविंग लाइसेंस पाना लोगों के लिए एक बेहद निराशाजनक अनुभव होता था. राज्य के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) नौकरशाही सुस्ती के पर्याय बने हुए थे, जहां कामकाज की पूरी व्यवस्था बेहद थकाऊ थी और सुविधा नाम की कोई चीज नहीं थी. आवेदकों के लिए ऐसी अव्यवस्थित प्रणाली में कदम रखना किसी भूलभुलैया में घुसने जैसा ही था, जहां दलालों का बोलबाला था. दलाली से फलने-फूलने वाले ये बिचौलिए कतारों से बचाने और आवेदन आगे बढ़ाने के बदले अच्छी-खासी रकम ऐंठते थे. यही नहीं, पैसे लेकर ड्राइविंग टेस्ट भी आसानी से करा देते थे. ड्राइविंग लाइसेंस का पुराना फॉर्मेट इस समस्या को और बढ़ाने वाला था. कागज पर जारी होने वाले लाइसेंस के अक्सर खराब होने या खोने की खासी संभावना रहती थी, और ऐसी स्थिति में आवेदकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे.
यूं आसान हुआ जीवन
पश्चिम बंगाल परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया को एक नया सुव्यवस्थित रूप दिया है. बड़े पैमाने पर ऑनलाइन प्रणाली की शुरुआत को इसकी सुगमता और पारदर्शिता के लिए सराहा जा रहा है. नई प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन से शुरू होती है, जिससे तुरंत डिजिटल लर्नर लाइसेंस बन जाता है. एक माह सीखने की अनिवार्य अवधि के बाद आवेदक अपने ड्राइविंग टेस्ट स्लॉट ऑनलाइन बुक करा सकते हैं, जिससे समय कम लगता है. फिर एक बार ड्राइविंग टेस्ट के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) जाने के बाद अस्थायी लाइसेंस जारी हो जाता है.
200 रुपए देकर आवेदक सात कार्य दिवस के भीतर अपना स्थायी स्मार्ट कार्ड-आधारित लाइसेंस हासिल कर सकते हैं, जो सीधे डाक से भेजा जाता है. क्यूआर कोड और चिप से लैस ये स्मार्ट कार्ड कागजी खानपूरी को घटा देते हैं और नए जमाने के अनुरूप काम करने वाले हैं. इस बदलाव ने बार-बार आरटीओ के चक्कर लगाने और बिचौलियों की मदद लेने की मजबूरी खत्म कर दी है. यह पारदर्शी प्रक्रिया की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम है.
सबसे बड़ी बात यह कि विभाग समय पर सेवा के लिए प्रतिबद्ध है. अगर किसी आवेदक तक लाइसेंस समय पर नहीं पहुंचता तो तुरंत जांच शुरू हो जाती है और बिना कोई देर लगाए समस्या का हल निकाला जाता है. समावेशिता पक्की करने के लिए 23 जिलों में 3,561 बांग्ला सहायता केंद्र (बीएसके) स्थापित किए गए हैं जो ऑनलाइन प्रक्रिया से अपरिचित आवेदकों की सहायता करते हैं. ये सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म राज्य सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाते हैं, ताकि कोई व्यक्ति इनका लाभ उठाने से अछूता न रहे.
इस सक्रियता ने सरकारी व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा बढ़ाया है. मोटर वाहन अधिनियम, 2019 के अनुरूप होने के बावजूद पश्चिम बंगाल की प्रणाली थोड़ी अलग है. अन्य राज्यों में जहां सरकारी मान्यता प्राप्त केंद्र ड्राइविंग टेस्ट कराते हैं, वहीं बंगाल में इसके लिए आरटीओ जाना अनिवार्य है. हालांकि, राज्य ने इस प्रक्रिया को झंझट मुक्त करने की पूरी कोशिश की है और इसे सिर्फ एक बार यात्रा करने तक सीमित कर दिया है.
बंगाल का परिवहन विभाग लाइसेंस के अलावा अब 102 'फेसलेस सेवाएं' मुहैया कराता है, जिसमें वाहन पंजीकरण, कर भुगतान और परमिट नवीनीकरण शामिल हैं. सभी सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं. सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के साथ इन सेवाओं ने सुविधा और पारदर्शिता में क्रांति ला दी है. नतीजा, आंकड़ों से साफ जाहिर है—1 जून, 2023 से 14 जनवरी, 2025 के बीच विभाग ने 15.4 लाख स्मार्ट कार्ड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस और 21.2 लाख स्मार्ट कार्ड-आधारित पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए.
सरकार का दावा है कि इन पहलकदमियों की वजह से राज्य के खजाने में 73.3 करोड़ रुपए का राजस्व बढ़ा. परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती इस बदलाव को रेखांकित करते हुए बताते हैं, "1.67 करोड़ पंजीकृत वाहनों के साथ सेवाओं को डिजिटल बनाना एक बड़ा काम है. फिर भी, 70-80 फीसद प्रणाली सुव्यवस्थित की जा चुकी है, बाकी रह गई कमियों को भी दूर करने के प्रयास जारी हैं. हमारा लक्ष्य तेज, पारदर्शी और कुशल सार्वजनिक सेवाएं देना है." उनका विभाग अभी तक सही रास्ते पर ही चल रहा है.
इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी
"लालफीताशाही से मिल गई मुक्ति"

उद्दालक बोस ने कई साल पहले गुरुग्राम के एक निजी ड्राइविंग स्कूल के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था, जो कागज पर छपा हुआ था. लेकिन 2023 में इसके रिन्यूअल के दौरान वे यह जानकर हैरान रह गए कि कोई भी सरकारी रिकॉर्ड इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता. बोस अभी कोलकाता में बैंकर हैं. लाइसेंस बनने तक उन्हें कैब और सार्वजनिक परिवहन पर ही निर्भर रहना पड़ा. लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल की नई सुव्यवस्थित प्रणाली की वजह से लाइसेंस पाना काफी सुविधाजनक रहा.
बोस ने ऑनलाइन आवेदन किया और उन्हें तुरंत लर्निंग लाइसेंस मिल गया. एक माह के भीतर उन्होंने ड्राइविंग टेस्ट पास कर लिया और उन्हें एक अस्थायी लाइसेंस जारी कर दिया गया. पोर्टल पर आवेदन के दौरान छोटी-मोटी दिक्कतों को छोड़कर पूरी प्रक्रिया काफी आसानी से पूरी हो गई. बोस कहते हैं, "अब किसी को लालफीताशाही का सामना नहीं करना पड़ता." हालांकि वे बताते हैं कि बिना 'सहायता' आरटीओ कार्यालय और पोर्टल पर सुविधा का लाभ उठाना अभी थोड़ा चुनौतीपूर्ण है.
उद्दालक बोस,
44 वर्ष, बैंकर, कोलकाता
पश्चिम बंगाल का परिवहन विभाग लाइसेंस के अलावा अब 102 'फेसलेस सेवाएं' मुहैया कराता है, जिसमें ऑनलाइन वाहन पंजीकरण और परमिट नवीनीकरण शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल में ड्राइविंग लाइसेंस का डिजिटाइजेशन
शुरुआत जून 2023 में
उपलब्धि: 14 जनवरी, 2025 तक 15.4 लाख स्मार्ट कार्ड लाइसेंस जारी किए गए
- अर्कमय दत्ता मजूमदार