एक लड़का आदमी कब बनता है? वह 18 साल की उम्र में वोट दे सकता है, लेकिन 21 साल से पहले शादी नहीं कर सकता. न शादी, न ही पिता बनने का अधिकार? वहीं 1875 का वयस्कता कानून लड़कों को 18 साल की उम्र में गोद लेने की अनुमति देता है.
तो लड़की शादी कब कर सकती है? 1929 के बाल विवाह निरोधक कानून के अनुसार 18 वर्ष में. लेकिन 1955 के हिंदू विवाह कानून के तहत विवाह की रस्म पूरी होने के बाद विवाह को वैधता मिलती है, भले ही लड़की की उम्र 15 साल से कम क्यों न हो.
इन दोनों को जोड़ें तो एक सीधा-सादा सवाल खड़ा होता है—भारत में एडल्ट यानी वयस्क कौन है? वयस्क को लेकर केंद्र और राज्यों के मिलाकर 30,000 कानूनों के विशाल भंडार में कम-से-कम पांच परिभाषाएं हैं. यही मूलभूत विरोधाभास है, जो सेक्स के लिए आपसी सहमति की उम्र (एओसी) की बहस का केंद्रबिंदु है. यह वह उम्र है जिसके नीचे बलात्कार के आरोप में, सहमति को बचाव का आधार नहीं माना जाएगा. इस विषय पर लोगों की राय बंटी हुई है. इस सवाल पर संसद से सड़क तक बहस है.
आपसी सहमति की उम्र 18 साल होनी चाहिए या 16 साल? रूढि़वादियों ने सहमति की उम्र 16 करने का विरोध किया है, हालांकि 1983 (क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट ऐक्ट) से यह भारत में सहमति से सेक्स की उम्र बनी हुई है. दुनिया में बहुत से देशों में भारत के मुकाबले यह उम्र कम है. उदारवादी एओसी की उम्र 16 साल करने के पक्ष में हैं.
उनका कहना है कि बदलती सामाजिक सच्चाइयों को देखते हुए बढ़ी हुई उम्र से युवा भारत पर असर पड़ेगा. इस मामले पर जोरदार नाटक का अंत 20 मार्च को हुआ, जब संसद ने सहमति से सेक्स की कानूनी उम्र 18 साल तय करते हुए आपराधिक कानून (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी. इसे देखते हुए सेक्स के प्रति जिज्ञासु 18 साल से कम उम्र का लड़का सेक्स के मामले में पकड़े जाने पर गिरफ्तार हो सकता है, उसे जेल में डाला जा सकता है, और यहां तक कि उस पर बलात्कार का आरोप लगाया जा सकता है.
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क्या यह शरीर विज्ञान, कानून, समाज या राजनीति है, जो बालिग होने की उम्र तय करती है? कानूनविद् राम जेठमलानी कहते हैं, ''सहमति से सेक्स की उम्र या सेक्स की गतिविधि में सक्रिय होने की एक निश्चित न्यूनतम उम्र से हम बालिगपन को कैसे आंक सकते हैं.” बालिग होने का क्या मतलब है? क्या यह करियर शुरू करना है, प्रॉपर्टी खरीदना है, शादी करना या बच्चे पैदा करना है? या यह उत्तरदायित्व है, स्वयं फैसला करना है, या आर्थिक आत्मनिर्भरता है? क्या वोटिंग, शराब पीने, वाहन चलाने, लीगल कांट्रेक्ट करने, शादी करने या सहमति से सेक्स की उम्र एक नहीं होनी चाहिए?
वे कहते हैं, ''उम्र की सीमाएं मुख्य रूप से राजनैतिक कारणों से तय होती हैं, वैज्ञानिक कारणों से नहीं.” 25 साल पहले राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मतदान के अधिकार की उम्र 21 से घटाकर 18 साल की थी, जिससे मतदाता सूची में 9.9 करोड़ नए मतदाता जुड़ गए थे. वे कहते हैं, ''अधिक संख्या में मौजूद आबादी के बालिगपन की एक निश्चित उम्र तय किए बिना इतने कानून बनाना बेवकूफी है.”
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दुनियाभर में सहमति से सेक्स की उम्र को लेकर मतभेद हैं. इंग्लैंड में इस पर तब बहस छिड़ गई, जब इस साल जनवरी में निजी स्वतंत्रता के विषय पर सरकार नया कानून बना रही थी. कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ वकील अहिन चौधरी कहते हैं, ''पूरे यूरोप में इसकी उम्र कम करने की मांग उठती रही है क्योंकि बड़ी संख्या में किशोर कम उम्र में सेक्स संबंधी गतिविधियों में सक्रिय हैं.” यूरोप के 20 देशों में एओसी 16 साल से भी कम है. स्पेन में तो यह 13 साल है.
वे कहते हैं, ''इन देशों से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिलता कि कम उम्र की वजह से किशोरियों में गर्भवती होने, बाल यौन शोषण या अवैध यौन व्यापार के मामले बढ़े हैं...उम्र की सीमा कोई भी हो, कानून में वयस्क होने की परिभाषा एक ही होनी चाहिए. वरना यह बनावटी सीमा होगी, जिसका दुरुपयोग होगा.”
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यह 100 साल से भी ज्यादा पुरानी बात है, जब 1892 में 11 साल की फुलमोनी नाम की लड़की के साथ पति के बलात्कार और उसके नतीजतन उसकी मौत के बाद भारत में पहली बार कानून में बदलाव करते हुए यौन संबंध की उम्र 10 से 12 साल कर दी गई. 1949 तक महिलाओं की ओर से कम उम्र में गर्भवती होने के दुष्प्रभावों का मामला उठाने पर उम्र की सीमा बढ़ाकर 15 साल कर दी गई. फिर 1983 में भारतीय दंड संहिता के बलात्कार कानून में संशोधन करके एओसी की उम्र बढ़ाकर 16 वर्ष कर दी गई.
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ (एपवा) की राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन कहती हैं, ''समस्या तब शुरू हुई जब सरकार ने किसी चर्चा के बिना ही नवंबर, 2012 के सेक्स अपराधों से बाल संरक्षण कानून में उम्र की यह सीमा बढ़ाकर 18 साल कर दी. उन लोगों की भी राय नहीं ली गई, जो बच्चों के लिए काम कर रहे थे.” हालांकि जस्टिस जे.एस. वर्मा समिति ने दिल्ली गैंग रेप मामले के बाद अपनी रिपोर्ट में यह उम्र 16 रखी थी, पर केंद्र ने इसे 18 तय करते हुए बलात्कार निरोधक अध्यादेश पेश कर दिया. कृष्णन कहती हैं, ''साफ है कि इसके पीछे लोकलुभावन राजनीति काम कर रही है.”
अदालतें भी सवाल उठा रही हैं. दिल्ली हाइकोर्ट की जज कामिनी लॉ ने अगस्त, 2012 में राज्य बनाम कृष्ण राय चौधरी के मामले में कहा, ''हमारे देश में कानून व्यवस्था का इस्तेमाल प्रेमी किशोरों को दंडित करने के लिए नहीं होना चाहिए.” प्रेमिका के साथ भाग जाने वाले दिल्ली के 18 साल के लड़के को जेल भेजने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, ''अब समय आ गया है कि हमारे कानून निर्माता बदलते सामाजिक व्यवहार और समझदारी को देखते हुए इस विषय पर दोबारा विचार करें.”
ग्लोबलाइजेशन से प्रभावित भारत में किशोर होने का अर्थ बदल चुका है. एक समय था जब बच्चों से आदेश पर अमल की उम्मीद होती थी और मना करना माता-पिता का जन्मसिद्ध अधिकार होता था. दिल्ली के एम्स में क्लिनिकल साइकोलॉजी की प्रोफेसर डॉ. मंजू मेहता कहती हैं, ''आज के बच्चों के पास ज्यादा मौके, विकल्प, जानकारी और जीवन से जुड़ी ज्यादा उम्मीदें हैं.” वे अपनी सेक्सुअलिटी के बारे में खुद की बात साफ-साफ व्यक्त करते हैं: 2009 से इंडिया टुडे के सेक्स सर्वे से पता चलता है कि पांच में से एक किशोर 13 साल से कम उम्र में ही पोर्न देखता है और पांच में से एक का दावा है कि उसने यौन संबंध बनाए हैं.
अगर इस बहस में विज्ञान की कोई जगह है तो वयस्कता के मामले में 18 साल की उम्र सही नहीं है. शरीर विज्ञान की दृष्टि से 16 साल से पहले किशोरावस्था आ जाती है. शरीर के सारे तंत्र किसी एक तय उम्र में वयस्कता के स्तर तक नहीं पहुंचते हैं और शारीरिक या मानसिक रूप से 18 साल कोई बड़ा मील का पत्थर नहीं होता है.
न्यूरोसाइंटिस्ट कहते हैं कि हालांकि दिमाग की ज्यादातर वायरिंग 16 साल की उम्र में परिपक्व हो जाती है, पर 20 की उम्र से पहले फैसला लेने, नतीजे और नफा-नुकसान का अनुमान लगाने के लिए दिमाग के महत्वपूर्ण हिस्से पूरी तरह तैयार नहीं होते हैं. बंगलुरू में नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज के न्यूरोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुमंत्र चटर्जी कहते हैं, ''ऐसी कोई तय उम्र नहीं है, जिसमें किशोर वयस्क बन जाते हैं.”
आप 18 साल से पहले कार नहीं चला सकते लेकिन 16 साल की उम्र में 50 सीसी की दुपहिया को सड़कों पर घुमा सकते हैं. आप 15 साल से पहले अपने पासपोर्ट के लिए आवेदन नहीं कर सकते लेकिन देश के ज्यादातर राज्यों में 14 साल की उम्र पूरी करने के बाद आप काम करने के योग्य माने जाते हैं. भारत में उम्र कोई संख्या नहीं है.
तमाम बहस के बाद भी कानून अपने मकसद में कामयाब नहीं रहा. इस हकीकत की अनदेखी करते हुए कि किशोर सेक्स का अनुभव चाहते हैं, नए कानून ने जिज्ञासु किशोरों को अपराध की ओर बढऩे की राह दे दी है. वयस्क की एक तय परिभाषा के बिना यह इस मूलभूत समस्या को हल नहीं करती है कि भारत में वयस्क कौन है. इस बहस ने 'सहमति’ को सेक्स की राह समझते हुए नैतिकता का जामा पहन लिया है.