तकनीकी उन्नति की तेजी के दौर में आपके कामों को अंजाम देने के लिए बहुत सारे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स उपलब्ध हैं. आपको इनका इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडवांस इन लर्निंग के वाइस प्रोवोस्ट भरत एन. आनंद इसके लिए आसान-सा नियम बताते हैं: गलतियां महंगी न पड़ें और समय बच जाए.
जिन कामों के लिए सटीक जानकारी की जरूरत होती है और जहां गलती करना महंगा पड़ता हो, वहां जनरेटिव एआई (जेनएआई) के इस्तेमाल को लेकर लोग ज्यादा सावधान रहेंगे. लेकिन जिन कामों को जेनएआई अच्छी तरह कर सकता है, वहां कितना वक्त बचता है, वही इसे अपनाने में मदद करेगा.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में आनंद ने कहा कि यही तर्क शिक्षा के क्षेत्र पर भी लागू होता है. मसलन हार्वर्ड में अपनी कक्षाओं में जेनएआई का इस्तेमाल करने वाले संकाय सदस्यों से साक्षात्कार लिया गया तो कुछ दिलचस्प उदाहरण सामने आए: एक संकाय का को-पायलट चैटबॉट 24/7 उपलब्ध है और किसी शिक्षण सहायक की तरह काम करता है.
इस दौरान बचे हुए समय में शिक्षक जेनएआई से तैयार सामग्री को बेहतर करते हुए क्विज और टेस्ट डिजाइन करते हैं. यहां तक कि छात्रों के सीखने के लिहाज से एआइ बॉट ट्यूटरों का असली प्रशिक्षकों के साथ मूल्यांकन करने के लिए एक शुरुआती प्रयोग किया गया तो पता चला कि छात्रों का बॉट्स के साथ ज्यादा जुड़ाव था.
लेकिन एआई के कारण क्या शिक्षा तक सभी की समान पहुंच होगी और हर किसी को बराबरी के अवसर मिलेंगे? आनंद का ख्याल है कि इसके उलट दिशा में जाने की भी संभावना है, इससे डिजिटल खाई बढ़ सकती है, जिनके पास पहले से ही डोमेन विशेषज्ञता है, उनको दूसरे लोगों की तुलना में ज्यादा फायदा हो सकता है. उन्होंने बताया, ''जब आपको किसी विषय का ज्ञान होता है तो आप यह फैसला करते हैं कि क्या चीज काम की है और क्या नहीं."
इसलिए आनंद छात्रों को सलाह देते हैं कि वे कड़ी मेहनत करें क्योंकि डोमेन की जानकारी ही उन्हें एआई टूल्स का कारगर तरीके से उपयोग करने में सक्षम बनाएगी. उन्होंने कहा, ''मैं बच्चों से कहूंगा कि उन शिक्षकों का अनुसरण करें जो आपको प्रेरणा देते हैं. और इसका कारण यह है कि अगर आप किसी विषय को लेकर प्रेरित और उत्साही हो सकते हैं, जो ऐसा कुछ बनाने जा रहा है जो आपके जीवन में हमेशा रहेगा...तो यह जिज्ञासा ही आंतरिक प्रेरणा है."
खास बातें
गलतियों की लागत और समय की बचत जनरेटिव एआई को अपनाने में अहम भूमिका निभाएगी; यह कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है.
पर इससे डिजिटल असमानता बढ़ सकती है क्योंकि इसके लाभ ज्यादातर उन लोगों को मिलेंगे जिनके पास किसी विशेष क्षेत्र की विशेषज्ञता होगी.