
डीपसीक के सामने आने से जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेनएआइ) के क्षेत्र में जो उथल-पुथल मची है, उसने 'सॉवरिन एआइ’ की बहस फिर से तेज कर दी है. सॉवरिन या संप्रभु एआइ शब्द मोटे तौर पर बताता है कि कोई देश अपना खुद का एआइ ढांचा बनाने में कितना सक्षम है.
इस इन्फ्रास्ट्रक्चर में बुनियादी स्तर के बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) शामिल हैं, जैसे चीन के एक स्टार्टअप का डीपसीक-आर1 जिसे उसने ओपन एआइ के जीपीटी-4 की तुलना में बहुत कम लागत पर विकसित किया है. जीपीटी-4 असल में जेनएआइ के आधार स्तंभ हैं.
डेलॉइट कंसल्टिंग में प्रिंसिपल नितिन मित्तल कहते हैं, ''भारत की तरह बहुत-से देश सॉवरिन एआइ की राह पर बढ़ रहे हैं.’’ मित्तल वर्तमान में अमेरिकी जेनरेटिव एआइ इनोवेशन लीडर और ग्लोबल कंसल्टिंग इमर्जिंग मार्केट्स लीडर हैं.
मित्तल के मुताबिक, इनमें समानता यह है कि ये भी भौतिक वस्तुओं का उत्पादन करने वाले मैन्युफैक्चरिंग के तंत्र की तरह हैं. एआइ दरअसल मैन्युफैक्चरिंग इंटेलिजेंस के बारे में है. यह डिजिटल वस्तु है. वास्तव में उस डिजिटल वस्तु को बना लेने की आपकी विनिर्माण क्षमता कैसी है, यही आपका सॉवरिन एआइ इन्फ्रास्ट्रक्चर है.’’

उभरती हुई एआइ की कहानी का दूसरा हिस्सा है एआइ जैसे अनूठे उत्पाद जो बुनियादी ढांचे पर बनाए जाते हैं. माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंडोक कहते हैं, ''मुझे लग रहा है कि 2025 एआइ एजेंटों का वर्ष बन सकता है. ये एजेंट असल में स्वायत्त सॉफ्टवेयर सिस्टम हैं जो आपका संदर्भ, आपका मकसद समझते हैं और आपका काम पूरा करते हैं.’’
मित्तल कहते हैं, ''जेनएआइ के कुछ बताने से अब हम कुछ करने तक आगे बढ़ गए हैं. यह बड़ी बात है... जेनएआइ के पहले चरण में आप चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर सकते थे. आप पूछते और वह आपको कुछ बता देता, आपको अंतर्दृष्टि देता, जिज्ञासा को शांत करता. अब असल में यह काम को अंजाम दे रहा है, विभिन्न चरण में काम की कई गतिविधियों को पूरा कर रहा है, संवाद कायम कर रहा है.’’
चंडोक कहते हैं कि वक्त का तकाजा कौशल और सीखने की जरूरत का है ताकि इन एआइ टूल्स का कारगर तरीके से उपयोग किया जा सके.
प्रेसिडेंट, माइक्रोसॉफ्ट के कार्यकारी अधिकारी और माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट पुनीत चंडोक के मुताबिक एआइ आपकी नौकरी नहीं छीनेगा, पर हां, कोई ऐसा बंदा आपकी नौकरी जरूर छीनेगा जो एआइ का सचमुच बहुत अच्छे ढंग से इस्तेमाल करना जानता हो. भारत के लिए जो सबसे काम की बात है वह है स्किलिंग यानी अपनी दक्षता बढ़ाना.
डेलॉइट कंसल्टिंग के नितिन मित्तल बताते हैं कि एआइ की दुनिया में नवाचार इस रफ्तार से हो रहे हैं जिसकी हमने किसी और क्षेत्र में कल्पना भी नहीं की है. सालों और महीनों में नई खोज की तो बात ही नहीं हो रही, अब तो यह देखने की बात है कि कितने हक्रते या कितने दिन में कोई नया आविष्कार हो गया.