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देश का मिजाज सर्वे: भारत की विदेश नीति को लेकर क्या सोचती है देश की जनता?

आम तौर पर मोदी सरकार की विदेश नीति लोगों को पसंद आती है लेकिन कई लोगों का मानना है कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते खराब हुए हैं

25 फरवरी, 2020 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
25 फरवरी, 2020 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अपडेटेड 27 फ़रवरी , 2025

बांग्लादेश की उथल-पुथल भारत के लिए अपने पड़ोस में एक नई चुनौती बनकर उभरी है. इसकी शुरुआत अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना से सत्ता छिनने और अंतरिम सरकार के गठन के बाद हुई थी. दिसंबर में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ढाका यात्रा कर यह संकेत दिया कि भारत अपने कूटनीतिक दृष्टिकोण पर फिर से मंथन कर रहा है. हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने की बार-बार उठने वाली मांग और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमले संबंधों में बाधा बन रहे हैं. दूसरी ओर, बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ती गलबहियां एक चिंताजनक घटनाक्रम है.

इंडिया टुडे देश का मिज़ाज (एमओटीएन) फरवरी 2025 के सर्वेक्षण में उत्तरदाताओं ने नए बांग्लादेश के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर मिली-जुली प्रतिक्रिया जाहिर की. 20.6 फीसद लोगों की राय है कि भारत का रुख समझदारी भरा है, जबकि 33 फीसद से ज्यादा लोगों की नजर में नई दिल्ली ने हिंदुओं की हत्या पर उचित प्रतिक्रिया नहीं जताई. 29 फीसद उत्तरदाताओं ने कहा कि भारत को बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. 37.6 फीसद लोग हसीना को शरण देने को सही मानते हैं; 20 फीसद से ज्यादा लोगों को लगता है कि रिश्ते सुधारने के लिए उन्हें प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए. वहीं 29 फीसद से ज्यादा लोग उन्हें किसी और देश को भेजने के पक्ष में हैं.

पूर्वी लद्दाख में तनाव अब एकदम नीचे आ गया है और नई दिल्ली-बीजिंग के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार नजर आ रहा है. चीन के साथ संबंधों में भारत की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए, इस पर देश का मिज़ाज सर्वे में 53 फीसद से ज्यादा उत्तरदाताओं ने कहा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए जबकि 19.7 फीसद व्यापार संबंधों को बढ़ाने के पक्ष में हैं. 23 फीसद से ज्यादा लोगों को लगता है कि भारत को बीजिंग के साथ कूटनीतिक वार्ता जारी रखनी चाहिए.

हमेशा की तरह, भारत ने अपने पुराने सहयोगी रूस, पश्चिम और अमेरिका के साथ संबंधों में एक बेहतर संतुलन कायम कर रखा है. इसके मद्दनेजर ही 72.6 फीसद उत्तरदाताओं की राय है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति ने दुनियाभर में भारत का कद बढ़ाया है. हालांकि, 24 फीसद इससे असहमत हैं. देश का मिज़ाज सर्वे के उत्तरदाता भारत के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर बंटे हुए हैं. जहां 30 फीसद की राय है कि ट्रंप प्रशासन भारत के लिए अच्छा होगा, वहीं 31.7 फीसद की नजर में इसका बहुत कम प्रभाव होगा.

हैरानी की बात देखिए, इस सवाल पर कि आतंकवाद को बढ़ावा देने के बावजूद क्या भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए, 44.7 फीसद लोगों ने हां कहा. जबकि 38.5 फीसद ने इसके खिलाफ राय जाहिर की. यही नहीं, 13.8 फीसद उत्तरदाता बातचीत के खिलाफ हैं लेकिन यह चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान होना चाहिए, जिसमें एक-दूसरे की क्रिकेट टीमों की मेजबानी करना भी शामिल है.

भारत के अपने अन्य पड़ोसी देशों—नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव के साथ संबंध अच्छे हैं, हालांकि इनमें थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव आता रहा है. फिर भी, इस बार केवल 39.2 फीसद लोगों का कहना है कि पड़ोसियों के साथ संबंधों में सुधार हुआ है, जबकि अगस्त 2024 में यह आंकड़ा 60.9 फीसद. वहीं 32.6 फीसद को लगता है कि पड़ोसियों के साथ रिश्ते बिगड़े हैं जबकि अगस्त 2024 में यह आंकड़ा महज 21 फीसद था.

क्या रहे नतीजे?

 

प्र: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने के बारे में आपकी क्या राय है?

45% का मानना है कि भारत को पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता  करनी चाहिए; 39 फीसद इससे सहमत नहीं; 14 फीसद सिर्फ सांस्कृतिक आवाजाही के पक्ष में

73% का मानना है कि मोदी के नेतृत्व में भारतीय विदेश नीति की दुनियाभर में वकत बढ़ी है; चौथाई फीसद इससे सहमत नहीं. 

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