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फिटजी ने क्यों तोड़ा दशकों से कायम छात्रों का भरोसा?

पिछले तीन दशकों से आईआईटी की तैयारी कराने का पर्याय बने फिटजी कोचिंग संस्थान की आंतरिक सेहत कैसे खराब हुई और इसने कैसे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया

भोपाल में बंद हुए फिटजी सेंटर के सामने विरोध प्रदर्शन करते छात्र और उनके अभिभावक
भोपाल में बंद हुए फिटजी सेंटर के सामने विरोध प्रदर्शन करते छात्र और उनके अभिभावक
अपडेटेड 18 फ़रवरी , 2025

हाल तक पटना का  फिटजी सेंटर यहां आइआइटी कोचिंग का सिरमौर था, जहां दिन में हर वक्त चहल-पहल बनी रहती थी. लेकिन जनवरी के चौथे हफ्ते में यहां का पूरा नजारा बदल गया. अब यहां सन्नाटा पसरा हुआ है. यह सेंटर बंद हो चुका है. यहां कोचिंग लेकर पढ़ाई करने वाली अर्पिता बताती हैं, "यहां अच्छे शिक्षक थे और इस संस्थान का रिजल्ट अच्छा आता था, इसलिए हमने इसमें दाखिला लिया था और संस्थान को तकरीबन 2.80 लाख रुपए दिए थे. अभी मेरे कोर्स में करीब साल भर का वक्त बचा हुआ है लेकिन यह सेंटर बंद हो गया."

पटना सेंटर आगे कब शुरू होगा, इस बारे में अर्पिता और उनके तमाम सहपाठियों को कोई खबर नहीं. वे हताशा और नाराजगी भरे स्वर में कहती हैं, "ऐसा लग रहा है कि हमारा पैसा तो गया ही, समय भी बर्बाद हो गया." हालांकि यह सिर्फ पटना का मामला नहीं है. बीते दिनों राजधानी दिल्ली समेत नोएडा, गाजियाबाद, पुणे, पटना, लखनऊ, भोपाल, इंदौर और रांची समेत करीब एक दर्जन सेंटर फिटजी ने बंद कर दिए.

इनके बंद होने की वजह से 10,000 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं. फिटजी ने कहा है कि  स्थानीय साझेदारों के रवैये और शिक्षकों के सामूहिक इस्तीफों की वजह से सेंटर बंद किए गए हैं. ये इस्तीफे इसलिए हुए क्योंकि शिक्षकों को पिछले कई महीने से तनख्वाह नहीं मिल रही थी. कंपनी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि  वह इन सेंटर को फिर शुरू करेगी, हालांकि छात्रों को इस बारे में अलग से कोई सूचना नहीं दी गई है. छात्रों की समस्याओं के बारे में अर्पिता बताती हैं, "अब हम अगर कोई नई कोचिंग में जाते हैं तो वहां के बैच पहले से चल रहे होंगे. वहां पढ़ाई से तालमेल बिठाने में हमें दिक्कतें आएंगी."

ऐसी ही उलझन फिटजी के वाराणसी सेंटर से तैयारी कर रहे वेदांश की भी है. उनका सेंटर बंद हो चुका है और फिटजी ने उनकी क्लास आकाश इंस्टीट्यूट में शिफ्ट कर दी है. वेदांश बताते हैं, "हमारी क्लास तो चल रही है लेकिन पहले की तरह रेगुलर नहीं है और टीचर्स भी बदल गए हैं." सिर्फ बनारस में ही नहीं बल्कि दिल्ली समेत कुछ और दूसरी जगहों पर भी फिटजी की क्लास को आकाश इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर चलाया जा रहा है.

फिटजी के अलग-अलग सेंटर से आईआईटी पहुंचने का ख्वाब संजोए तैयारी कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों से बात करने पर पता चलता है कि इन हालात में वे खुद को बेहद भ्रम और अनिर्णय की स्थिति में पा रहे हैं. ग्रेटर नोएडा के अभय प्रताप कहते हैं, "मेरा बेटा फिटजी के ग्रेटर नोएडा सेंटर से तैयारी कर रहा था. हम लोगों के मोबाइल पर अचानक मैसेज आया कि कल से संस्थान बंद. यह बहुत ही गैरजिम्मेदाराना रवैया है. देश में कारोबारों को संचालित करने के लिए कानून हैं. फिटजी ने जो किया वह न तो कानूनी तौर पर सही है और न ही नैतिक तौर पर. जब हम रिफंड मांगने गए तो हमारे केंद्र के संचालक ने कहा कि पैसे मैं नहीं लौटा सकता, इसके लिए आपको दिल्ली हेड ऑफिस से संपर्क करना होगा."

फिटजी के एक सेंटर में बनी हेल्प डेस्क (फाइल फोटो)

अभी जो स्थिति है, उसमें छात्रों के सामने दो ही विकल्प हैं. पहला यह कि फिटजी के शीर्ष प्रबंधन की बातों पर यकीन करते हुए बंद हुए सेंटरों के दोबारा शुरू होने का इंतजार करें. दूसरा यह है कि दूसरे संस्थानों में दाखिला लेकर अपनी तैयारी को नए सिरे से शुरू करें. लेकिन नए संस्थान में दाखिला लेने वालों में से आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के लोगों के सामने यह दिक्कत आ रही है कि फिटजी में उनके पैसे डूब गए और नए संस्थान में फिर से पैसे भरने होंगे. इन समस्याओं से दो-चार हो रहे छात्र और उनके अभिभावक विरोध-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं. ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, पटना, रांची और भोपाल में फिटजी के इस मनमाने निर्णय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया जा रहा है.

फिटजी की जवाबदेही तय करने के लिए कई जगह उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई हैं. अब स्वाभाविक सवाल यह उठता है कि आखिर आइआइटी की तैयारी कराने वाले इस शीर्ष संस्थान की हालत पतली कैसे हुई. ऊपरी तौर पर इसकी सबसे बड़ी वजह दिखती है शिक्षकों को समय पर वेतन न मिलना और इस वजह से उनका फिटजी छोड़कर दूसरे संस्थानों में जाना.

फिटजी के लखनऊ सेंटर में हाल तक पढ़ाने वाले गौरव सेंगर कहते हैं, "2024 की शुरुआत में हमें संस्थान के शीर्ष प्रबंधन के स्तर पर कह दिया गया था कि कंपनी के पास कैश फ्लो की दिक्कत है और हम कोचिंग बंद नहीं करना चाहते. आप लोग कुछ दिन बिना सैलरी के काम कीजिए और बहुत जल्द सब ठीक हो जाएगा. पिछले एक साल में सिर्फ चार-पांच महीने की ही सैलरी मिली है. ऐसी स्थिति में कई शिक्षक संस्थान छोड़ने लगे."

कुछ शिक्षक तो दूसरे संस्थानों में चले गए होंगे लेकिन कुछ ऐसे भी होंगे जिनके सामने फिटजी के सेंटर्स अचानक से बंद होने से रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया होगा? जवाब में गौरव सेंगर कहते हैं, "नहीं, ऐसा नहीं है. फिटजी में शिक्षकों की चयन प्रक्रिया कठिन थी और यहां के टीचर्स की दूसरे संस्थानों में अच्छी डिमांड है. फिटजी के शिक्षकों के लिए कोई खास समस्या नहीं है लेकिन छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं."

फिटजी में ही पढ़ा रहे एक अन्य शिक्षक बताते हैं कि इंजीनियरिंग की तैयारी कराने वाले शिक्षकों को शुरुआत में ही सालाना 30 लाख रुपए का पैकेज मिल जाता था और कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनका पैकेज दो करोड़ रुपए सालाना के आसपास था.

जब इस पूरे मामले पर फिटजी का पक्ष जानने के लिए इंडिया टुडे ने संस्थान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करने की कोशिश की तो संस्थान की तरफ से कहा गया कि जो बयान कुछ दिन पहले फिटजी की तरफ से जारी किया गया, उसमें सब कुछ है. फिटजी ने कई सेंटर बंद होने के बाद जब छात्र और अभिभावक सड़क पर उतरने लगे तो संस्थान ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया था. इसमें संस्थान ने कुल 13 बिंदुओं में अपनी बात रखी.

इनका सार यह है कि ये सेंटर उनके स्थानीय पार्टनर्स की लापरवाहियों की वजह से बंद हुए हैं और शीर्ष प्रबंधन इन सेंटरों को फिर से शुरू करने के लिए जरूरी बंदोबस्त करने में लगा हुआ है. साथ ही फिटजी ने यह भी कहा कि उसकी इस स्थिति का फायदा दूसरे प्रतिस्पर्धी कोचिंग संस्थान उठा रहे हैं और उसके खिलाफ एक षड्यंत्र के तहत दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है. कंपनी ने कहा कि वह अपनी हर वित्तीय दस्तावेज की जांच के लिए तैयार है.

फिटजी इसे साजिश साबित करने पर इस तरह से आमादा है कि उसके जो ईमेल आइडी मीडिया संपर्क के लिए जारी किया है, उसमें भी 'कॉन्स्पिरेसी’ शब्द का इस्तेमाल किया है.

दरअसल, फिटजी के पतन की इस कहानी में कई ऐसी गुत्थियां और सवाल हैं, जिनका जवाब इस बयान में नहीं मिलता. गौरव सेंगर बताते हैं, "2017 में कंपनी की माली हालत खराब होने का हवाला देकर शिक्षकों की सैलरी कम की गई थी हालांकि फिर 2021 में अच्छा अप्रेजल हुआ. लेकिन 2024 से फिर सैलरी में दिक्कत आने लगी. सारे टीचर्स में यही बात हो रही थी कि जब एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या कम नहीं हो रही है तो फिर कंपनी के पास पैसे की दिक्कत क्यों है." इसी दौर में फिटजी में शिक्षकों की संख्या लगातार घटने लगी.  

फिटजी के रांची केंद्र में गणित पढ़ाने वाले निवास कुमार ने दो साल पहले संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन डी.के.गोयल को बाकायदा एक मेल लिखकर बताया था कि संस्थान में क्या गड़बड़ चल रही है. उन्होंने कुल 12 मुद्दे उठाए थे. इसमें सेंटर हेड की मनमर्जी से लेकर स्कॉलरशिप परीक्षा में गड़बड़ी समेत गुटबाजी, शिक्षकों के साथ भेदभाव और भ्रष्टाचार आदि मसले शामिल थे. लेकिन इसके बाद भी संस्थान ने कुछ नहीं किया.

इस बीच फिटजी में वित्तीय गड़बड़ियों की बात भी चर्चा में आई. दरअसल, फिटजी की ऑडिटर बीएसआर ऐंड कंपनी ने खुद को 25 दिसंबर, 2024 को कंपनी के ऑडिट से यह कहते हुए अलग कर लिया कि उसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे. फिटजी में लंबे समय तक विभिन्न पदों रहे एक व्यक्ति दावा करते हैं, "ऑडिटर ने 2011-12 में एक कंपनी को इंटरेस्ट फ्री 60 करोड़ रुपए का एडवांस दिए जाने पर सवाल उठाया था. 1 अप्रैल, 2023 को 26.41 करोड़ रुपए का एक लोन दूसरी कंपनी को देने का सवाल उठा जिसे फिटजी ने अपने खाते में 31 मार्च, 2024 को शून्य दिखाया है. 53 करोड़ रुपए से अधिक के एक और लोन की बात भी ऑडिटर ने उठाई थी." इन विषयों पर बात करने के लिए संपर्क किए जाने पर बीएसआर ऐंड कंपनी की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया कि हम अपने किसी भी क्लाइंट के बारे में बात नहीं कर सकते.

इंडिया टुडे ने इस हवाले से फिटजी के शीर्ष प्रबंधन से बात करने की कोशिश की लेकिन उसकी तरफ से कहा गया कि सारे सवालों के जवाब उसके सार्वजनिक बयान में हैं. इसके बाद संस्थान के प्रबंधन ने ईमेल पर सवाल भेजने को कहा हालांकि रिपोर्ट प्रकाशित होने तक इंडिया टुडे को भेजे गए सवालों के जवाब नहीं मिल पाए. 

फिटजी के वित्तीय दस्तावेजों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि कंपनी की स्थिति हाल के वर्षों तक अच्छी रही है. 2022-23 वित्तीय वर्ष में कंपनी की आमदनी 481.1 करोड़ रुपए थी. यह वित्त वर्ष 2021-22 के मुकाबले 22 फीसद अधिक थी. कोरोना के पहले वाले साल यानी वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी को कुल 618 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी.

इसके बाद अगले साल आमदनी कम हुई लेकिन 2021-22 से सुधरने लगी. 2018-19 के कंपनी के दस्तावेज बताते हैं कि कंपनी 135 करोड़ रुपए के घाटे में थी. हालांकि 2020-21 में कंपनी ने 20 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया. इसके अगले साल कंपनी को 57 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ. इसी साल फिटजी के शिक्षकों की आखिरी बार तनख्वाह बढ़ी थी. ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की माली हालत बुरी तो नहीं थी.  

आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई के बाद डी.के. गोयल ने 1992 में फिटजी की शुरुआत दिल्ली से की थी. पांच साल में ही संस्थान ने आईआईटी टॉपर दिया और बहुत कम समय में फिटजी आईआईटी में दाखिले के लिए सबसे प्रमुख संस्थान बनकर उभरा. देश भर में इसके 70 से अधिक केंद्र हो गए थे. कोचिंग के अलावा स्कूल, कॉलेज और एडटेक क्षेत्र में भी इस समूह ने अपना विस्तार किया. 

लेकिन मौजूदा संकट फिटजी के तीन दशक से अधिक के सफर का सबसे बड़ा संकट है. इसके बावजूद कंपनी न तो इसके समाधान के लिए और न ही अपने ब्रांड पर आइआइटी की तैयारी करने वालों को भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाते हुए दिख रही है. 

फिटजी का दावा है कि स्थानीय पार्टनर्स की लापरवाहियों की वजह से सेंटर बंद हुए हैं लेकिन वह इन्हें फिर शुरू करने की योजना बना रहा है


कहां के सेंटर बंद

दिल्ली: लक्ष्मी नगर
उत्तर प्रदेश: नोएडा, लखनऊ गाजियाबाद, वाराणसी, मेरठ
बिहार: पटना

झारखंड: रांची
मध्य प्रदेश: भोपाल, इंदौर
महाराष्ट्र: पुणे, पिंपरी चिंचवड

फिटजी का नेटवर्क

1 लाख  (अनुमानित)
छात्रों की संख्या

1.5-2 लाख (सालाना)
औसतन शुल्क प्रति छात्र

कंपनी का राजस्व

618 करोड़ रुपए
(2019—20)

484.1 करोड़ रुपए
(2022—23)

सहयोगी कंपनियां

मेगाकॉस्म कॉग्निशन प्राइवेट लिमिटेड, फिटजी फ्रैंचाइजी नेटवर्क लिमिटेड, फिटजी ईस्कूल प्राइवेट लिमिटेड, फिटजी फ्रैंचाइजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कार्तिकेय इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड फिनसेक प्राइवेट लिमिटेड, फिटजी इंडिया डब्ल्यूएलएल, फिटजी यूएसए होल्डिंग्स लिमिटेड

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