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ट्रेडिंग ऐप्स ने कैसे घर-घर पहुंचाया शेयर मार्केट?

सरल प्रक्रियाओं से लेकर बिना झंझट-झमेले के निवेश करने की सुविधा के जरिए ट्रेडिंग ऐप देश के वित्तीय बाजारों का नजारा बदल रहे, और लाखों लोगों के लिए निवेश की संस्कृति बना रहे सुलभ

मोबाइल ट्रेडिंग आसान
मोबाइल ट्रेडिंग आसान
अपडेटेड 12 फ़रवरी , 2025

थीं कितनी दुश्वारियां

एक दौर वह था, जब हर छोटे निवेशक को कई तरह के झमेलों से गुजरना पड़ता था और माथापच्ची करनी पड़ती थी. उसे पिंक मार्केट के शेयरों की खोजबीन, शेयरों के उतार-चढ़ाव, बिजनेस चैनलों पर नजर रखना और शेयर ब्रोकरों के आगे-पीछे भागना पड़ता था. इस प्रक्रिया में कई कमियां थीं. निवेशक बिचौलियों पर बहुत ज्यादा निर्भर थे. अक्सर ऑर्डर पूरा होने में देरी होती थी और सलाहें भी संदिग्ध होती थीं.

डीमैट और ट्रेडिंग खाते खोलना जटिल काम था, जिसमें भारी कागजी कार्रवाई, पहचान सत्यापन जैसी कई झंझटें होती थी. फरवरी 2000 में ऑनलाइन ट्रेडिंग के आगमन से उम्मीद की एक किरण दिखाई दी. लेकिन यह एलीट वर्ग के दायरे में ही बनी रही, जो डेस्कटॉप और अबाध इंटरनेट कनेक्शन के सहारे थी. लगातार यात्रा करने वाले या कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए बाधाएं बरकरार रहीं जिससे वे बाजार गतिविधियों से दूर ही रहे और उन पर अतिरिक्त लागत खर्च का बोझ भी बना रहा.

यूं आसान हुआ जीवन

आज यह सब आपकी हथेली पर है. मोबाइल ऐप ने निवेश क्षेत्र में क्रांति ला दी है. ये ऐप निवेशकों को एकीकृत यूपीआइ भुगतान, वास्तविक समय में पोर्टफोलियो जानने, एल्गोरिद्म ट्रेडिंग और जानकारी जैसी सुविधाएं मुहैया करते हैं. अब निवेशक ब्रोकर या कागजी कार्रवाई पर निर्भर नहीं हैं, वे बस कुछ ही टैप के जरिए अपने पैसे के निवेश का प्रबंधन कर सकते हैं.

यह बदलाव 2010 में शुरू हुआ. बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दोनों ने मोबाइल ऐप पर वास्तविक समय के आंकड़े (रीयल-टाइम डेटा फीड) और कारोबार करने के साधन मुहैया कराने के लिए स्थानीय मोबाइल फोन ऑपरेटरों और सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ करार किया. यह वह दौर था जब शेयर बाजार 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी से उबर रहे थे. देश की घरेलू बचत दर 24 फीसद के आसपास चल रही थी. ऐसे में इस रकम को सावधि जमा, सोना और अचल संपत्ति वगैरह से निकालकर शेयर बाजारों में लाने की जरूरत महसूस की गई.

असली मोड़ 2015 में आया. उस समय भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने संस्थागत निवेशकों से इतर निवेशक आधार का विस्तार करने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर दिया. खुदरा या छोटे निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी ने दो फैक्टर ऑथेंटिकेशन और मजबूत केवाइसी मानदंड के जरिए तेज किया. फिर किफायती डेटा दरों से ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल की पैठ ने भी बड़ी भूमिका निभाई. 

आईसीआइसीआई डायरेक्ट और कोटक सिक्योरिटीज जैसे पारंपरिक ब्रोकरों के साथ-साथ जीरोधा, अपस्टॉक्स और 5पैसा जैसे डिस्काउंट ब्रोकरों के उभरने से सहज मोबाइल ऐप आए. इन प्लेटफॉर्म से निवेशकों के लिए शेयरों, डेरिवेटिव, म्यूचुअल फंडों और यहां तक कि आईपीओ में आवेदन करना आसान हुआ. कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान मोबाइल ट्रेडिंग को अपनाने में उछाल आ गया. 2024 के मध्य तक एनएसई में 10 करोड़ से ज्यादा यूनीक इन्वेस्टर थे जो वित्त वर्ष 19 के मुकाबले 240 फीसद की बढ़ोतरी है.

मोबाइल ऐप के जरिए किया गया खुदरा निवेश अब कारोबार की कुल मात्रा (ट्रेडिंग वॉल्यूम) का 25 फीसद है, जो को-लोकेशन ट्रेडरों (जिनके सर्वर एक्सचेंज परिसर के भीतर होते हैं) के बाद दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट है. कुल मिलाकर जो खुदरा या छोटा निवेशक वित्त वर्ष 16 में कुल कारोबार का 33 फीसद हिस्सा होते थे, अनुमान है कि वे वित्त वर्ष 25 के अंत तक 38 फीसद को पार कर सकते हैं. इस बदलाव से व्यस्ततम महानगरों से लेकर छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश गतिविधियां धड़ल्ले से चलने लगी हैं. और देश के वित्तीय परिदृश्य को नया रूप मिल रहा है. नई क्रांति आकार ले रही है.

इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी

"मोबाइल ट्रेडिंग आसान, फटाफट और ज्यादा रियल टाइम वाली है"

विमल चतुर्वेदी जैसे कई युवा खुदरा निवेशकों के लिए कोविड के कारण हुआ लॉकडाउन एक अहम बदलावकारी मोड़ साबित हुआ. उन्होंने 2017 में जीरोधा ऐप डाउनलोड किया था. फिर भी 2020 में जाकर उन्होंने वास्तव में शेयर ट्रेडिंग ऐप और निवेश के अवसरों को बारीकी से खंगालना शुरू किया. तब तक वे म्यूचुअल फंड जैसे लंबी अवधि वाले पैसिव विकल्पों और कभी-कभार डेस्कटॉप के जरिए खरीदारी पर निर्भर थे. वे कहते हैं, "मोबाइल ट्रेडिंग आसान, फटाफट और ज्यादा रियल टाइम वाली है."

ऐप्स ने भी डेटा सुरक्षा को मजबूत किया और अपने कारोबारी मॉडल में दूसरे बदलाव किए, जिससे खुदरा निवेशकों को प्रोत्साहन मिल सके क्योंकि ये ऐप शून्य-ब्रोकरेज हाउस हैं, यानी जब आप बेचते हैं, तभी आपको कमिशन देना होता है. 'इससे निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ता है.'

विमल का पोर्टफोलियो अब 15 लाख रुपए का है. वे तीन ऐप के जरिए खरीद-फरोख्त करते हैं, जिससे उन्हें निवेश में विविधता लाने का अवसर मिलता है. ये ऐप निवेश को आसान बनाते हैं, ट्रेडिंग सीखने और जानकारी रखने में भी मदद करते हैं. वे कहते हैं, "कोई भी छोटे-से कॉफी ब्रेक में खरीद-फरोख्त कर सकता है."

2024 के मध्य तक एनएसई में 10 करोड़ से ज्यादा यूनीक इन्वेस्टर थे जो वित्त वर्ष 19 के मुकाबले 240 फीसद की बढ़ोतरी है. इसमें मोबाइल ऐप का दूसरा सबसे बड़ा योगदान है.

विमल चतुर्वेदी, 42 वर्ष
ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश

ट्रेडिंग ऐप
शुरुआत 2010 में
उपलब्धि - अनुमान है कि वित्त वर्ष 16 में कुल शेयर कारोबार में 33 फीसद हिस्सेदारी रखने वाले खुदरा या छोटे निवेशक वित्त वर्ष 25 में 38 फीसद को पार कर सकते हैं

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