
थीं कितनी दुश्वारियां
अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता जब दिल्ली से वाराणसी जैसी 'सुपरफास्ट' ट्रेन यात्रा का मतलब 10-12 घंटे सफर में बिताना था—जिसमें कई बार भोजन, नींद के झोंके और शौचालय के कई चक्कर शामिल थे. लंबी दूरी पर औसतन 70-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनों को काफी तेज माना जाता था. सहूलतों पर बहुत ध्यान नहीं दिया जाता था—यात्रियों को अधिकांश मार्गों पर तंग सीटें, झटके और पुरानी किस्म की सुविधाएं बर्दाश्त करनी पड़ती थीं.
1988 में शुरू की गई शताब्दी एक्सप्रेस ने 110-150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ आराम की शुरुआत की थी, लेकिन यह अभी भी वैश्विक मानकों से बहुत पीछे थी. स्वचालित दरवाजे और मॉड्यूलर शौचालय तो उसमें भी नहीं थे. और आलीशान इंटीरियर तो बस ब्रोशर में नजर आते थे. बार-बार रुकने और अप्रत्याशित समय-सारिणी ने लंबी दूरी की यात्रा को थकाऊ बना दिया था. ऐसे में यात्रियों को ग्रामीण इलाकों के नजारों या सह-यात्रियों के साथ बतियाते हुए समय काटना पड़ता था.
यूं आसान हुआ जीवन
तभी वंदे भारत एक्सप्रेस आई, जिसने भारत में ट्रेन यात्रा में क्रांति ला दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब से पांच साल पहले 15 फरवरी, 2019 को दिल्ली से वाराणसी के लिए इसकी पहली सेवा को हरी झंडी दिखाई थी. 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत चेन्नै में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में डिजाइन और निर्मित यह स्व-चालित ट्रेन 180 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार तक पहुंच सकती है, हालांकि इसे 160 किमी प्रति घंटे की स्वीकृति मिली. वंदे भारत एक्सप्रेस ने आठ घंटे में 760 किलोमीटर की अपनी पहली यात्रा पूरी कर रफ्तार, आराम और सुविधा के नए मानक स्थापित किए.
रफ्तार से परे, वंदे भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप, मॉड्युलर शौचालयों और स्वचालित दरवाजों और बैठने की आलीशान, आरामदायक जगह के साथ यात्री-केंद्रित डिजाइन पेश करती है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अक्सर इस ट्रेन की कामयाबी को प्रदर्शित करने वाले वीडियो क्लिप साझा करते हैं. एक वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि ट्रेन की रफ्तार अधिकतम होने के बावजूद पानी से भरा गिलास छलक नहीं रहा. भारतीय रेल दिसंबर 2024 तक देश भर में 136 वंदे भारत ट्रेनें चला रहा था, जो प्रमुख शहरों को जोड़ती हैं और यात्रा समय को 25-45 फीसदी तक कम करती हैं.
पांच साल से भी कम समय में लाखों यात्रियों ने इसका लाभ उठाया है. सभी मार्गों पर इसकी ऑक्युपेंसी दर 100 फीसद से ज्यादा है. इससे पता चलता है कि यात्री ट्रेन की ओर से दी जाने वाली बढ़ी हुई सुविधा और समय की पाबंदी के लिए 50 फीसद तक ज्यादा किराया देने को तैयार हैं. इससे भी ज्यादा गौरतलब बात यह है कि आंतरिक आकलन के मुताबिक वंदे भारत यात्रियों को एयरलाइनों से दूर कर रही है. इसकी वजह से कुछ मार्गों पर हवाई यातायात में 20 फीसद की कमी आई है.
भारतीय रेल अब रात भर की यात्राओं के अनुभव को बदलने के लिए वंदे भारत का स्लीपर संस्करण शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसे लंबी दूरी के मार्गों पर यात्रा का समय 16 घंटे से घटकर 12 घंटे रह जाएगा. इसकी वजह से आराम से समझौता किए बिना तेज विकल्प मिलेगा. वंदे भारत केवल मैदानी इलाकों तक ही सीमित नहीं. जल्द ही विशेष रूप से तैयार किए गए आठ कोच वाला संस्करण कश्मीर घाटी में अपना रास्ता बनाएगा. इसे चरम मौसम की स्थिति और भारी बर्फबारी को सहने के लिए बनाया गया है. जैसा कि वंदे भारत परियोजना का नेतृत्व करने वाले आइसीएफ के पूर्व महाप्रबंधक सुधांशु मणि कहते हैं, "वंदे भारत परियोजना ने भारत को भविष्य में बड़ा सपना देखने और बुलेट ट्रेन को डिजाइन कर उसका निर्माण करने में सक्षम बनाया है." इन सबके मद्देनजर यह शताब्दी एक्सप्रेस की एक योग्य उत्तराधिकारी और बुलेट ट्रेनों की आदर्श अग्रदूत है.
इससे मेरी जिंदगी कैसे बदली
"मैं इसे फ्लाइट से ज्यादा पसंद करती हूं"

एअर इंडिया की एग्जीक्यूटिव मानसी मल्होत्रा ने दुनिया भर की यात्रा की है. फिर भी उन्हें पिछले तीन साल से घर के करीब यात्रा करने में भी उतना ही आनंद आ रहा है. दिल्ली की रहने वालीं मानसी अक्सर परिवार के साथ देहरादून जाती हैं, जहां उनका दूसरा घर है, और जम्मू के कटड़ा में वैष्णो देवी मंदिर भी जाती हैं. राष्ट्रीय राजधानी से दोनों जगहों पर अब वंदे भारत ट्रेन चलती हैं.
मानसी कहती हैं, "पहले हम कटड़ा जाने के लिए श्री शक्ति एक्सप्रेस पकड़ते थे. इसमें रातभर पूरे 11 घंटे लगते थे. वंदे भारत तड़के रवाना होती है और हम दोपहर तक कटड़ा पहुंच जाते हैं. इससे पूरी एक रात बच जाती है."
मानसी आलीशान इंटीरियर, आरामदायक घूमने वाली सीटें और बेदाग शौचालय की भी तारीफ करती हैं. उनकी राय में वंदे भारत विदेश में सबसे अच्छी सुपरफास्ट ट्रेनों के बराबर है. वे कहती हैं, "वास्तव में मैं इसे फ्लाइट के मुकाबले ज्यादा पसंद करती हूं, और वे जो चाय देते हैं... बेहतरीन होती है."
आंतरिक आकलनों से संकेत मिलता है कि वंदे भारत विभिन्न विमान सेवाओं के यात्रियों को रिझा रही है. इसकी वजह से कुछ मार्गों पर हवाई यात्रियों की संख्या में 20 फीसद तक कमी आ गई है.
वंदे भारत एक्सप्रेस
शुरुआत 15 फरवरी, 2019 को
उपलब्धि भारतीय रेल दिसंबर 2024 तक 136 वंदे भारत ट्रेनों का संचालन कर कई शहरों को जोड़ रही थी. दूसरी ट्रेनों के मुकाबले इससे सफर की वजह से 25-45 फीसद तक कम वक्त लगता है.
- अभिषेक जी. दस्तीदार