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एलपीजी से कितनी अलग है पाइप वाली गैस; यह कैसे लोगों का जीवन आसान कर रही?

भारत का पीएनजी पीढ़ी में प्रवेश, एलपीजी सिलेंडर और अन्य प्रदूषणकारी घरेलू ईंधन के ज्यादा कारगर विकल्प मुहैया कराकर ऊर्जा वितरण को नया रूप दे रहा

पपिंदर कौर, गृहिणी, कालकाजी एक्सटेंशन, दिल्ली
पपिंदर कौर, गृहिणी, कालकाजी एक्सटेंशन, दिल्ली
अपडेटेड 13 फ़रवरी , 2025

तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडरों का हिसाब-किताब और फिर जुगाड़ भारतीय शहरी परिवारों के लिए रोजमर्रा का संघर्ष हुआ करता था. बुकिंग से लेकर हैंडलिंग, भंडारण और समय पर भरे हुए सिलेंडर को लगाने तक पूरी प्रक्रिया अक्षमताओं से भरी हुई थी.

एलपीजी के शुद्ध आयातक होने की वजह से भारत की एक विस्तृत वितरक नेटवर्क पर निर्भरता अक्सर सप्लाई चेन में अंतराल को उजागर करती है. देरी, जमाखोरी, भ्रष्टाचार और राशनिंग—आमतौर पर हर 45 दिन में एक सिलेंडर तक सीमित—की सीमा न थी, जिसकी वजह से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सेवा कम हो गई.

इन अक्षमताओं ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को कठिन इलाकों में विस्तार करने से हतोत्साहित किया. नतीजतन, काफी लोगों को खाना पकाने के लिए केरोसिन, कोयला, लकड़ी और भूसा जैसे प्रदूषणकारी विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ा. घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग-अलग रंग के निशान वाले सिलेंडरों के साथ जटिल सब्सिडी संरचना ने चुनौतियों को और बढ़ा दिया, प्रणालीगत भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया और सरकारी खजाने को खाली कर दिया.

यूं आसान हुआ जीवन

पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की शुरुआत ने भारत में ऊर्जा वितरण का चेहरा बदल दिया, जिससे एलपीजी से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हुआ. सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क एक व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से घरों, व्यवसायों और उद्योगों को सीधे गैस पहुंचा रहा है, जिससे भंडारण, हैंडलिंग और समय-समय पर बुकिंग की जरूरत खत्म हो गई है.

1958 में गुजरात के कैम्बे बेसिन में प्राकृतिक गैस की खोज के कई साल बाद 1972 में वडोदरा में एक घरेलू उपभोक्ता को पहला पीएनजी कनेक्शन मिला. लेकिन 1995 में मुंबई में महानगर गैस लिमिटेड की स्थापना के साथ निर्णायक मोड़ आया, जो गेल और ब्रिटिश गैस के बीच एक संयुक्त उद्यम था. तीन साल बाद गेल ने राष्ट्रीय राजधानी में पीएनजी वितरण के लिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) बनाने के लिए बीपीसीएल और दिल्ली सरकार के साथ हाथ मिलाया.

2004-05 में पेट्रोनेट एलएनजी ने गुजरात में दाहेज में पहला गैस आयात टर्मिनल स्थापित किया, उसके बाद हजीरा में शेल ने अपनी फैसिलिटी बनाई. पिछले कुछ दशकों में भारत के प्राकृतिक गैस के बुनियादी ढांचे में काफी विस्तार हुआ है. सितंबर 2024 तक देशभर में फैली 24,945 किलोमीटर लंबी पाइपलाइनें चालू हो चुकी थीं, और 10,805 किलोमीटर अतिरिक्त निर्माणाधीन थीं, जो देश भर में गैस स्रोतों को उपभोग केंद्रों से जोड़ती हैं.

पीएनजी नेटवर्क 23 राज्यों में 1.42 करोड़ कनेक्शन तक बढ़ गया है, जिसमें टियर-1 और -2 शहरों के साथ-साथ उनके उपनगरों पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसकी तुलना 32.83 करोड़ एलपीजी कनेक्शनों से की जा सकती है, जिनमें से आधे से ज्यादा पिछले दशक में ग्रामीण और दूर-दराज की बस्तियों में प्रदूषणकारी ईंधन पर निर्भरता कम करने के समानांतर प्रयास के कारण जोड़े गए थे.

अब सरकार ने पीएनजी को देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़ाने और 2032 तक 12.63 करोड़ कनेक्शन लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 733 जिलों को कवर करते हुए 307 भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा गया है. इससे संभावित 100 फीसद घरों में पीएनजी कनेक्शन लगाया जा सकता है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के सदस्य ए. रमण कुमार कहते हैं, ''पीएनजी के कई फायदे हैं. यह पर्यावरण के अनुकूल है, सुरक्षित है और (सिलेंडरों की) व्यापक सड़क परिवहन की जरूरत को दूर करती है, इस तरह वाहन प्रदूषण को कम करती है.''

प्राकृतिक गैस एलपीजी के मुकाबले कम जहरीली है और हवा से हल्की होने की वजह से सुरक्षित होती है. सबसे बड़ी बात यह कि आपको उतना ही भुगतान करना होता है, जितना आप इसका इस्तेमाल करते हैं. इससे घरेलू बचत की चिंताएं कम होती हैं.

इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी

करीब चार साल पहले 2021 में पीएनजी को अपनाने वालीं पपिंदर कौर कहती हैं, ''मैं सिलेंडर की परेशानी को पूरी तरह से भूल गई हूं, अब जीवन पहले से बहुत आसान है.'' सिलेंडर का ट्रैक रखना, बुक करना और स्पेयर को स्टोर करने के लिए लगातार जद्दोजहद करनी होती थी.

वे याद करती हैं, ''हमें हर 15-20 दिन में एक सिलेंडर की जरूरत होती थी.'' दिल्ली में घरों को सालाना 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते हैं, जिसके बाद के सिलेंडर के लिए पूरा पैसा चुकाना होता है. इसके अलावा, मध्यम वर्ग के घरों में अक्सर अतिरिक्त सिलेंडर रखने की जगह नहीं होती. वे कहती हैं, ''अब हम जो उपभोग करते हैं उसके लिए भुगतान करते हैं. पाइप्ड गैस से तनाव दूर हो गया है.''

अब तक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने दिल्ली एनसीआर में 29 लाख घरों को पाइप के जरिए गैस उपलब्ध कराई है. पिछले साल इसने गांवों को जोड़ने के लिए विस्तार किया, जिसका उद्देश्य अधिक परिवारों को स्वच्छ ईंधन अपनाने के लिए प्रेरित करना था. अलबत्ता चुनौती बनी हुई है: बुनियादी ढांचे का तेजी से निर्माण करना और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना. उम्मीद है कि पपिंदर की तरह और भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिलेगी.

पाइप वाली गैस का डिस्ट्रीब्यूशन

शुरुआत 1995 में

उपलब्धि

अब 23 राज्यों में 1.42 करोड़ घरों में पाइप्ड गैस कनेक्शन हैं. चालू पाइपलाइनों की लंबाई पिछले एक दशक में 62 फीसद बढ़कर 24,945 किलोमीटर तक पहुंच गई है और 10,805 किलोमीटर का निर्माण किया जा रहा है.

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