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सरकार ने विदेश जाना कैसे किया आसान?

पासपोर्ट सेवा केंद्रों ने एक सुव्यवस्थित डिजिटल प्रणाली की शुरुआत की है, जिसने विदेश जाने के लिए जरूरी यह दस्तावेज हासिल करना आसान बना दिया

दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में पासपोर्ट सेवा केंद्र पर अपने बायोमेट्रिक्स दर्ज कराते आवेदक
दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में पासपोर्ट सेवा केंद्र पर अपने बायोमेट्रिक्स दर्ज कराते आवेदक
अपडेटेड 12 फ़रवरी , 2025

थीं कितनी दुश्वारियां

नब्बे के दशक में उदारीकरण के बाद के आर्थिक उफान ने देश के सभी कोनों से पासपोर्ट की मांग को बढ़ा दिया. यह मांग देश में बढ़ते मध्यम वर्ग के लोगों से प्रेरित थी, जो शिक्षा, पर्यटन, व्यवसाय आदि के लिए विदेश यात्रा करने के इच्छुक थे. लेकिन तब विदेश मंत्रालय अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और पुरानी प्रणालियों से जूझ रहा था, जिससे आवेदनों की प्रोसेसिंग में हफ्तों और यहां तक ​​कि महीनों लग जाते थे. इसमें एक बड़ी अड़चन पुलिस सत्यापन प्रक्रिया थी, जो अकुशलता और भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात थी. खुले आम रिश्वत मांगी जाती थी और इनकार करने पर अक्सर जान-बूझकर देरी या बेजा बाधाएं डाली जाती थीं. समस्या को और जटिल बनाने वाले पासपोर्ट कार्यालयों की सीमित संख्या और लंबी कतारें थीं, जिससे बिचौलियों की मदद लेनी पड़ती थी. ऑटोमेशन या स्वचालन और विकेंद्रीकरण की कोशिशों के बावजूद मैन्युअल प्रक्रियाएं जारी रहीं. इसका नतीजा गड़बड़ियों और बेजा देरी के रूप में निकला. इससे प्रणालीगत सुधारों की फौरी जरूरत समझ आई.

यूं आसान हुआ जीवन

तत्कालीन विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने जून 2010 में पासपोर्ट सेवा परियोजना (पीएसपी) की शुरुआत की. इसने देश में पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को बदल दिया है. इस परियोजना ने आवेदनों के लिए एक सुव्यवस्थित और डिजिटल प्रणाली शुरू की. इसके तहत शुरू में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के सहयोग से 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) स्थापित करने की योजना थी. विदेश मंत्रालय ने 2017 में व्यापक कवरेज के लिए विभिन्न राज्यों में प्रधान डाकघरों (एचपीओ) में पासपोर्ट से जुड़ी सेवाएं देने के लिए डाक विभाग के साथ हाथ मिलाया. आज मंत्रालय के व्यापक बुनियादी ढांचे में 37 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों (आरपीओ) के अधिकार क्षेत्र में 535 पासपोर्ट आवेदन प्रोसेसिंग केंद्र हैं, जिनमें 93 पासपोर्ट सेवा केंद्र और 442 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र शामिल हैं.

एमपासपोर्ट सेवा मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन और रियल टाइम में अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग ने पूरी प्रक्रिया को आवेदकों के लिए बहुत सहज बना दिया है. लोग अब बहुभाषी राष्ट्रीय कॉल सेंटर के माध्यम से 24/7 सहायता और झटपट पासपोर्ट के मामलों में तेजी से प्रोसेसिंग के लिए तत्काल सुविधा जैसी सहज सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं. एमपासपोर्ट पुलिस ऐप के जरिए पुलिस प्रणालियों के साथ एकीकरण की वजह से आवेदक के बैकग्राउंड के सत्यापन में तेजी आई है और डिजिलॉकर ने कागज रहित दस्तावेजीकरण को सहज बना दिया है.

पीएसके आवेदकों को आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षित, एंड-टू-एंड सेवाएं मुहैया कराते हैं. उनकी तस्वीरें और बायोमेट्रिक्स साइट पर ही कैप्चर किए जाते हैं, आवेदन और दस्तावेजों को डिजिटाइज किया जाता है और सहज प्रोसेसिंग के लिए स्टोर किया जाता है. कतार प्रबंधन की इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली (इलेक्ट्रॉनिक क्यू मैनेजमेंट सिस्टम) पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर कुशलता के साथ आवेदन प्रोसेसिंग पक्का करती है. आवेदक एयरकंडिशंड लाउंज में इंतजार करते हैं. अपॉइंटमेंट क्षमता में इजाफा और वीकेंड ड्राइव जैसी पहल से अलग-अलग समय पर बढ़ने वाली भीड़ कम हुई है.

दिसंबर 2023 में विदेश मंत्रालय की ओर से लोकसभा में बताया गया कि इन सभी पहलकदमियों ने प्रोसेसिंग टाइम को काफी कम करने में मदद की है—'सामान्य' पासपोर्ट के लिए 7-10 दिन और तत्काल योजना के तहत जारी किए गए पासपोर्ट के लिए 1-3 दिन. इसमें पुलिस सत्यापन में लगने वाला समय शामिल नहीं है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, जहां भी एमपासपोर्ट पुलिस ऐप का उपयोग किया जाता है, वहां सत्यापन पांच दिनों के भीतर पूरा हो जाता है, हालांकि अखिल भारतीय औसत 14 दिन है. पिछले साल 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस पर अपने संदेश में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत में पासपोर्ट से संबंधित सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति के बारे में बताया—2023 में 1.65 करोड़ ऐसी सेवाएं डिलिवर कराई गईं, जिसमें वार्षिक वृद्धि दर 15 फीसद है.

सरकार 2024-25 के लिए आवंटित यही कोई 924.13 करोड़ रुपए के बजट के साथ इस प्रणाली का विस्तार जारी रखे हुए है. पीएसपी के तहत इसकी शुरुआत से अब तक 10 करोड़ से ज्यादा पासपोर्ट जारी किए गए हैं, जो नागरिक-केंद्रित सेवाओं को पारदर्शिता के साथ मुहैया कराने की ई-गवर्नेंस की क्षमता का उदाहरण है.

इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी

"मेरे पासपोर्ट का रिन्यूअल चुटकियों में हो गया"

ललित पंत, आइटी प्रोफेशनल, दिल्ली

एक बहुराष्ट्रीय आइटी फर्म में काम करने वाले ललित को हाल ही एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए अपना पासपोर्ट रिन्यू कराना था. वे पिछली परेशानियों और अपने व्यस्त कार्य शेड्यूल को देखते हुए चिंतित थे लेकिन उन्होंने पासपोर्ट सेवा पोर्टल आजमाने का फैसला किया. राहत की बात यह रही कि प्रक्रिया सहज थी—उन्होंने ऑनलाइन आवेदन पूरा किया, दस्तावेज अपलोड किए, फीस का भुगतान किया और अपॉइंटमेंट का समय आसानी से ले लिया.

हालांकि उन्हें दो हफ्ते बाद की तारीख मिल गई, लेकिन ललित जब आखिरकार पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) पहुंचे तो उनकी तबियत खुश हो गई. वे बताते हैं, "कर्मचारी बहुत विनम्र और पेशेवर थे. पूरी प्रक्रिया में सिर्फ 40 मिनट लगे.'' उन्हें सबसे ज्यादा हैरानी तो उस वक्त हुई जब उनका नया पासपोर्ट चार कार्य दिवसों के भीतर आ गया. ललित कहते हैं, ''यह बहुत आसान था. मुझे बेहद खुशी है कि मुझे आम तौर पर लगने वाले चक्करों और कागजी कार्रवाई से निजात मिल गई."

ललित पंत, 44 वर्ष
आइटी प्रोफेशनल, दिल्ली

पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम 
शुरुआत:
2010 में
उपलब्धि अब तक 10 करोड़ से ज्यादा पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं, प्रोसेसिंग का समय 7-10 दिन रह गया

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