थीं कई दुश्वारियां
बहुत अरसे तक औसत भारतीय परिवारों के लोग टीवी रिमोट कंट्रोल को अपने हाथ रखने के लंबे झगड़े में उलझे रहे. यह लड़ाई बेहद अहम थी क्योंकि देश की केवल 10 फीसद आबादी को सिनेमा में दिलचस्पी थी और वे हॉल में जाने में सक्षम थे. पिता समाचार और खेल देखते; माएं अपने भावुक सीरियल देखतीं और बच्चों के देखने के घंटे सीमित थे वह भी कड़ी निगरानी के साथ. देश के लोग 2010 के दशक तक नीरस टीवी शो से थक चुके थे और नए कार्यक्रमों की चाह रखने वाले मनोरंजन के लिए यूट्यूब की ओर रुख करने लगे थे. लेकिन पिचर्स और परमानेंट रूममेट्स जैसी कुछ द वायरल फीवर (टीवीएफ) वेब सीरीज को छोड़कर देसी शो के विकल्प केवल वही देखने तक सीमित थे जो पहले से ही टेलीविजन पर देखे और दिखाए जा रहे थे.
यूं आसान हुआ जीवन
यह नौबत आखिरकार स्ट्रीमिंग यानी ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफॉर्म के आने के साथ खत्म हो गई. इसमें परिवार के सदस्य को अपने डिजिटल डिवाइस—फोन, टैबलेट, कंप्यूटर और स्मार्ट टीवी—पर अपनी पसंद चुनने का अधिकार है. यह ऐसा बाजार है जिसमें 2013 में सोनी ने अपनी स्ट्रीमिंग शाखा सोनीलिव लॉन्च की, और उसके तुरंत बाद स्टार ने हॉटस्टार लॉन्च किया. उसके बाद तो मनोरंजन केवल एक सामुदायिक अनुभव नहीं रह गया क्योंकि यूजर अपनी पसंद के समय पर अपनी पसंदीदा कंटेंट देख सकते थे.
लेकिन 2016 में नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो के भारत में आने के बाद ही लोगों का ध्यान आकर्षित करने की होड़ लगी और फिर प्रोग्रामिंग में वास्तव में क्रांति आ गई. सैक्रेड गेम्स जैसे भारतीय वेब-ओनली ओरिजिनल के लॉन्च ने लंबे-फॉर्मेट की कहानी कहने के चलन को बढ़ावा दिया; 'बिंज-वॉच' और 'स्किप इंट्रो' जैसे शब्द बोलचाल में शामिल हो गए, पासवर्ड शेयर करना आम बात हो गई और निर्माता, निर्देशक और लेखक बॉक्स ऑफिस के फरमानों से आजाद होकर आगे बढ़ने लगे. इन दो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने दर्शकों को अंग्रेजी से परे कई तरह के शो और फिल्में दिखाईं.
इसी तरह भारतीयों को नेटफ्लिक्स के स्पेनिश शो मनी हाइस्ट से उतना ही लगाव था, जितना कि कोरियन ड्रामा स्क्विड गेम से. इसका असर इतना था कि टीवी की प्रोग्रामिंग क्वीन एकता कपूर 2017 में इस क्षेत्र में शामिल हो गईं. उन्होंने ऑल्टबालाजी नाम से अपना खुद का प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, ताकि वे ऐसे शो बना सकें, जिनके बारे में उन्हें पता था कि वे परिवार के साथ टीवी पर देखे जाने के उपयुक्त नहीं होंगे.
कोविड-19 महामारी ने लोगों को जैसे ही उनके घरों में कैद कर दिया, वैसे ही स्ट्रीमिंग के लिए साइन अप करने के फायदे और ज्यादा साफ हो गए. भारतीय दर्शक अब न केवल दुनिया भर में चल रहे मनोरंजन से अच्छी तरह वाकिफ थे, बल्कि वे अब अन्य भाषाओं में भारतीय सामग्री के बारे में भी उत्सुक थे. कई भारतीय भाषाओं में उपशीर्षक और डब की गई सामग्री तक आसान पहुंच का मतलब था कि भाषाई सीमाएं मिट गईं. अनर्स्ट ऐंड यंग की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्रीय ओटीटी सामग्री 2023 तक हिंदी भाषा से आगे निकल गई थी—निर्मित 3,000 घंटे की मूल सामग्री में से 52 फीसद क्षेत्रीय भाषाओं में थी.
टीवीएफ के प्रेसिडेंट विजय कोशी कहते हैं, "ओटीटी ने दर्शकों और रचनाकारों दोनों के लिए पहुंच को लोकतांत्रिक बनाकर मनोरंजन उद्योग में क्रांति ला दी है. अब यह कठोर शेड्यूल की बात नहीं रह गई है—दर्शक अब अपनी सुविधानुसार टीवीएफ के एस्पिरेंट्स और कोटा फैक्ट्री जैसे आला दर्जे के कंटेंट का मजा ले सकते हैं." उनका कहना है कि ओटीटी ने भरोसेमंद कहानियों को दिखाने के 'स्वर्ण युग' की शुरुआत की है. कोशी मलयालम सिनेमा का हवाला देते हुए बताते हैं कि कैसे दर्शक ओटीटी की वजह से इस तरह के सिनेमा की खोज कर रहे हैं. कोशी के शब्दों में, "यह तालमेल मनोरंजन को नया रूप दे रहा है, सार्थक स्टोरीटेलिंग सभी के लिए सुलभ बना रहा है."
इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ ही ओटीटी बूम अभी बरकरार रहने वाला है. आज अंदाजन 10 करोड़ भारतीयों ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को अपनाया है. बहुतों ने तो कम से कम दो या उससे ज्यादा ओटीटी प्लेटफॉर्म की सदस्यता ले रखी है. ओटीटी के साहसी, जानकार, आसानी से संतुष्ट न होने वाले और अधिक के लिए भूखे दर्शक भारतीय मनोरंजन उद्योग को नई, सलीके वाली राह पर ले जा रहे हैं.
इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी
"ओटीटी ने देखने की मेरी आदत बदल दी"
श्रुति उनवाने को अपनी पसंद बखूबी मालूम है. उनका कहना है कि उन्हें केबल टीवी और सिनेमा के मुकाबले ओटीटी पसंद है. "मैं टीवी चैनल देखने के लिए हर महीने केबल सब्सक्रिप्शन पर 1,200 रुपए क्यों खर्च करूंगी जहां मुझे अपनी पसंद का कंटेंट देखने का विकल्प नहीं है? नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, ज़ी5, हॉटस्टार और जियो सिनेमा का सब्सक्रिप्शन लेना बेहतर है, जो मुझे अपनी पसंद की फिल्में अपनी मर्जी से देखने की आजादी देता है."
वे कहती हैं, "सिनेमाघरों में जाने लायक बहुत ज्यादा फिल्में नहीं हैं." कुछ हफ्ते बाद ओटीटी पर वही फिल्म आने का इंतजार करना पसंद करेंगी. वे कहती हैं, "मैं घर पर बैठकर अपनी लाइटें कम करूंगी, जो चाहूं ऑर्डर करूंगी या जो मन करे पकाऊंगी और अपने सोफे-कम-बेड पर आराम से अपने 43 इंच के टीवी पर देखूंगी."
महज घर पर देखने की सुविधा ही नहीं, यह भी एक बड़ा आकर्षण है कि वे अपने मोबाइल पर जहां से शो देखना छोड़ती हैं, वहीं से देखना जारी रख सकती हैं. फिर स्ट्रीमिंग के अनगिनत विकल्प हैं. वे कहती हैं, ''ओटीटी ने मेरी देखने की आदतों को पूरी तरह से बदल दिया है. मैं पहले कभी दक्षिण भारतीय फिल्में नहीं देखती थी और अब मुझे फिल्मों के हिंदी डब वर्जन देखना पसंद है.''
ओटीटी प्लेटफॉर्म
शुरुआत 2013 में सोनीलिव के साथ
उपलब्धि देश के 10 करोड़ लोगों की पहुंच हो चुकी है ओटीटी तक