थीं कितनी दुश्वारियां
जब 2017 के अंत तक देश में जियो की बदौलत मोबाइल डेटा की दुनिया में सबसे ज्यादा खपत होने लगी, तब भी अधिकांश गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित या नहीं थी. इससे वे ग्रामीण इलाके देश के तेज डिजिटल विकास से दूर रह गए. सार्वजनिक वाइ-फाइ हॉटस्पॉट लगभग न के बराबर थे. लोग अस्थिर और धीमे चलने वाले मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर थे.
उस समय औसत रफ्तार 8 एमबीपीएस थी. यह डिजिटल खाई सिर्फ इंटरनेट की आसान पहुंच के मामले में ही नहीं थी; उसके जमीनी आर्थिक और सामाजिक नतीजे भी दिख रहे थे. हाइ-स्पीड इंटरनेट की कमी ने बुनियादी सेवाओं के नए रूपों—ई-गवर्नेंस योजनाओं, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा—को दूरदराज के गांवों की पहुंच से बाहर रखा. लाखों आकांक्षी इंटरनेट कैफे का उपयोग करने के लिए पड़ोसी शहर तक जाए बिना सरकारी कार्यक्रमों के लिए आवेदन भी नहीं भर सकते थे.
यूं आसान हुआ जीवन
समय के साथ जैसे-जैसे इंटरनेट की मांग बढ़ी, वैसे-वैसे कनेक्टिविटी की समस्याओं को दूर करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने की जरूरत भी बढ़ी. इसी से भारतनेट की नींव रखी गई, जिसने देश की ग्रामीण-शहरी डिजिटल खाई को पाटने के लिए मौलिक बदलाव की उम्मीद जगाई. इस परियोजना का उद्देश्य 2,68,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में किफायती हाइ-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट मुहैया करना है, जिसके दायरे में 6,65,000 से ज्यादा गांव हैं.
इसकी शुरुआत 2011-12 में की गई थी, लेकिन असली जोर डिजिटल इंडिया पहल के तहत आया जब 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए. पहले चरण में बीएसएनएल, रेलटेल और पावर ग्रिड के मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का लाभ उठाया गया, जिससे दिसंबर 2017 तक 1,00,000 ग्राम पंचायतों को कवर किया गया. लगभग उसी वक्त सरकार ने चरण 2 के तहत कवरेज का अन्य 1,50,000 ग्राम पंचायतों तक विस्तार करने का लक्ष्य बनाया.
इसमें नए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना, रेडियो और सैटेलाइट तकनीकों का उपयोग करना और 7,00,000 से ज्यादा सार्वजनिक वाइ-फाइ हॉटस्पॉट बनाना शामिल है. ये राज्य सरकारों और निजी संस्थाओं के सहयोग से किए गए हैं. पहले दो चरणों में कुल निवेश 42,068 करोड़ रुपए है.
राज्य सरकारों और निजी संस्थाओं से जुड़ाव राजस्व साझाकरण मॉडल से होता है. ग्राम-स्तरीय उद्यमी (वीएलई) वाइ-फाइ हॉटस्पॉट को बगल में सेवा केंद्र चलाते हैं, सामुदायिक इंटरनेट पॉइंट बनाते हैं और रोजाना का संचालन आसान बनाए रखते हैं. स्थानीय लोगों को शामिल करके, परियोजना बेहतर जवाबदेही चाहती है और बुनियादी ढांचे के रखरखाव को बढ़ावा देती है.
दिसंबर 2024 तक भारतनेट ने काफी प्रगति हासिल कर ली. 2,14,283 से ज्यादा ग्राम पंचायतों को 6,90,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया और 1,04,574 से ज्यादा वाइ-फाइ हॉटस्पॉट स्थापित किए गए. अक्तूबर 2024 में औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड 95.67 एमबीपीएस थी. अब भारतनेट 100 एमबीपीएस की न्यूनतम रफ्तार मुहैया कराता है.
इंटरनेट की पहुंच के साथ ग्रामीण समुदाय अब डिजिटल कारोबार में भाग ले सकते हैं, वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं और उद्यमशीलता के अवसरों का पता लगा सकते हैं. छात्र और बीमार लोग अब शहरी केंद्रों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और चिकित्सा विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं. खामियों को दुरुस्त करने के लिए चरण 3 के तहत 1.39 लाख करोड़ रुपए की लागत से डिजाइन परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया गया है. इससे लोगों के उत्थान के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का लाभ उठाने की सरकार की प्रतिबद्धता पुष्ट होती है.
इंटरनेट मुहैया होने से अब ग्रामीण इलाकों के लोग डिजिटल कारोबार और वित्तीय सेवाओं में हिस्सेदारी कर सकते हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह ले सकते हैं.
विजय गामित, 54 वर्ष
प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल, तापी, गुजरात
इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी
"छात्र अब स्कूल को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं"
दक्षिण गुजरात के तापी जिले के आदिवासी इलाके में 2022 तक इंटरनेट दुर्लभ था. जिन लोगों के पास स्मार्टफोन था, वे मोबाइल कनेक्टिविटी अस्थिर और धीमी होने से परेशान थे. तब उच्छल तालुका के सकरदा गांव की ग्राम पंचायत को भारतनेट के तहत ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिली. इसका फायदा सकरदा प्राथमिक विद्यालय के 165 छात्र और कक्षा 1-8 तक के सात शिक्षकों को भी मिला. यह उन्हें छात्रों को पढ़ाने में सहूलियत तो देता ही है, छात्रों में पढ़ाई के प्रति ललक भी जगाता है.
स्कूल के प्रिंसिपल विजय गामित, जो कक्षा 3-5 तक के बच्चों की क्लास लेते हैं, कहते हैं, "अब सभी कक्षाओं में एक स्मार्ट बोर्ड है, जिस पर हम शिक्षकों को जटिल विषयों में विस्तृत अध्ययन सामग्री मिलती है. छात्र अब स्कूल को लेकर बहुत अधिक उत्साहित हैं क्योंकि हम उन्हें पाठ्यपुस्तक के अलावा लैपटॉप पर ऑनलाइन वीडियो दिखाते हैं." बच्चों को ऑनलाइन योग कक्षाओं में भाग लेने और सांस्कृतिक प्रदर्शनों के वीडियो देखने का भी मौका मिलता है. गामित कहते हैं, "उन्हें ऑडियो-विजुअल बहुत पसंद है." यह किसी क्रांति से कतई कम नहीं.
भारतनेट परियोजना
शुरुआत 2011-12 में
उपलब्धि दिसंबर 2024 तक 2,14,000 से ज्यादा ग्राम पंचायतों को 6,90,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है, 1,04,500 से ज्यादा वाइ-फाइ हॉटस्पॉट बनाए गए हैं. ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड सेवा अब महज 99 रुपए महीने से शुरू होती है
—जुमाना शाह और अभिषेक जी. दस्तीदार