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सरकार ने कैसे 'डिजियात्रा' के जरिए हवाईअड्डों से ख़त्म की कतारें?

लंबी-लंबी कतारों और दस्तावेजों की जांच के झंझट-झमेलों से छुटकारा पाकर हवाई यात्री अब डिजियात्रा ऐप के जरिए हवाई अड्डों पर आसान और सहूलत भरी जांच का मजा ले रहे

दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर डिजियात्रा गेट
दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर डिजियात्रा गेट
अपडेटेड 12 फ़रवरी , 2025

थीं कितनी दुश्वारियां 

वर्षों से देश में हवाई यात्रियों को हवाई अड्डों पर प्रवेश और आगे बढ़ने के लिए लंबी-लंबी कतारों, दस्तावेजों की जांच के झंझट-झमेलों से लगातार जद्दोजहद करनी पड़ती थी. तब कहीं जाकर वे जहाज तक पहुंच पाते थे. अक्सर पहली अड़चन चेक-इन प्रक्रिया की होती थी जिसमें बोर्डिंग पास और पहचान के सबूतों की बारीक जांच के लिए लंबी कतार घंटों खड़ा रहना पड़ता था. तिस पर घर पर पहचान पत्र भूल जाने जैसी जरा-सी चूक यात्रा की समूची योजना पर पानी फेर सकती थी.

नए या कम यात्रा करने वालों के लिए यह प्रक्रिया विशेष रूप से घबराहट पैदा करने वाली होती थी. हर चरण में प्रवेश द्वार से लेकर सामान रखने और सुरक्षा जांच तक यात्रियों को बार-बार दस्तावेज की जरूरत और मैन्युअल जांच का सामना करना पड़ता था. समय पर बने रहने की कोशिश करते हुए हर दस्तावेज को व्यवस्थित तरीके से रखना होता था. इस तरह के तनाव ने कई लोगों के लिए उड़ान को काफी झंझट वाला अनुभव बना दिया था. इस परेशानी को दूर करने की फौरन जरूरत थी.

यूं आसान हुआ जीवन 

पिछले एक दशक में डिजियात्रा ऐप सुकून भरे बदलाव के रूप में सामने आया है और उससे देश में हवाई यात्रा का रंग-ढंग ही बदल गया. दिसंबर 2022 में लॉन्च किए गए सरकारी सहयोग वाले इस मोबाइल ऐप की मदद से कागजी दस्तावेज और बार-बार की जांच खत्म हुई है और हवाई अड्डों की समूची प्रक्रिया आसान हुई है. यात्री बस अपने बोर्डिंग पास और बायोमेट्रिक्स को ऐप पर अपलोड करते हैं. पंजीकरण के दौरान इन बायोमेट्रिक्स को आधार या किसी अन्य सरकारी आइडी के जरिए लिंक किया जाता है. बाकी काम सिस्टम करता है.

हवाई अड्डे पर यात्री सीधे डिजियात्रा गेट पर जाते हैं, जहां चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक सेकंडों में उनकी पहचान सत्यापित करती है और उन्हें तुरंत प्रवेश मिल जाता है. इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइनों ने डिजियात्रा ऐप वालों के लिए विशेष चेक-इन काउंटर शुरू किए हैं. ऐप से प्रिंटेड पास, आइडी और बैगेज टैग को संभालने की जरूरत खत्म हो जाती है जिससे लंबी कतारें और ऐन वक्त की घबराहट अब बीते दिनों की बात हो गई है.

यूपीआई और डिजिलॉकर की तरह डिजियात्रा भारत की व्यापक डिजिटल सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है और उससे काफी सहूलत हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के बीच दिए भाषण में इसके लाभों का जिक्र किया, "बहुत-से भारतीय अब कागजात के लिए फिजिकल फोल्डर का इस्तेमाल नहीं करते. उनके पास डिजिलॉकर है. हवाई अड्डे पर जाते समय वे सुगम यात्रा के लिए डिजियात्रा ऐप का उपयोग करते हैं."

ऐप की सफलता इसी से जाहिर है कि लोग इसे तेजी से अपना रहे हैं. 92 लाख से ज्यादा यात्रियों, रोजाना के 25,000 डाउनलोड और आज तक 4.9 करोड़ यात्राओं की सुविधा देने वाला डिजियात्रा ऐप भारत भर में हवाई यात्रा को नया रूप दे रहा है. उसे शुरू में दिल्ली, बेंगलूरू और वाराणसी हवाई अड्डों पर लॉन्च किया गया. यह ऐप अब 24 हवाई अड्डों पर काम करता है.

हालांकि यह डिजिटल सफर अभी शुरू ही हुआ है. इस पहल की अगुआई करने वाली गैर-लाभकारी संस्था डिजिटल यात्रा फाउंडेशन के सीईओ सुरेश खड़कभावी कहते हैं, "फिलहाल डिजियात्रा ऐप की सहूलत अंग्रेजी में उपलब्ध है और मार्च तक सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में यह उपलब्ध होगा."

हालांकि बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षा को लेकर जब-तब चिंताएं उठती रही हैं लेकिन फाउंडेशन और सरकारी नीतियां दोनों ने ही लोगों को आश्वस्त किया है कि सभी डेटा स्थानीय रूप से रखे जाते हैं और उड़ान के 24 घंटे के भीतर अपने आप हटा दिए जाते हैं. भविष्य को देखते हुए फाउंडेशन विदेश में भी इसे आजमाने की सोच रहा है. खड़कभावी कहते हैं, "हम डिजियात्रा ऐप को सुगम अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए सक्षम बनाने की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं."

यात्रियों को सीधे डिजियात्रा गेट पर जाना होता है, जहां चेहरे की पहचान तकनीक सेकंडों में उनकी पहचान सत्यापित करती है और फौरन प्रवेश का रास्ता साफ हो जाता है.

इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी
"यह टेक्नोलॉजी का ऐसा इस्तेमाल है जिसे देख हम चौंक जाते हैं"

आशु गांधी ने अपने लंबे एयरलाइन करियर के दौरान कई देशों की यात्रा की है और अनेक हवाई अड्डों का तजुर्बा हासिल किया है. फिर भी उनका कहना है कि यह भारत ही है जिसने डिजियात्रा ऐप के माध्यम से हवाई अड्डों पर चेक-इन से निबटने का सबसे सहज तरीका खोजा. वे बताते हैं, "अभी कुछ दिन पहले ही मैं बेंगलूरू से दिल्ली का सफर कर रहा था. एयरपोर्ट जाते समय रास्ते में मुझे एहसास हुआ कि मैं अपना लैपटॉप बैग घर पर ही भूल आया हूं जिसमें मेरे सारे दस्तावेज—ड्राइविंग लाइसेंस, आधार, पैन—थे. मेरे पास सिर्फ मेरा मोबाइल फोन था. अगर ऐसा पहले हुआ होता तो मेरे लिए फ्लाइट पकड़ पाने का कोई सवाल ही न था." संयोग से गांधी ने पत्नी के कहने पर हाल ही में अपने दस्तावेज डिजिलॉकर पर अपलोड किए थे. वे बताते हैं, "इससे मैं बच गया."

जैसे ही उनकी टैक्सी एयरपोर्ट की ओर बढ़ी, उन्होंने फोन पर अपना पहचान पत्र निकाला, डिजियात्रा ऐप डाउनलोड किया, पंजीकरण कराया और अपना बोर्डिंग पास अपलोड किया. उनके शब्दों में, "एयरपोर्ट पर मुझे प्रवेश द्वार पर कुछ भी दिखाने की जरूरत नहीं पड़ी. डिजियात्रा ऐप के चलते गेट ने दूर से ही मेरा चेहरा स्कैन कर लिया और गेट खुल गए. मुझे फोन दिखाने की भी जरूरत नहीं पड़ी."

कुछ ही मिनटों में सुरक्षा जांच से गुजरकर वे बोर्डिंग गेट पर जा पहुंचे. वे कहते हैं, "यह तकनीक का अविश्वसनीय उपयोग है." प्रशंसा भरे शब्दों में वे कहते हैं कि ऐप ने यात्रा के अनुभव को सुखद बना दिया है. गांधी के लिए डिजियात्रा ने यात्रा के दु:स्वप्न को एक सहज और तनाव-मुन्न्त सफर में बदल दिया.

आशु गांधी, 59 वर्ष
अवकाशप्राप्त एयरलाइन मैनेजर, दिल्ली

डिजियात्रा ऐप शुरुआत 2022 में
उपलब्धि: देश भर में 24 हवाई अड्डों पर 92 लाख लोगों के लिए हवाई यात्रा आसान हुई

अभिषेक जी. दस्तीदार

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