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डीबीटी ने कैसे बिचौलियों की छुट्टी कर लाभार्थियों का जीवन किया आसान?

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से धोखाधड़ी कम हुई है और कल्याणकारी वितरण प्रणाली की दक्षता में सुधार आया. इसने लाभ सही समय पर जरूरतमंदों तक पहुंचने का पुख्ता इंतजाम किया

जयपुर जिले के जयसिंहपुरा गांव के किसान सम्मान निधि के लाभार्थी किसान रामलाल और उनकी पत्नी बाला देवी
जयपुर जिले के जयसिंहपुरा गांव के किसान सम्मान निधि के लाभार्थी किसान रामलाल और उनकी पत्नी बाला देवी
अपडेटेड 11 फ़रवरी , 2025

सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में आवेदन, मंजूरी और वितरण समेत विभिन्न चरणों में कई तरह के झोल थे. इन वजहों से उनका लाभ हासिल करना बेहद मुश्किल था. लाभार्थियों की शिकायत रहती थी कि उन्हें राशि का महज 30 फीसद मिल पाता है जबकि बाकी पैसे सरकारी अधिकारी खा जाते थे.

कल्याणकारी तंत्र को फंड के कहीं और भेज देने, नकली भुगतान, जटिल मंजूरियों, फर्जी दावेदारों के लाभ उठा लेने और योग्य लोगों के छूट जाने सरीखे मसलों से जूझना पड़ रहा था. सरकारी कार्यालयों के अंतहीन चक्कर लगाने पड़ते थे, कई सारे दस्तावेज जुटाने पड़ते थे, कई सारी मंजूरियां लेनी पड़ती थीं और इस प्रक्रिया में सामने आने वाले कई व्यक्तियों के हाथ गरम करने पड़ते थे.

यूं आसान हुआ जीवन

एक दशक पहले शुरू किए गए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) ने सरकारी सहायता वितरण में क्रांति ला दी. इसने सरकारी योजनाओं के वितरण तंत्र को प्रभावित करने वाली कमियों को दूर किया. डीबीटी अब केंद्र और राज्य सरकारी नकद हस्तांतरण के लिए बेहद अहम हो गया है जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 4 फीसद है.

इससे पहले, वितरण में अकुशलता और धांधली के कारण कुल सब्सिडी राशि का 50 फीसद कोई और हड़प लेता था. इससे निबटने के वास्ते सरकार ने लाभार्थियों को धन के प्रत्यक्ष हस्तांतरण करने के लिए सशक्त डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया. इस बदलाव में जेएएम की तिकड़ी—जन धन, आधार और मोबाइल—सहायक बने. 2010 में शुरू किए गए आधार ने बायोमेट्रिक सत्यापन के आधार पर 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की.

इसने व्यक्तियों के जनसांख्यिकीय विवरण को एकमात्र सत्यापित पहचान से जोड़ने वाला एक डेटाबेस बनाया जो बाद में बैंक खातों से जुड़ा. बैंकिंग सुविधा से महरूम विशाल आबादी को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने के लिए अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाइ) की शुरूआत की गई.

वित्त वर्ष 2015 में 56 योजनाओं के 6,000 करोड़ रुपए वितरित हुए थे. नवंबर 2023 तक इसमें राज्यों की योजनाओं समेत कुल 1,016 योजनाएं शामिल हो गई हैं और उनके तहत 104 करोड़ लाभार्थियों को वितरित की जाने वाली राशि बढ़कर 2.14 लाख करोड़ रुपए हो गई है. इसने धोखाधड़ी को कम किया और सही लोगों तक समय पर लाभ पहुंचना सुनिश्चित हुआ. मसलन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना से 11 करोड़ से ज्यादा किसानों को मदद मिलती है और साल में तीन बार 2,000 रुपए की किस्तें वितरित की जाती हैं.

इस योजना के 2019 में शुरू होने के बाद से 3.46 लाख करोड़ रुपए डीबीटी से वितरित किए गए हैं. ईवाई टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग के पार्टनर प्रकाश जयराम कहते हैं, ''इतनी बड़ी मात्रा में और तेजी से तथा सही लाभार्थियों तक पहुंच डीबीटी से पहले के दौर में अकल्पनीय थी.'' दक्षता में सुधार के अलावा डीबीटी ने धांधली और नुक्सान को रोककर वित्त वर्ष 2022 तक सरकार के 5 लाख करोड़ रुपए बचाए हैं.

जयराम कहते हैं, ''अगले चरण में सरकार को डीबीटी योजनाओं को रिएक्टिव की बजाय प्रोएक्टिव रूप में विकसित करना चाहिए.'' वे जोर देते हैं कि ज्यादातर योजनाओं में अभी भी लाभार्थियों को आवेदन करना होता है और आधार के अलावा अन्य जानकारियां मुहैया करानी होती हैं. आपदा राहत सरीखे मामलों में फिलहाल सरकार के पास प्रभावित क्षेत्रों और परिवारों की पहचान करने के लिए डेटाबेस हैं और उससे आवेदन के बिना सीधे डिजिटल हस्तांतरण में मदद ली जानी चाहिए.

इसने कैसे बदली मेरी जिंदगी

संगीता रावत, गृहिणी, कोलुआ गांव, भोपाल, मध्य प्रदेश

संगीता रावत लाडली बहना योजना की लाभार्थी हैं जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने 2023 में शुरू किया था. इसके तहत उन्हें हर महीने 1,250 रुपए मिलते हैं. पहले उनके पास बैंक खाता नहीं था लेकिन इस योजना में पंजीकरण के लिए उन्होंने खाता खुलवाया. संगीता को डीबीटी का भी कोई अनुभव नहीं था लेकिन उन्होंने इससे पहले के दिनों की भयानक कहानियां सुन रखी थीं.

वे बताती हैं, ''मैंने तो गांव में अपनी आंखों से ये सब देखा भी है. लेकिन अब डीबीटी की वजह से मैं बैंक से संबद्ध व्यवसाय प्रतिनिधि (बीसी) तक जाती हूं. वहां बायोमेट्रिक देती हूं. मुझे सिर्फ अपना आधार ले जाना होता है और बीसी मुझे नकद पैसा दे देता है.'' बीसी 25,000 रुपए तक जमा भी कर सकते हैं और एक बार में वहां से 10,000 रुपए निकाले जा सकते हैं. संगीता कहती हैं कि अब कोई बिचौलिया उनका पैसा नहीं हड़प सकता.

संगीता रावत, 33 वर्ष

गृहिणी, कोलुआ गांव, भोपाल, मध्य प्रदेश

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी)

शुरुआत: 1 जनवरी, 2013

उपलब्धियां: नवंबर 2023 तक 1,016 योजनाओं के जरिए 104 करोड़ लाभार्थियों को 2.14 लाख करोड़ रूपये वितरित किए गए.

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