अब स्वास्थ्य सेवा में नई प्रगति की बदौलत कई ऐसी बीमारियों का इलाज भी किया जा सकता है, जिन्हें पहले लाइलाज मान लिया जाता था. जब घर के लोगों की जिंदगी दांव पर लगी हो, तो बड़े शहरों या करीबी कस्बों में इलाज करवा सकने की जानकारी सभी की जरूरत बन जाती है.
मगर निजी अस्पतालों में इलाज करवाने का खर्च बर्बाद कर सकता है और लाखों लोग बेहद महंगे इलाज का खर्च चुकाने की कोशिश में दिवालिया हो जाते हैं. ज्यादातर लोग बेहद भीड़ भरे सरकारी अस्पतालों की अंतहीन कतारों के हवाले कर दिए जाते हैं. सबके लिए समान स्वास्थ्य बीमा उन लोगों के लिए सपना मालूम देता है जो ब्रिटेन या स्कैंडेनेवियाई देशों की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को ईर्ष्या भरी नजरों से देखते हैं.
यूं आसान हुआ जीवन
जन स्वास्थ्य बीमा योजना होने भर का यह मतलब नहीं कि स्वास्थ्य सेवा की सुविधा आसानी से मिल ही जाएगी. यही वजह है कि एबी पीएम-जेएवाई द्वितीयक और तृतीयक इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर साल में प्रति परिवार 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा देने से कहीं ज्यादा है.
सबसे पहले तो इस योजना में बहुत सारी चिकित्सा सेवाएं—अस्पताल में भर्ती होने, ऑपरेशन, डायग्नोस्टिक और भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों समेत 1,500 मेडिकल पैकेज—शामिल हैं. इसमें सामान्य चिकित्सा, सर्जरी, कैंसर विज्ञान, हृदयरोग विज्ञान सरीखी 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं से जुड़ी 1,949 चिकित्सा कार्यविधियां भी शामिल हैं.
लाभार्थी न केवल इलाज के खर्च का दावा कर सकते हैं, बल्कि उन्हें मुफ्त दवाइयां (अस्पताल से छुट्टी मिलने के 15 दिन बाद की दवाइयों सहित), डायग्नोस्टिक (भर्ती होने से तीन दिन पहले तक), भोजन और आवास भी नि:शुल्क मिलता है.
इसका फायदा उठाना भी आसान है. दिल्ली में घरेलू कामकाज करने वाली 39 वर्षीया प्रियम कुमारी ने एम्स दिल्ली में अपने स्तन कैंसर का इलाज करवाने के दौरान इस योजना का फायदा उठाया.
वे कहती हैं, "यह पूरी तरह कैशलेस था. मुझे अपनी जेब से एक पइसा भी नहीं देना पड़ा. बस अपना कार्ड दिखाया और मेरे कैंसर का इलाज हो गया." यही नहीं, एबी पीएम-जेएवाई में देश भर के 30,529 अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जिसमें 17,063 सरकारी और 13,466 निजी अस्पताल हैं. लाभार्थी इनमें से कहीं भी अपना इलाज करवा सकते हैं. कई निजी बीमा योजनाओं के विपरीत एबी पीएम-जेएवाई नाम दर्ज करवाने के बिल्कुल पहले ही दिन से कवरेज प्रदान करती है. इस तरह पहले से मौजूद सारी बीमारियां इसमें कवर हो जाती हैं.
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ और नीति आयोग के सदस्य वी.के पॉल कहते हैं, ''एबी पीएम-जेएवाई दुनिया की सरकारी वित्तपोषित सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन योजना है. पिछले साल से इसके तहत 70 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के सभी बुजुर्ग भी साल में 5 लाख रुपए तक के मुफ्त चिकित्सा इलाज करवा सकते हैं. दूसरी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं या निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी से सुरक्षित वरिष्ठ नागरिक भी एबी पीएम-जेएवाई का फायदा ले सकते हैं."
अब तक इसके तहत अस्पतालों में 7.79 करोड़ भर्तियों को मंजूरी दी गई और वित्तीय कवरेज के रूप में 1,07,125 करोड़ रुपए दिए गए हैं. गौरतलब यह है कि इसमें 1,692 करोड़ रुपए के 22 लाख मोतियाबिंद के ऑपरेशन, 808 करोड़ रुपए का 5.61 लाख स्तन कैंसर उपचार और 4,653 करोड़ रुपए की 4.71 लाख हार्ट एंजियोप्लास्टी शामिल हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, एबी पीएम-जेएवाई की बदौलत जेब से किए जाने वाले खर्चों में 1.25 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई. इसके लागू होने के बाद स्वास्थ्य सेवा पर जेब से किए जाने वाले खर्चों में 21 फीसद और स्वास्थ्य से जुड़े कर्जों में आठ फीसद की कमी आई.
जिला अस्पतालों को भी 226 करोड़ रुपए के सालाना विशुद्ध लाभ के साथ अच्छे-खासे वित्तीय फायदे मिले. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का अनुमान है कि संभावित वृद्धि के साथ यह आंकड़ा 362 करोड़ रुपए पर पहुंच सकता है. कुल मिलाकर एबी पीएम-जेएवाई को इसके प्रयोग में आसानी और कवरेज में विविधता के लिए सराहा जाता है, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर हुई है.
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"आयुष्मान भारत की बदौलत ही मेरे पति जिंदा हैं"
चंपा देवी के लिए आयुष्मान भारत योजना वरदान की तरह आई. इसकी वजह से चंपा और उनके पति गुरुदीन को स्वास्थ्य की देखभाल के बड़े खर्चों की फिक्र नहीं करनी पड़ी. चंपा ने पहली बार अपने आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल अयोध्या के एक अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन के लिए किया.
वे कहती हैं, "कोई परेशानी नहीं आई और मुझे बस इतना करना पड़ा कि अपनी उंगलियों के निशान देने पड़े. पूरी प्रक्रिया में रास्ता दिखाने के लिए कोई न कोई वहां रहता था और हमें झटपट सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल गया."
फिर मई 2024 में गुरुदीन कार दुर्घटना में इतने गंभीर रूप से घायल हो गए कि मौत नजदीक दिखाई देती थी. आयुष्मान भारत ने उनकी जिंदगी बचाने में मदद की और उनके पूरे इलाज का खर्च उठाया. वयोवृद्ध दंपती को कुछ पैसा जरूर देना पड़ा लेकिन यह उसके मुकाबले न के बराबर था जो उन्हें बीमा नहीं होने पर चुकाना पड़ता. चंपा स्वीकार करती हैं, "आयुष्मान भारत की वजह से ही मैं आज अच्छे-से देख सकती हूं और मेरे पति आज जिंदा हैं."
चंपा देवी, 70 वर्ष, गुरुदीन पांडेय, 71 वर्ष, नवाबगंज, उत्तर प्रदेश
एबी पीएम-जेएवाई के तहत देशभर में 30,529 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है और लोग इनमें से किसी में भी अपना इलाज करवा सकते हैं.