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"हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है"

रेस्तरां मालिक ऋतु डालमिया लंबे वक्त की अपनी साथी माइकेला टेडसन के साथ हाल ही हुई शादी के बाद घर में खुशियों का मजा ले रही हैं. इंडिया टुडे हिंदी के साथ उन्होंने कई पहलुओं पर बातचीत की. पेश है संपादित अंश

ॠतु डालमिया, रेस्तरां मालिक
ॠतु डालमिया, रेस्तरां मालिक
अपडेटेड 19 फ़रवरी , 2025

आपकी कामयाबी का सीक्रेट सॉस क्या है?

जहां तक मेरा वास्ता है, मुझे नहीं लगता कि कोई सीक्रेट है. जिस तरह हमें स्वीकार्यता मिली, वैसे ही कई झटके भी लगे. बस एक चीज की बदौलत हम यहां पहुंचे और वह यह स्वीकार करना है कि मैं गलतियां करूंगी और हरेक गलती एक सबक होगी ताकि वही गलती बार-बार दोहराए जाने की नौबत न आए.

भारतीय व्यंजनों को इतालवी लोगों और इतालवी व्यंजनों को भारतीय लोगों के सामने पेश करने में क्या चुनौतियां आईं?

भारतीयों की थाली में इतालवी व्यंजन परोसना शुरू करना इतालवी लोगों को भारतीय व्यंजन पेश करने के मुकाबले कहीं ज्यादा मुश्किल था. लेकिन बात दरअसल यह भी है कि चीजें सही वक्त पर सही जगह हों.

मैंने भारत में पहला इतालवी रेस्तरां खोला, तो वह अपने वक्त से बहुत पहले की बात थी. 2017 में मिलान में जब हमने चित्तमणि खोला तो वह वाकई पहला 'असल' भारतीय रेस्तरां था...जहां चिकन बाल्टी या विंदालू नहीं परोसे जाते थे. मिलान ने चित्तमणि को खुली बांहों से गले लगाया.

आपकी शादी को अभी दो महीने से थोड़ा ज्यादा वक्त हुआ है. मिसेज ऐंड मिसेज होना कैसा लगता है?

ईमानदारी से कहूं तो यह कमाल का एहसास है. मुझे नहीं लगता था कि इससे कुछ भी बदलेगा, पर देखिए, मैं कितनी गलत थी. इसने सारी डायनामिक्स ही बदल दी. अब अच्छा-खासा सुरक्षा का एहसास है और यह ग्लैम कैंप के बजाए एक ठोस, मजबूत घर लगता है.

मैं इस बात को लेकर ज्यादा सजग हो गई हूं कि मैं कितनी यात्राएं किया करती थी. अब अंतत: बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस खोजने की कोशिश कर रही हूं क्योंकि अब हम दो हैं.

आप एलजीबीटीक्यूआईए+ अधिकारों की अव्वल हिमायती रही हैं. 2025 और उससे आगे इस क्षेत्र में आपको कौन-से अच्छे बदलाव नजर आते हैं?

2023 और 2024 खराब साल रहे. नागरिक अधिकारों के पक्ष में दाखिल याचिका अमान्य कर दी गई और मुझे नहीं पता यह फिर कब स्वीकार की जाएगी. अलबत्ता ढेरों युवा अपने माता-पिता के दबाव में अपोजिट सेक्स के शख्स से शादी नहीं करने के अपने अधिकार के लिए लड़ रहे हैं. हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है लेकिन हम उम्मीद और धैर्य का दामन नहीं छोड़ सकते.

—प्रिया पाथियान.

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