● पद्म विभूषण सम्मान मिलने पर आपके क्या विचार हैं और आपकी संगीत रचना के संदर्भ में इसकी क्या अहमियत है?
मुझे खुशी है कि इस प्रतिष्ठित सम्मान के जरिए वॉयलिन के महत्व को रेखांकित किया जा रहा है. मुझे बताया गया कि किसी भारतीय वॉयलिनवादक को पहली बार पद्म विभूषण दिया जा रहा है, सो यह दोहरी खुशी का विषय है. मेरे लिए तो संगीत ही सर्वस्व है. मेरा इससे आध्यात्मिक जुड़ाव होता है और मैं चाहता हूं कि श्रोताओं को भी इसी तरह जुड़ने में मैं उनकी मदद कर सकूं.
● केरल साहित्य उत्सव में आप किस सोच के साथ आए?
मैं यहां अपनी दो किताबों पर चर्चा के लिए आया हूं. राग हारमनी जो कि 2024 में आई, और दूसरी क्लासिकल म्यूजिक ऑफ इंडिया. पहली में 36 स्केल की मेरी अवधारणा है जिसके जरिए भारतीय रागों पर आधारित भारतीय संगीतकारों की बंदिशों को दुनिया का कोई भी ऑर्केस्ट्रा पेश कर सकता है. इस सोच के तहत कमाल के बड़े ऑर्केस्ट्रेशन रचे जा सकते हैं जिनके बारे में कभी सोचा या सुना भी नहीं गया है?
● ऐसे समय में जब लोगों की एकाग्रता का स्तर बहुत कम हो गया है, साहित्य उत्सव उसमें किस तरह की भूमिका निभा सकते हैं?
पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने में वे बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. जैसे मैं तो यही देखकर अभिभूत हूं कि केरल लिटरेचर फेस्टिवल में सभी उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है. ऐसे फेस्टिवल लोगों को अपने पसंदीदा लेखकों से मिलने और उनके साथ बातचीत करने का मौका उपलब्ध कराते हैं.
● आपने ग्लोबल फ्यूजन की अवधारणा रची और लक्ष्मीनारायण ग्लोबल म्यूजिक फेस्टिवल भी शुरू किया. आपके अगले कंसर्ट कहां-कहां हैं?
1-2 फरवरी को मैं जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में परफॉर्म कर रहा हूं और उसके बाद मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में एक कंसर्ट है. मई से लेकर जुलाई तक अमेरिका के अलग-अलग शहरों में मेरी प्रस्तुतियां होनी हैं.
—नीता लाल.