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"संगीत का तो सिनेमा और रंगमंच दोनों में अहम रोल रहा है"

पद्म श्री से सम्मानित मशहूर गीतकार प्रसून जोशी ने अपने पहले म्यूजिकल नाटक राजाधिराज: लव, लाइफ, लीला...के साथ रंगमंच में प्रवेश और अन्य मुद्दों पर इंडिया टुडे हिंदी के साथ बातचीत में क्या-क्या बताया

प्रसून जोशी, मशहूर गीतकार
प्रसून जोशी, मशहूर गीतकार
अपडेटेड 6 फ़रवरी , 2025

राजाधिराज: लव, लाइफ, लीला के रूप में बड़े स्तर की भव्य नाट्य प्रस्तुति के जरिए किस्सागोई की सीमाओं को आपने और विस्तार दे दिया...

कृष्ण और उनकी लीलाओं के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है. विषय के विस्तार को देखते हुए इसके साथ न्याय कर पाना आसान न था. युवा पीढ़ी को दिमाग में रखते हुए मैंने राजाधिराज की स्क्रिप्ट, डायलॉग और गाने लिखे. कृष्ण के पूरे जीवन से कुछ प्रसंग उठाए. इनमें से कुछ जाने-पहचाने तो कुछ उतने परिचित न थे. सबको मैंने एक कथानक में पिरो दिया.

आपके लिए इसमें नया नजरिया क्या था?

इस प्रोजेक्ट के पीछे धनराज और भूमि नाथवानी की ताकत थी. कृष्ण भक्त के रूप में वे कुछ असरदार तैयार करना चाहते थे पर उसका स्वरूप क्या हो, वह कैसे किया जाए, इसमें उन्हें मदद की दरकार थी. मैं राजस्थान में नाथद्वारा के मंदिरों में गया, विद्वानों-शोधकर्ताओं से मिला और पौराणिक ग्रंथ पढ़े जिससे कि कृष्ण के जीवन के कुछ दिलचस्प और अल्पज्ञात पहलू पता चल सकें.

थिएटर में संगीत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है?

संगीत का तो सिनेमा और रंगमंच दोनों में अहम रोल रहा है. इस प्रोडक्शन के लिए म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी सचिन-जिगर के साथ साझेदारी बड़ी मजेदार रही. नाटक का एक और अनूठा पहलू था: इसके ज्यादातर गाने अभिनेता मंच पर खुद गा रहे थे.

और किन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?

इस प्रोजेक्ट के दौरान मैंने भगवद्गीता और कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर विस्तार से लिखा था पर समयसीमा के चलते इसमें शामिल न कर सके. मेरे पास दो और नाटकों का पूरा मसाला है! एक और म्यूजिकल के गानों पर काम कर रहा हूं और बच्चों के विषय भी टटोल रहा हूं. मेरा कविता संग्रह भी जल्द पूरा होने वाला है.

—गीतिका सचदेव.

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