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जॉन राइट ने की थी खोज; अब कैसे दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाज बने जसप्रीत बुमराह

आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर जसप्रीत बुमराह ने 2024 में इतने रिकॉर्ड तोड़े कि गिने न जाएं. अव्वल तेज गेंदबाज पाने की भारत की दुआएं रंग लाईं. और अब तो वे एक कदम आगे बढ़कर खेल के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज बन गए

बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के चौथे टेस्ट मैच में गेंदबाजी करते बुमराह
बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के चौथे टेस्ट मैच में गेंदबाजी करते बुमराह
अपडेटेड 20 फ़रवरी , 2025

अपने 93 साल के क्रिकेट इतिहास में खेल का कोई ऐसा पहलू नहीं जिसमें भारत 'सर्वश्रेष्ठ' न रहा हो. सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज, विकेटकीपर, फील्डर, स्पिनर, सभी किसी न किसी वक्त हमारे पास रहे हैं. बस एक ही अपवाद था, हमारे पास धरती का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज कभी नहीं रहा. इस क्रिकेट सीजन में जसप्रीत जसबीरसिंह बुमराह की बदौलत वह खांचा भी पूरा हो गया.

उस देश के लिए जो 1970 के दशक में कपिल देव के आगमन से पहले 'तेज' गेंदबाज होने का दावा तक नहीं कर सकता था, इस सिंहासन पर बुमराह की ताजपोशी काफी कुछ चांद पर उतरने सरीखी घटना है. कपिल की महानता पर कभी कोई शक न था, लेकिन डेनिस लिली, माइकल होल्डिंग, इमरान खान और मैल्कम मार्शल सरीखे खिलाड़ियों की मौजूदगी की वजह से अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज होने का तमगा कभी उनके हाथ नहीं आया.

ऐसा नहीं कि बुमरा के करियर के दौरान दूसरे प्रतिभाशाली और हुनरमंद तेज गेंदबाज मौजूद नहीं रहे—कुछेक का नाम लें तो कमिंस, स्टार्क, शाहीन और रबाडा तो रहे ही. मगर जब 22 गज की शोभा बढ़ाने वाले संभवत: महानतम तेज गेंदबाज वसीम अकरम उनके नाम पर अपनी मोहर लगाते हैं—"जसप्रीत दुनिया में सबसे अच्छा है"—तो बहस का फैसला हो गया मालूम देता है.

आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी गेंदबाज ने एक कैलेंडर वर्ष में इससे बेहतर स्ट्राइक रेट पर इतने विकेट नहीं लिए: 2024 में बुमरा ने 14.92 के बेमिसाल औसत से 71 विकेट लिए. हर 30.1वीं गेंद पर उन्होंने विकेट निकाला.

कुल मिलाकर यह वह साल था जब जस्सी ने देश में इंग्लैंड की 'बैजबॉल' को परास्त करने में भारत की मदद की, बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीत में मारक रहे, पर्थ में भारत के 150 रन पर सिमटने के बाद जीत दिलाई, और ऑस्ट्रेलिया-भारत बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज के पांचों मैच में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्रिकेटर रहे.

यह तो बस टेस्ट क्रिकेट था. उस साल जब भारत ने 11 साल में अपना पहला आईसीसी खिताब जीता, बुमरा ने कमाल का प्रदर्शन किया. न केवल उन्होंने दिमाग चकराने वाले 8.26 के गेंदबाजी औसत से 15 विकेट लिए, बल्कि प्रति ओवर महज 4.17 रन दिए—जो टी20 क्रिकेट की दुनिया में अनसुना आंकड़ा है.

फिर आश्चर्य क्या कि भारत के सबसे अव्वल पेसर को टी20 विश्व कप के दौरान 'चीट कोड' के मुंहबोले नाम से नवाजा गया. मजाक में कहा गया कि भारत इस लिहाज से चीटिंग कर रहा था कि उसे तो पूरे 20 ओवर मिले, जबकि विपक्षी टीम को महज 16 ही मिले क्योंकि बुमरा के चार ओवर मेडन ओवर जैसे थे. ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज के दौरान भी यही कहानी थी, जिसे ऑस्ट्रेलिया बनाम बुमराह का मुकाबला करार दिया गया.

बारबेडोस में 29 जून, 2024 को टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल जीतने के बाद पत्नी संजना के साथ बुमराह

बुमराह का सर्वोत्तम प्रदर्शन भले पिछले 12 महीनों में आया लगता हो, शिखर पर उनका वर्चस्व आधा दशक पहले शुरू हो चुका था. सचिन तेंडुलकर ने 2019 में ही ऐलान कर दिया था कि "वे दुनिया के सबसे अच्छे गेंदबाज हैं और उसका सर्वश्रेष्ठ अभी सामने आना है." इस भविष्यवाणी पर किसी को हैरानी नहीं हुई. आखिर तेंडुलकर ही थे जिन्हें लीक से हटकर तकनीक से गेंद फेंकने वाले इस युवा गेंदबाज के आकलन का काम सबसे पहले सौंपा गया था.

2013 में मुंबई इंडियंस के स्काउटिंग प्रमुख और भारत के पूर्व कोच जॉन राइट बुमराह को फ्रेंचाइजी के प्रैक्टिस सेशन में लेकर आए, जहां उन्हें इस 'सचिन टेस्ट' से गुजरना पड़ा. नेट सेशन जल्द ही खत्म हुआ और बेढंगे ऐक्शन और अनगढ़ रफ्तार और सटीकता वाले इस 19 वर्षीय युवा गेंदबाज को दिग्गज क्रिकेटर की मंजूरी मिल गई. कुछ साल पहले यह नौजवान अंडर-16 की जिला टीम में जगह नहीं बना पाया था, मगर अब यह बात इतिहास के गुमशुदा अध्याय की तरह मालूम देती है.

तेंडुलकर को नेट पर जिस बात ने प्रभावित किया, दुनिया ने उसे महीने भर बाद देखा. रॉयल चैलेंजर बंगलौर के खिलाफ आईपीएल में पदार्पण करते हुए बुमराह ने तीन विकेट झटके, जिनमें कप्तान और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली का विकेट भी था. जब क्रीज के बहुत बाहर से फेंकी गई—इतने अजीबोगरीब ऐंगल से कि इसे समझ पाना मुश्किल था—इनस्विंगर को समझने में नाकाम रहे कोहली एलबीडब्ल्यू होकर वापस लौटे, कवर पर एक फील्डर गौर से देख रहा था.

भारत के पूर्व खिलाड़ी अंबाती रायुडू ने इंडिया टुडे से कहा, "मुंबई इंडियंस के नेट पर मैंने बुमराह को खेला. वे तेज थे और उनकी गेंदों का सामना करना अजीब-सा था. मुझे पता था कि बस एक अच्छी गेंद फेंकने की देर है और वे विराट को आउट कर देंगे. जब ऐसा हुआ तो आप विराट के चेहरे पर सदमा देख सकते थे. उनके लिए यह बहुत हैरतअंगेज था लेकिन हमें पता था कि यह तो होना ही है."

कोई कह सकता है कि गर्मियों की उस रात बेंगलूरू में कोहली के साथ जो हुआ, उसमें हैरानी का तत्व था. मगर आखिर वह क्या है जिससे अंतहीन वीडियो विश्लेषण के इस युग में, जहां नयापन और आश्चर्य का तत्व बनाए रख पाना नामुमकिन-सा है, अहमदाबाद में जन्मा यह तेज गेंदबाज साल दर साल बल्लेबाजों को परेशान करता रहा है?

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मोहम्मद कैफ इसकी कैफियत बयान करते हैं, जिसे वे उनकी कामयाबी का राज मानते हैं. वे कहते हैं, "पहले कई गेंदबाजों के पास अविश्वसनीय हुनर और रफ्तार थी, जसप्रीत को जो बात अलग और खास बनाती है, वह है (बल्लेबाज के खिलाफ) सटीक योजना बनाना और फिर फटाफट उसे जमीन पर उतारना."

मगर इन सारे गुणों को मिलाकर क्रियान्वित करने में एक और गुण का बड़ा रोल रहा है और वह है उनका नितांत विनम्र और जमीन से जुड़ा होना. मैच के हाईलाइट्स की रीलें मैदान पर 'बूम बूम' के बेदाग आचरण से भरी पड़ी हैं: उनका नपा-तुला जश्न मनाना और सज्जनों सरीखे हावभाव. कैमरे से दूर बुमराह आदर्श क्रिकेटर हैं. हर वह शख्स इसकी तस्दीक करेगा जो खेल से जुड़ा है या इस तेज गेंदबाज के संपर्क में आया है.

इस लेखक ने खुद 2024 के टी20 विश्व कप के दौरान देखा, जहां बुमराह की टीम के कुछ साथी पर्सनल शेफ, सोशल मीडिया क्रू और यहां तक कि निजी सुरक्षा के साथ अलग से अपनी पसंद के होटलों में ठहरे थे. वहीं भारत के सबसे अव्वल तेज गेंदबाज और उनके परिवार को अक्सर अलग-अलग उड़ानों में यात्रा करते देखा गया.

पत्नी संजना गणेशन टूर्नामेंट के दौरान ब्रॉडकास्टर के तौर पर काम कर रही थीं और उन्होंने अपने बेटे के साथ भारतीय टीम की आधिकारिक उड़ानों से नहीं बल्कि अपने नियोक्ता की तरफ से बुक व्यावसायिक उड़ानों में सफर करना चुना. इसका मतलब यह था कि महीने भर चले टूर्नामेंट के दौरान ऐसे भी क्षण आए जब हवाईअड्डों पर यात्रियों को भारतीय टीम के लिए रास्ता छोड़ने के लिए कहा गया; और कई मौकों पर उन यात्रियों में टूर्नामेंट में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी की पत्नी और बेटा भी शामिल थे.

इन्हीं खूबियों और उसके साथ असाधारण प्रदर्शन की बदौलत बुमराह को अगले टेस्ट कप्तान की जिम्मेदारी के लिए मुकम्मल पसंद के तौर पर देखा जा रहा है और यहां तक कि उनकी तुलना भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों के साथ की जा रही है. एम.एस. धोनी के मातहत खेलते हुए खासा वक्त बिता चुके रायुडू कहते हैं, ''बुमराह और एम.एस धोनी काफी मिलते-जुलते हैं—आत्मविश्वास से भरे, शांत और हुनरमंद. सभी अच्छे कप्तानों में खुद को दूसरों की जगह रखकर देखने और अपनी सीमाओं में रहकर काम करने की क्षमता होती है. यही वह दूसरी चीज है जो उनमें और धोनी में साझा है. आगे चलकर वे अच्छे कप्तान साबित होंगे."

बल्लेबाज सुपरस्टारों और स्वाभाविक रूप से उन्हीं के आगे चलकर नेतृत्व की भूमिकाएं संभालने की खुराक पर पले-बढ़े देश के लिए अगले संभावित कप्तान के रूप में बुमराह का उभरना भारतीय क्रिकेट इतिहास का निर्णायक मोड़ हो सकता है. भले ही कप्तान के तौर पर उनके दो टेस्ट मैच (एक जीता, एक हारा) निर्णायक फैसला देने के लिए काफी न हों, पर धोनी के साथ उनकी तुलना से उनकी साख में इजाफा ही हुआ है.

रायुडू की भावनाओं को दोहराते हुए कैफ कहते हैं, "वे मुझे धोनी की याद दिलाते हैं. धोनी आखिरी गेंद पर छक्का लगाते थे, बुमराह आखिरी ओवर फेंकते हैं. दोनों बहुत ज्यादा दबाव में काम करते हैं, लेकिन दबाव में शांत भी बने रहते हैं. ये सब अच्छे कप्तान के लक्षण हैं."

सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट में बुमराह की लगातार 12 यॉर्कर गेंदों ने सबसे पहले जॉन राइट का ध्यान खींचा और अहमदाबाद के इस युवा खिलाड़ी को मुंबई इंडियंस में खेलने का मौका मिला. प्रथम श्रेणी के क्रिकेट में उन धमाकों से लेकर पिछले सीजन में विजाग टेस्ट के दौरान इंग्लैंड के ओली पोप को आउट करने के लिए फेंकी गई यॉर्कर—जिसे कमेंटेटर ने "किसी भी यॉर्कर से बेहतरीन" करार दिया—तक बुमराह संभावित महान से प्रमाणित लीजेंड बन गए हैं.

खेल के इतिहास में 40 टेस्ट के बाद 20 से कम औसत (19.40) वाले अकेले गेंदबाज के रूप में अब वे ऐसी स्थिति में हैं जहां अब तक के महानतम क्रिकेटर का प्रतिष्ठित तमगा हासिल करने की जुर्रत कर सकते हैं.

इस बीच, जब भारत इसी महीने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के साथ एक और चुनौती के लिए कमर कस रहा है, पूरा देश बुमराह की फिटनेस को लेकर चिंतित (वे इस टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं) है. क्योंकि जब मौजूदा आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर आपकी टीम में हो, तब एक और वैश्विक खिताब हासिल करना कोई चांद तोड़कर लाने जैसा नहीं होगा.

—निखिल नाज़.

मील के पत्थर-2024

आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर और टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर

टी-20 वर्ल्ड कप 2024 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट

भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट शृंखला में मैन ऑफ द सीरीज.

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