scorecardresearch

बॉलीवुड को अचानक क्यों भाने लगा है पूर्वोत्तर भारत?

मुख्तलिफ नजारे दिखाने और पर्दे पर नया नजरिया लाने को उत्सुक बॉलीवुड के स्टुडियो तेजी से देश के पूर्वोत्तर इलाके का रुख कर रहे

पाताल लोक (2025), अमेजन प्राइम की इस सीरीज के दूसरे सीजन में कहानी का एक बड़ा हिस्सा नगालैंड के कोहिमा और दीमापुर में केंद्रित किया गया है
'पाताल लोक' के दूसरे सीजन का एक बड़ा हिस्सा नगालैंड में फिल्माया गया है
अपडेटेड 17 फ़रवरी , 2025

मनोरंजन की दुनिया में जेम्स हैंडिक ऐसे शख्स हैं जिनकी ''जबरदस्त मांग" है. असम निवासी ये लाइन प्रोड्यूसर पूर्वोत्तर के राज्यों के डिप्टी कमिशनर, पुलिस डायरेक्टर जनरल और सुपरिटेंडेंट के साथ अच्छा रसूख रखते हैं. इस बूते पर वे इस विशाल और अपेक्षाकृत कम खोजे-खंगाले गए इलाके में शूटिंग की इजाजत फटाफट दिलवा सकते हैं.

इमरजेंसी (2025) के कुछ हिस्से असम के काजीरंगा और चंदूबी के अलावा मेघालय में भी शूट करने वाली मणिकर्णिका फिल्म्स से लेकर हाल ही कोहिमा में अगले सीजन की शूटिंग पूरी करने वाली अमेजन प्राइम की पॉपुलर सीरीज फैमिली मैन (2019) तक हैंडिक सैकड़ों के फिल्म दस्ते संभालते और पक्का करते हैं कि काम में कोई रुकावट न आने पाए.

हैंडिक की व्यस्तता इस बात का सबूत है कि पूर्वोत्तर किस तरह से मुंबई की फिल्म बनाने वाली बिरादरी का पसंदीदा ठिकाना बन रहा है. कश्मीर, नई दिल्ली और लखनऊ सरीखी लोकेशन काफी मात्रा में दिखाई जा चुकी हैं और ऐसे में मुंबई के सिरजनहार पूर्वोत्तर के अनदेखे सौंदर्य और आकर्षण को ढूंढ निकालने में लगे हैं.

वे सिर्फ रंग-बिरंगे सांस्कृतिक रूपांकनों (ज्वेल थीफ) या रोमांटिक गाने (शाहरुख और माधुरी दीक्षित के अभिनय से सजी कोयला) के लिए मनोरम पृष्ठभूमि वाली अनोखी लोकेशन की तलाश में ही नहीं हैं, बल्कि ऐसी जिनका अपना चरित्र और नैरेटिव भी हो. यही वजह है कि दर्शक स्थानीय नेता की हत्या की जांच-पड़ताल कर रहे अपने मुख्य किरदार के पीछे-पीछे नगालैंड पहुंच गए प्राइम वीडियो के पाताल लोक के सीजन 2 में बिल्कुल नई संस्कृति, भाषा, कॉस्ट्यूम और परिवेश देख रहे हैं.

बिल्कुल एक नई दुनिया

पाताल लोक के रचियता सुदीप शर्मा से पूछिए जरा कि वह क्या था जो उन्हें इस इलाके में खींच लाया? वे आपको बताते हैं कि गुवाहाटी में पले-बढ़े और पढ़े-लिखे होने की वजह से वे भारत के इस हिस्से से हमेशा खासे मोहित रहे जिसके बारे में विशेषकर मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा में बहुत कम जाना और बताया जाता है.

शर्मा कहते हैं, ''संस्कृति के लिहाज से यह अविश्वसनीय रूप से समृद्ध है. मुझे इसकी और ज्यादा विस्तार से खोज करनी थी. ऐसी जगहों तक जाना था जो हमने परदे पर पहले कभी नहीं देखीं क्योंकि कहानियों और उनके किरदारों का विस्तार वहां तक पहुंचता ही नहीं था. ज्यादा से ज्यादा बस चलताऊ संदर्भ आए.''

प्राइम वीडियो इंडिया में ओरिजिनल्स के हेड निखिल मधोक को भी यही जज्बा यहां खींच लाया. पाताल लोक और सिक्किम में शूट किए गए द लास्ट आवर सरीखे शो ने 'भारत के अक्सर कम दिखाए गए हिस्से' को दिखाकर इस प्लेटफॉर्म के प्रोग्रामों के फलक को ज्यादा विविधता प्रदान की, साथ ही शायद उसकी 'सामाजिक बुनावट' को भी एक नया फलक दिया.

मधोक कहते हैं, ''हमारा जोर हमेशा भारत भर की ऐसी नई कहानियों पर रहा है जिनकी जड़ें स्थानीय संस्कृति में हों. इस तरह के प्रोजेक्ट अलग-अलग किस्म की कहानियां बयान करने और उस इलाके की समृद्ध संस्कृति को गहराई से खोजने और जानने की हमारी प्रतिबद्धता दर्शाते हैं. प्रामाणिकता सबसे अहम है—हम स्थानीय कलाकारों को कास्ट करते हैं और इस तरह पर्दे पर और पर्दे के पीछे की भी कमाल की प्रतिभाएं सामने लाते हैं.''

मगर यह महज जिज्ञासा और विविधता की जरूरत भर नहीं जिसकी वजह से मुंबई के फिल्म दस्ते समूह के समूह में यहां खिंचे चले आए हैं. कानून-व्यवस्था और सड़क कनेक्टिविटी में आए सुधार ने भी असम और नगालैंड सरीखी जगहों पर शूटिंग के बढ़ने में योगदान दिया.

हैंडिक कहते हैं, ''पहले उग्रवादी धड़ों की वजह से यह माना जाता था कि पूर्वोत्तर असुरक्षित है. लोग यहां आने से कतराते थे. लेकिन एक बार जब वे आने लगे, तो उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया.'' हैंडिक जेम्ज विजंस चलाते हैं जिसके खाते में वरुण धवन की अदाकारी से सजी हॉरर कॉमेडी भेड़िया और विशाल भारद्वाज की रंगून सरीखी फिल्में हैं, जो दोनों ही अरुणाचल प्रदेश में शूट की गई हैं.

असम राज्य फिल्म फाइनेंस और विकास निगम के चेयरमैन सीमांत शेखर बॉलीवुड की बढ़ती मुग्धता का श्रेय 'अत्याधुनिक सड़कों और ब्रह्मपुत्र पर बने पांच पुलों' को देते हैं. वे कहते हैं, ''शूटिंग के सभी कामों के लिए हमारी अगुआई में सिंगल विंडो क्लियरेंस है. अगर वे (फिल्मकार) असम में शूट करना चाहते हैं, तो राज्य सरकार उन्हें हर तरह की मदद देगी. हमारे मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा फिल्म उद्योग के मेहमानों को यहां लाने के लिए काफी उत्सुक हैं.''

शांत सुरम्य प्रदेश

ऐसा खुलापन स्वागतयोग्य और निर्णायक भूमिका निभाने वाला है क्योंकि असम पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों के लिए प्रवेशद्वार का काम करता है. गुवाहाटी से ईटानगर, शिलांग, दीमापुर और आइजोल के लिए लगातार उड़ानें हैं तो राज्य में दूसरे हवाई अड्डे—सिल्चर, धुबरी, डिब्रूगढ़, जोरहाट, तेजपुर और लखीमपुर—भी हैं.

तेजपुर, जहां भारतीय सेना की चौथी कोर का मुख्यालय और वायु सेना का अड्डा भी है, ऐक्शन आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए खास तौर पर पसंदीदा ठिकाना बन गया है. फाइटर के हृतिक रोशन और दीपिका पादुकोण याद हैं? जी5 की वेबसीरीज जांबाज की शूटिंग भी यहीं हुई थी. पेशे से गायक शेखर का कहना है कि अछूती लोकेशन और सुरक्षित माहौल दोनों ने मिलकर पूर्वोत्तर को फिल्म स्टुडियो के लिए आकर्षक बना दिया.

सुरक्षा का विषय तो यहां की पृष्ठभूमि में कही जाने वाले कहानियों तक में आ गया है. चूंकि राजनैतिक और ऐतिहासिक थीम वाले शीर्षक हाशिए के धड़ों और सेंसर बोर्ड का निशाना बन गए, लिहाजा कम जाने-माने इलाकों में पंख पसारती कहानियों से विवादों और बाद में उग्र प्रतिक्रिया से बचने में मदद मिलती है.

आबादी के कम घने होने से आउटडोर लोकेशन पर भीड़ को नियंत्रित करना भी ज्यादा आसान होता है. हैंडिक कहते हैं, ''पूर्वोत्तर के लोग दिमाग के बजाए दिल से ज्यादा सोचते हैं. शूट के दौरान लोग सहयोग करते हैं.'' इससे यहां रोजगार भी मिला है. स्थानीय लोग जूनियर आर्टिस्ट और स्टंटमैन के अलावा सुरक्षा, खानपान, कला निर्माण (बढ़ई, पेंटिंग और सेटिंग बॉय), ग्राउंड ट्रांसपोर्ट के साथ ही कॉस्ट्यूम डिजाइन और हेयर तथा मेकअप के क्षेत्रों में नौकरियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपने को जानकार और सुसज्जित बना रहे हैं.

इस कदर कि जरूरत के लिए यहां आने वाले मुंबई के क्रू का अनुपात घटने लगा है क्योंकि प्रोडक्शन हाउस स्थानीय प्रतिभाओं के हुनर में भरोसा जता रहे हैं, जो अपने स्तर पर सारा काम संभाल लेते हैं.

ऐसी ही एक लाभार्थी अनुंगला जो लोंगकुमेर हैं. लेखिका, शोधकर्ता और फिल्मकार लोंगकुमेर उस वक्त हैरान रह गईं जब उनके पास पाताल लोक के निर्माताओं का फोन आया और रिसर्चर, ट्रांसलेटर और ऑन-सेट डायलॉग कंसल्टेंट के रूप में जुड़ने के लिए कहा गया. लोंगकुमेर ने पटकथा में स्थानीय संवेदनशीलताओं को ठेस पहुंचा सकने वाले विवादास्पद या गलत हिस्से बताने के अलावा कुछ किरदारों के नाम बदलने के सुझाव दिए.

उन्होंने सीरीज के कलाकारों तिलोत्तमा शोम, नागेश कुकुनूर और जाह्नु बरुआ को राज्य की आम बोलचाल की भाषा नागामी भी सिखाई. दिल्ली, कलिम्पोंग और दार्जिलिंग के अलावा कोहिमा और दीमापुर में महीने भर काम करने के इस अनुभव के बारे में लोंगकुमेर कहती हैं, ''उन्होंने मुझे काफी छूट दी और काम करने के लिए मुझमें पूरा भरोसा जताया.'' उन्होंने कॉस्ट्यूम और सेट डिजाइन टीमों को बताया कि क्या लेना चाहिए ताकि पोशाक और सेट प्रामाणिक रहें.

वे कहती हैं, ''बाहर से आने वाले कई लोगों के अपने पूर्वाग्रह और धारणाएं होती हैं कि नगा लोग और जगहें कैसी हैं और यहां क्या होता है. लेकिन सुदीप ने नगालैंड को असामान्य या विदेशी-सी जगह के रूप में देखने के बजाए ऐसी जगह के रूप में देखा जहां असल लोग असल दुनिया के मसलों से दोचार होते हैं, और समझा कि हमारे पास कहने के लिए अपने संघर्षों की कहानियां हैं.'' लोंगकुमेर यह देखने को उत्सुक थीं कि नगा दर्शक शो को कैसे देखेंगे, खासकर जब इसके कलाकारों में स्थानीय संगीतकारों, यूट्यूबरों और दूसरे क्षेत्रों के पेशेवरों के बीच से कई जाने-पहचाने चेहरे शामिल हैं. वे कहती हैं, ''मुझे उम्मीद है कि उन्हें किस्सागोई में मजा आएगा. यह अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का हमारा मौका है.''

अभिनेत्री गुल पनाग डॉक्यूमेंटरी सीरीज ऑफ द रोड शूट करने के लिए इस इलाके में रहीं और हाल ही में उन्होंने फैमिली मैन का सीजन 3 पूरा किया. वे इस बात से खुश हैं कि मुंबई में सिनेमा के सिरजनहार पूरब का रुख कर रहे हैं. उन्हीं के शब्दों में, ''अमेजन के दो बड़े शो नगालैंड की पृष्ठभूमि पर हैं, यह तथ्य इस बात का सबूत है कि समावेशिता और पूर्वोत्तर को भारत की मुख्यधारा के दायरे में लाना लोगों की प्राथमिकता है.''

यह तो बस शुरुआत है. हैंडिक इस साल मुंबई के दो बड़े बैनरों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं. वे व्हाट्सऐप पर निर्माताओं को नई लोकेशनों के बारे में बताते रहे और हर साल 2-3 नए प्रोजेक्ट हासिल करते रहे हैं. वे कहते हैं कि जहां तक इस इलाके की लोकेशनों और कहानियों की बात है, तो फिल्मकारों ने अभी बस सतह कुरेदी भर है.

भेड़िया (2022)

एक फॉरेस्ट रेंजर के बेटे, निर्देशक अमर कौशिक अरुणाचल प्रदेश के मेडो के शानदार परिवेश में पले-बढ़े. अपनी फिल्म को उन्होंने राज्य की स्थानीय लोककथा से जोड़कर उसमें रूप बदलने वाले यापुम भेड़िए का किरदार डाला. स्थानीय कलाकार पालिन कबाक को उन्होंने उसमें ठोस भूमिका दी.

भेड़िया (2022) एक फॉरेस्ट रेंजर के बेटे, निर्देशक अमर कौशिक अरुणाचल प्रदेश के मेडो के शानदार परिवेश में पले-बढ़े

पाताल लोक (2025)

अमेजन प्राइम की इस सीरीज के दूसरे सीजन में कहानी का एक बड़ा हिस्सा नगालैंड के कोहिमा और दीमापुर में केंद्रित किया गया है. एसोसिएट रिसर्चर, अनुवादक और डायलॉग कोच अनुंगला जो लोंगकुमेर बताती हैं कि इसकी कास्ट में कई स्थानीय संगीतकार, यूट्यूबर और प्रोफेशनल हैं.

फाइटर (2024)

भारत में हवाई ऐक्शन सीक्वेंस को प्रामाणिक ढंग से शूट करने की बात आए तो असम के तेजपुर स्थित इंडियन एयरफोर्स के बेस से बेहतर कोई ठिकाना नहीं. हृतिक रोशन और अनिल कपूर की यह फिल्म यहीं शूट हुई थी.

रंगून (2017)

विशाल भारद्वाज ने अपना रंगून अरुणाचल प्रदेश में तलाशा. इसकी शूटिंग सियांग नदी के इर्दगिर्द पासीघाट और पंगिन जैसे गांवों में हुई. इलाके के घने जंगल और खुले लैंडस्केप ने 1940 के दशक वाले इस एपिक रोमांस ड्रामा को माकूल सेटिंग मुहैया की.

रंगून (2017) विशाल भारद्वाज ने अपना रंगून अरुणाचल प्रदेश में तलाशा

रॉक ऑन-2 (2016)

अपनी भरपूर संगीत प्रतिभाओं की वजह से शिलाँग को भारत का रॉक कैपिटल कहा जाता रहा है. ऐसे में मैजिक (Magik) बैंड के म्यूजिकल ड्रामे के सीक्वल के लिए इससे अच्छी सेटिंग क्या हो सकती थी! प्रोड्यूसर-ऐक्टर फरहान अख्तर की इस इलाके को पॉपुलर कल्चर में लाने की एक कोशिश थी.

अनेक (2022)

अनुभव सिन्हा के इस ऐक्शन ड्रामा में पुलिस अफसर बने आयुष्मान खुराना सरकार और अलगाववादी गुटों के बीच सुलह करवाने के लिए पूर्वोत्तर जाते हैं. इसकी शूटिंग असम और मेघालय में हुई थी. नगा मॉडल-अभिनेत्री कैरोल एंड्रिया केविचूसा की उसमें केंद्रीय भूमिका थी.

Advertisement
Advertisement