राजधानी दिल्ली में ठंड तेजी से कदम खींच रही है. चढ़ती ऊष्मा के बीच भारत रंग महोत्सव यानी भारंगम (28 जनवरी-16 फरवरी) और विश्व पुस्तक मेला (1-9 फरवरी) के रूप में यहां दो बड़े सांस्कृतिक जलसों का आगाज हो गया है. एक मंच पर देशभर के प्रतिनिधि नाटकों के आयोजन के रूप में शुरू राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) का यह रोमांचक प्रयोग पच्चीस साल में अब अपनी ही परंपरा के बोझ तले दबता दिख रहा है. नाकाफी बजट के चलते वह अपने बूते खड़ा रह पाने को जूझ रहा है. नतीजा: दिल्ली और देश के 10 अन्य शहरों में दिखाए जा रहे 120 नाटकों में आधे तो एनएसडी के छात्रों और रंगमंडल के या दूसरे थिएटर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स के और आमंत्रितों के ही हैं.
देश भर के स्वतंत्र पेशेवर और शौकिया थिएटर ग्रुप्स इसमें हिस्सेदारी की बड़ी हसरत के साथ सालभर तैयारी करते हैं लेकिन इस बार भी 905 समूहों के नाटकों में से निर्णायक मंडल के रास्ते 60 ही जगह बना पाए (विदेश की 60 प्रविष्टियों में से 10). भारंगम दुनिया के सबसे बड़े नाट्य महोत्सवों में शुमार हो चुका है पर हाल के वर्षों में एनएसडी के शीर्ष अमले की काफी ताकत यह साबित करने में जाया हो रही है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा थिएटर फेस्टिवल है. मुमकिन है, आंकड़ों में देर-सवेर यह साबित हो जाए. पर बड़े की बजाए फेस्टिवल को ज्यादा ताजगी भरा और नौजवानों को जोड़ने वाला बनाने के लिए कुछ नवाचारी और आउट ऑफ द बॉक्स सोच की दरकार है.
वैसे कुछ रंगकर्मी नई सोच और नए काम के साथ आ भी रहे हैं. मसलन, भोपाल के अक्षित मारवाह की प्रस्तुति घर के भीतर. नसों में धीरे-धीरे रेंगते हुए यह प्रायोगिक-सा नाटक अंत में पारंपरिक परिवार में स्त्री की मुखरता को सलीके से सामने लाता है. असम के बिद्युत नाथ का नाटक रघुनाथ मेटा अवार्ड विजेता है. आशीष पाठक-स्वाति दुबे और जॉय मैस्नेम मेतेई-साजिदा साजी के अच्छे कामों की निरंतरता को देखते हुए उनके नाटक क्रमश: भूमि और अग्निसुता द्रौपदी ध्यान खींचेंगे. सत्यव्रत राउत (नंदिका केसरी), पियाल भट्टाचार्य (जिमुतहृदयम) और नवदीप कौर (सोहनी महिवाल) जैसे दिग्गज भी होंगे. मुंबई से के.के. रैना-इला अरुण का अजातशत्रु, अमितोष नागपाल का मिड्ल क्लास ड्रीम ऑफ अ समर्स नाइट, साहेब नीतीश का स्वप्न लोक आ रहे हैं.
दिलचस्प है कि पहली बार मुल्क से बाहर काठमांडो और कोलंबो जैसे शहर भारंगम के आयोजन स्थल के रूप में जुड़ रहे हैं. हालांकि वहां 2-3 स्थानीय और 2-3 अपने रंगमंडल के नाटक कराने का आसान-सा ढर्रा अपनाया है एनएसडी ने. फेस्टिवल का ब्यौरा एनएसडी की साइट पर देख सकते हैं.
कुछ खास हैं जो
1. घर के भीतर
निर्देशक: अक्षित मारवाह, भोपाल
2. रघुनाथ
निर्देशक: बिद्युत कुमार नाथ, असम
3. अग्निसुता द्रौपदी
नि.: जॉय मेस्नाम मेतेयी, मणिपुर
4. भूमि
निर्देशक: स्वाति दुबे, जबलपुर
5. जिमुतहृदयम
निर्दे.: पियाल भट्टाचार्य, कोलकाता
6. स्वप्नलोक
निर्देशक: साहेब नीतीश, मुंबई
7. सोहनी महिवाल
निर्देशक: नवदीप कौर, चंडीगढ़
8. महात्मा वर्सेज गांधी
निर्देशक: सुजन मुखर्जी, कोलकाता
9. नंदिका केसरी
निर्देशक: सत्यव्रत राउत, ओडिशा
10. एनएसडी तृतीय वर्ष के छात्रों के छह डिप्लोमा प्रोडक्शन