
इसके एक सामान्य बजट होने की उम्मीद नहीं थी. नरेंद्र मोदी सरकार के लगातार तीसरी बार सत्ता संभालने के बाद यह उसका पहला पूर्ण बजट था, इससे पूरे देश को उम्मीदें थीं. क्या यह देश को आखिरकार 'विकसित भारत' की ज्यादा ग्रोथ वाली राह पर ले जाएगा? क्या देश अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद खासकर निर्यात के मोर्चे पर उथल-पुथल का सामना कर पाएगा?
ट्रंप ने पहले ही भारत को टैरिफ सम्राट करार दिया है. इस बीच, चीन ने डीपसीक के साथ अलग तरह की एक जंग शुरू कर दी है जो अमेरिका के चैटजीपीटी का सस्ता और अधिक कुशल जवाब है. ऐसे में भारत को औद्योगिक क्रांति 4.0 के मामले न पिछड़ने के लिए क्या करना चाहिए? लेकिन बड़ी-बड़ी जरूरी बातों को छोड़ दें तो बजट 2025 को पहले अपने ही देश के लोगों के हाथ मजबूत करने थे.
अर्थव्यवस्था के लॉन्ग कोविड ने भारत के 54 करोड़ आबादी वाले मजबूत मध्य वर्ग को झकझोरा था जबकि यह वर्ग 1991 में उदारीकरण के बाद भारत की खपत की कहानी का मुख्य स्तंभ था. भारत की ग्रोथ या वृद्धि को नए सिरे से रफ्तार देने के लिए इस वर्ग के मनोबल को फिर से बढ़ाना जरूरी था.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी राजस्व के 1 लाख करोड़ रुपए से हाथ धो बैठना मुनासिब समझा. इसकी बदौलत उन्होंने वेतनभोगी वर्ग को आयकर राहत देने का फैसला किया जिससे 1 लाख रुपए प्रति माह तक कमाने वाले पूरी तरह से इसके दायरे से बाहर हो जाएं और अन्य लोगों को भी कम कर भुगतान करना पड़े. विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इससे खपत और निवेश का अच्छा चक्र शुरू होगा और भारत की सुस्त वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा. देश की वृद्धि दर के वित्त वर्ष 25 में 6.4 फीसद और वित्त वर्ष 26 में 6.3 से 6.8 फीसद के बीच रहने का अनुमान है. लेकिन यह लाखों युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए पर्याप्त नहीं है.
हालांकि कराधान के प्रस्तावों ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं भले ही उन्हें सबसे आखिर में पेश किया गया. जिन दूसरे क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत थी, सरकार ने उनकी तरफ से भी आंखें नहीं मूंदीं. उदाहरण के लिए कृषि को ही लें. राज्यों को साथ लेने की जरूरत महसूस करते हुए बजट में राज्यों की भागीदारी में पीएम धन-धान्य कृषि योजना की घोषणा की गई ताकि उत्पादकता बढ़ाई जा सके, फसल विविधता को बढ़ावा मिले और सिंचाई और भंडारण सुविधाओं में सुधार हो सके. दलहन पर जोर बरकरार रहा और तुअर, उड़द और मसूर पर विशेष जोर देते हुए सरकार ने दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए छह वर्षीय मिशन शुरू किया.
बजट 2025 नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन की घोषणा करके उत्पादन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहा. यह मिशन पांच प्रमुख जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करेगा: व्यापार करने में आसानी, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल, एक जीवंत सूक्ष्म, लघु और मझोला उद्यम (एमएसएमई) सेगमेंट, प्रौद्योगिकी को अपनाना और गुणवत्ता वाले उत्पाद. सरकार ने कारोबार करने में आसानी की खातिर नियामक सुधारों के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है, जो गैर-वित्तीय क्षेत्रों में नियमों, प्रमाणन, लाइसेंस और अनुमतियों की भूलभुलैया की समीक्षा करेगी.
कारोबार में इनसे ही सबसे बड़ी बाधाएं पैदा होती हैं. वित्त मंत्री ने एमएसएमई क्षेत्र में अधिक व्यवसायों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए निवेश और टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर वर्गीकरण मानदंडों को संशोधित किया. इसके अलावा, उन्होंने 5 करोड़ रुपए से 10 करोड़ रुपए तक के गिरवी-मुक्त कर्ज के लिए क्रेडिट गारंटी को दोगुना करके कर्ज लेना ज्यादा सुलभ और आसान बना दिया.
निर्यात को बढ़ावा देने की खातिर बजट 2025 में विदेशी बाजार में गैर-टैरिफ उपायों से निबटने के लिए कर्ज और सहायता सुलभ कराने की सुविधा के लिए क्षेत्रीय और मंत्रालय-विशिष्ट लक्ष्यों के साथ एक एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन की घोषणा की गई. वित्त मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ युद्ध को कम करने के लिए 1,600 सीसी से कम और उससे अधिक इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों और कुछ यात्री वाहनों पर आयात शुल्क कम कर दिया.
मोबाइल फोन और एलसीडी टीवी के पुर्जों पर भी शुल्क में कटौती की गई. व्यापार करने में आसानी को निर्यात तक भी बढ़ाया गया, जिसमें बीटीएन या भारत ट्रेडनेट बनाने का प्रस्ताव है. बीटीएन अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा है जो व्यापार दस्तावेजीकरण और वित्तपोषण समाधानों के लिए एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा.
इस बजट ने आत्मनिर्भरता के दायरे को 'मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' तक बढ़ा दिया. इसके लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने की खातिर पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे. उभरते टियर 2 शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) को बढ़ावा देने में राज्यों का मार्गदर्शन करने के लिए एक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार करने की भी योजना है.
निवेश के मामले में भी बड़े फैसले किए गए. बीमा क्षेत्र में 100 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देते हुए इसे और खोला गया. बजट में परमाणु ऊर्जा पर सरकार के जोर का भी ध्यान रखा गया. इसके तहत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए न्यूक्लियर एनर्जी मिशन स्थापित करने का प्रस्ताव है. 2033 तक स्वदेशी रूप से विकसित पांच एसएमआर चालू हो जाएंगे.
लेकिन जब वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था के भविष्य का खाका पेश किया तो उन्होंने राजकोषीय मजबूती के बड़े लक्ष्य और वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसद तक सीमित रखने पर भी उतना ही ध्यान दिया. बजट 2025 में क्या अच्छा था, और किन क्षेत्रों को लाभ हुआ, यह जानने के लिए आगे पढ़ें.
कराधान
उपभोक्ता वर्ग को बड़ा तोहफा
बजट 2025 में भारत के मध्य वर्ग को शायद सबसे बड़ा तोहफा मिला है जो पिछले कुछ समय से भारी कर बोझ की शिकायत कर रहा था. उसकी गुहारों को सुनते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि जिनकी आय 12 लाख रुपए प्रति वर्ष है, उन्हें अब किसी भी सूरत में कोई टैक्स नहीं भरना पड़ेगा. इसमें नई कर व्यवस्था के तहत वेतन भोगी लोगों को मिलने वाली 75,000 रुपए की छूट भी शामिल कर दें तो यह सीमा बढ़कर 12.75 लाख रुपए तक पहुंच जाती है.
बजट में कर स्लैबों को भी तर्कसंगत बनाया गया है और अब 5 फीसद की न्यूनतम दर पहले के 2.5 लाख रुपए के बजाए 4 लाख रुपए से शुरू होगी. इसी तरह 30 फीसद की उच्चतम दर उन पर लागू होगी जिनकी आमदनी 24 लाख रुपए प्रति वर्ष से अधिक है. पहले यह सीमा 10 लाख रुपए थी. सरकार करों में निश्चितता के लिए नया आयकर विधेयक लाने की भी तैयारी कर रहा है.

फायदे
हालांकि नए उपायों से सरकार के राजस्व में 1 लाख करोड़ रुपए की कमी आएगी लेकिन इससे एक करोड़ लोगों को कर राहत मिलेगी. अन्य लोगों को एक साल में 70,000 रु. से लेकर 1.1 लाख रु. तक का लाभ होगा.
एचएसबीसी ग्लोबल की एक रिपोर्ट कहती है, "व्यक्तिगत आयकर ढांचे में बड़े बदलावों से कर का बोझ कम होगा...और शहरी उपभोक्ताओं की जेब में अधिक पैसे आएंगे. मोटे हिसाब से पता चलता है कि इससे कर देने वालों के हाथों में 7 फीसद तक ज्यादा पैसे आ सकते हैं." इस अतिरिक्त रकम से अब देश में खपत को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
बजट 2025 सरकारी पूंजीगत व्यय के बजाए खपत पर आधारित विकास की ओर बदलाव की दिशा नजर आती है. ट्राईलीगल में पार्टनर और टैक्स प्रैक्टिस के प्रमुख हिमांशु सिन्हा कहते हैं, "आयकर घटने से वाहन, एफएमसीजी, यात्रा और पर्यटन, क्विक कॉमर्स और सस्ते घर जैसे क्षेत्रों में खर्च बढ़ने की संभावना है." उन्हें इन क्षेत्रों में निवेश और विलय-अधिग्रहण बढ़ने की उम्मीद है.
इन्फ्रास्ट्रक्चर
विकास का वाहक बुनियादी ढांचा
बजट में विकास को गति देने और रोजगार सृजन के लिए बुनियादी ढांचे के बड़े क्षेत्रों में धन लगाने पर ध्यान दिया गया है. रेलवे स्टेशन को अपग्रेड करने, पटरियों का विद्युतीकरण पूरा करने और देश में तेज रफ्तार ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के लिए 2.52 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं. राजमार्ग क्षेत्र को 2.87 लाख करोड़ रुपए मिले, जिससे जाहिर है कि सरकार वर्षों से चली आ रही सफलता की कहानी के साथ छेड़छाड़ करने को तैयार नहीं है और सालाना सड़क निर्माण की रफ्तार बनाए रखना चाहती है.
हालांकि वह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर बढ़ते कर्ज को नियंत्रण में रखने के तरीके भी तलाश रही है. विमानन में, दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई यात्रा से जोड़ने के लिए संशोधित क्षेत्रीय संपर्क योजना, उड़ान को 540 करोड़ रुपए दिए गए हैं.
फायदे
देश भर में डीजल की जगह इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपनाने से न केवल रेल यात्रा आधुनिक बनेगी बल्कि यात्री सेवाओं और माल ढुलाई दोनों की परिचालन लागत भी घटेगी. पिछले साल का भारी भरकम बजट बरकरार रखा गया है जिससे वित्त वर्ष 26 के अंत तक पूरे रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण करने जैसी बड़ी परियोजनाएं पटरी पर बनी रहेंगी. 200 वंदे भारत ट्रेनें शुरू करने की योजना से यात्रियों को रफ्तार और आराम मिलेगा.
फिर माल ढुलाई है जिसके मार्च 2025 तक 1.6 अरब टन तक पहुंचने का अनुमान है—यह निर्माताओं और निर्यातकों दोनों के लिए बाधाएं कम करने में मददगार हो सकता है.
इसी तरह, आधुनिक राजमार्ग किसानों को अधिक बाजारों तक और छोटी कंपनियों को अधिक ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करेंगे. 10,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की योजना निर्माण उद्योग को बढ़ावा देगी और इससे लाखों मानव घंटे के रोजगार पैदा होंगे.
उड़ान का लक्ष्य अगले दशक में 120 नए शहरों को जोड़ना और 4 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों को हवाई यात्रा उपलब्ध कराना है—यह पहल जितनी आर्थिक आंकड़ों से जुड़ी है, उतनी ही सामाजिक प्रगति से भी जुड़ी है.
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तेज रफ्तार की खातिर
बजट आवंटन
रेलवे : 2.52 लाख करोड़
(लक्ष्य: विव 26 तक 100% विद्युतीकरण)
उड्डयन
उड़ान योजना : ₹ 540 करोड़
(लक्ष्य: अगले एक दशक में 4 करोड़ हवाई यात्री)
राजमार्ग : ₹ 2.87 लाख करोड़
(लक्ष्य: विव 2510,10,000 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग)
एनएचएआई कर्ज : ₹ 3.35 लाख करोड़ (विव24)
₹2.76 लाख करोड़ (विव 25 में अनुमानित)
(विव 26 में कोई कर्ज नहीं )
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कृषि
दलहन पर खास जोर
एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है. लेकिन बजट में इसे लेकर अचानक कोई प्रतिक्रिया नहीं की गई. इसके बजाए, बजट का फोकस क्षमता निर्माण, उपज बढ़ाने में किसानों की मदद करने और बाजारों तक उनकी पहुंच आसान बनाने पर रहा है.
इसके लिए कई मिशन लाए गए हैं, जिनमें पीएम धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई), दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन (तुअर, उड़द और मसूर पर फोकस), सब्जियों और फलों के लिए व्यापक कार्यक्रम, ज्यादा उपज वाले बीजों के लिए राष्ट्रीय मिशन, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (सतत नीली क्रांति के जरिए मछुआरों की मदद के लिए) आदि शामिल हैं.
आवंटन में 2.5 प्रतिशत की कमी आई है (2024-25 के लिए रखे गए 1.41 लाख करोड़ रुपए की तुलना में) लेकिन सरकार को उम्मीद है कि बड़े कार्यक्रमों के पुनर्गठन से इसकी भरपाई हो जाएगी.
फायदे
ये कार्यक्रम देश भर के 20 करोड़ किसानों (बागबान और मछुआरे शामिल) को सीधे लाभ पहुंचाएंगे. पीएम धन-धान्य कृषि योजना कम उत्पादकता वाले 100 आकांक्षी जिलों में लगभग 1.07 करोड़ किसानों को सहायता पर ध्यान केंद्रित करेगी. बाजारों तक किसानों की पहुंच आसान बनाने के तरीकों में एफपीओ (किसान-उत्पादक संगठन) की बड़ी भूमिका की भी कल्पना की गई है.
बजट में मखाना बोर्ड जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण की भी बात की गई है ताकि पूर्वी भारत के किसानों को मखानों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सुधार करने में सहायता मिल सके.
100 कम उत्पादकता वाले जिलों को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कवर किया जाएगा
1,000 करोड़ रुपए: दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए
500 करोड़ रुपए: सब्जी-फल मिशन के लिए
100 करोड़ रुपए: मखाना बोर्ड के लिए
100 करोड़ रुपए: हाइब्रिड बीजों के मिशन के लिए
500 करोड़ रुपए: कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन के लिए
आवंटन में 2.5% की कमी आई है पर सरकार को उम्मीद है कि बड़े कार्यक्रमों के पुनर्गठन से इसकी भरपाई हो जाएगी.
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शिक्षा
अब एआई की होगी पढ़ाई
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित टूल्स दुनियाभर में पठन-पाठन का तरीका बदल रहे हैं. शोध से पता चलता है कि रोबोटिक्स और एआई के इस्तेमाल से समस्या-समाधान की काबिलियत बढ़ती है. बजट 2025-26 में देश के शिक्षा और हुनर के माहौल में बदलाव की नींव रखी गई है. अहम फैसलों में शिक्षा के क्षेत्र में एआइ के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण शामिल है, जिसके लिए 500 करोड़ रुपए का आवंटन है. इससे अनुकूल शिक्षा, स्वचालन और एआइ संचालित शोध-अनुसंधान को बढ़ावा देने का सरकार का संकल्प जाहिर होता है.
युवाओं में रोबोटिक्स, एआई और मशीन लर्निंग के प्रति दिलचस्पी जगाने और टेक्नोलॉजी संचालित भविष्य की ओर बढ़ने के लिए 50,000 अटल टिंकरिंग लैब्स का विस्तार किया गया है. बजट में निजी क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपए रखे गए हैं. कौशल बढ़ाने के लिए पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के निर्माण के साथ आतिथ्य और वैश्विक क्षमता केंद्रों में कार्यक्रम लोगों को नई आर्थिक मांगों के अनुरूप हुनरमंद बनाएंगे.
फायदे
उत्कृष्टता केंद्र देश में एआई-संचालित शिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में अहम पहला कदम है. अटल टिंकरिंग लैब्स की उपलब्धता बढ़ाकर सरकार यह तय कर रही है कि अधिक से अधिक छात्र इस ओर बढ़ें. औपचारिक तौर पर देश के कामकाजी वर्ग में ऐसे हुनर पांच फीसद से भी कम हैं. राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र इसका समाधान मुहैया कराएंगे. सरकार टियर-2 शहरों में कौशल कार्यक्रम के जरिए रोजगार सृजन का विकेंद्रीकरण कर रही है और छोटे शहरों में भी प्रतिभा और निवेश केंद्र स्थापित कर रही है.
पढ़ाई के लिए अधिक प्रयोगशालाएं
2025-26 में स्कूली शिक्षा के लिए बजट आवंटन पिछले बजट में 73,008 करोड़ रुपए से 8 फीसद बढ़कर 78,572 करोड़ रुपए हो गया है.
उच्च शिक्षा के लिए आवंटन पिछले बजट में 47,620 करोड़ रुपए से बढ़कर 50,078 करोड़ रुपए हो गया जो 5 फीसद की वृद्धि है.
स्कूली शिक्षा में समग्र शिक्षा योजना का आवंटन 37,500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 41,250 करोड़ रुपए किया गया है. टियर-2 शहरों में कौशल कार्यक्रम से रोजगार सृजन का विकेंद्रीकरण होगा जिससे छोटे शहर प्रतिभा और निवेश हब बनेंगे.
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प्रतिरक्षा
अगली जेनरेशन की जंग के उपकरण तैयार करना
टकरावों के साथ-साथ युद्धक्षेत्र की मौजूदा हकीकत के मुताबिक योजना बनाने में वैश्विक रुझानों के लिहाज से केंद्रीय बजट 2025 में एआई-संचालित युद्ध, साइबर सुरक्षा और अगली पीढ़ी की निगरानी पर जोर दिया गया है. इससे आधुनिकीकरण के लिए देश के संकल्प का अंदाजा लगता है. इसके लिए बजट में रक्षा आधुनिकीकरण के तहत 1,80,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.
इसका एक अहम हिस्सा—1.48 लाख करोड़ रुपए—एआई-संचालित रक्षा प्रणालियों के साथ उन्नत प्लेटफॉर्म हासिल करने के लिए है. अनुसंधान और विकास और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बड़ी राशि आवंटित की गई है. मसलन, 26,816 करोड़ रुपए डीआरडीओ के लिए और 7,146 करोड़ रुपए सीमा सड़क संगठन के लिए हैं. इसमें घरेलू खरीद के लिए 1.11 लाख करोड़ रुपए है ताकि भारतीय रक्षा निर्माता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं. रक्षा के तहत कुल आवंटन 6.81 लाख करोड़ रुपए है जो पिछले साल से 4.65 फीसद अधिक है.
फायदे
बजट से नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की ओर बढ़ने का इशारा मिलता है. बजट में सेना के विभिन्न विभागों में मौके पर खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक तालमेल, स्मार्ट निगरानी ग्रिड, एआई, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नवाचार पर जोर है. थिएटर कमान जल्द ही तैयार होगी, यह रक्षा मंत्रालय के 2025 के लिए 'सुधार के साल’ के नजरिए के अनुरूप है.
रक्षा अनुसंधान और विकास निधि नई टेक्नोलॉजी में बदलाव की ओर इशारा करती है, जिससे आमूलचूल बदलाव होता है. मसलन, क्वांटम प्रौद्योगिकी और हाइपरसोनिक सिस्टम. निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले अनुसंधान और विकास के लिए 20,000 करोड़ रु. का प्रोत्साहन फर्मों को रक्षा समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है.
आधुनिक आकांक्षाएं
1.80 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं पूंजीगत व्यय के लिए.
इसमें से 1.48 करोड़ रुपए एयरक्राफ्ट, एआई संचालित डिफेंस आदि के लिए हैं.
1.12 करोड़ रुपए घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए रखे गए हैं.
26,816 करोड़ रुपए आवंटित हैं डीआरडीओ के लिए.
बजट में सेना के विभिन्न विभागों में रणनीतिक तालमेल पर जोर दिया गया है.
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ऊर्जा
बजट 2025 में देश के ऊर्जा के इस्तेमाल में बदलाव की नींव रखने के लिए ऊर्जा को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें 2047 तक 100 गीगावॉट एटमी ऊर्जा क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है. इस लक्ष्य के लिए निजी क्षेत्र के साथ सक्रिय भागीदारी की खातिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एटमी ऊर्जा अधिनियम और एटमी नुक्सान नागरिक दायित्व कानून में संशोधन का वादा किया.
उन्होंने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के अनुसंधान और विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ एटमी ऊर्जा मिशन की शुरुआत की भी घोषणा की है. यह योजना वर्ष 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी रूप से विकसित एसएमआर को चालू करने की है.
फायदे
2047 तक 100 गीगावॉट एटमी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय करके बजट में दो महत्वपूर्ण चुनौतियों से निबटने की तैयारी है. यह है ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन. एटमी ऊर्जा से काफी कम कार्बन निकलता है, जिससे देश में पुराने ताप बिजली संयंत्रों को बंद करने और अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी. 30 जनवरी, 2025 तक देश में एटमी क्षमता 8,180 मेगावॉट थी. एसएमआर पर जोर विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि यह लागत प्रभावी और दूरदराज के स्थानों के लिए उपयुक्त हैं. ये सौर और पवन जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों के पूरक हैं.
एसएमआर के लिए 20,000 करोड़ रुपए का आवंटन और स्वदेशी टेक्नोलॉजी विकास को बढ़ावा देने से एटमी ऊर्जा में देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. देश में लघु रिएक्टरों (बीएसआर) के विकास जैसी सार्वजनिक-निजी भागीदारी उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में सक्षम बनाएगी, जिससे डीकार्बनाइजेशन प्रयासों में सहायता मिलेगी. बजट पर अपनी टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नागरिक एटमी ऊर्जा भविष्य में देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी.
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एमएसएमई
छोटे उद्यमों में जान फूंकना
बजट में करीब 5.7 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को कृषि के बाद दूसरा विकास इंजन माना गया है. बजट में इस क्षेत्र में लगातार कर्ज के अंतराल को दूर करने के उपाय भी पेश किया. मकसद उनके वर्गीकरण मानदंडों में संशोधन के अलावा निवेश और कुल कारोबार की सीमा को बढ़ाना है ताकि अधिक कारोबार सरकारी योजनाओं से फायदा ले सकें. इसके लिए कर्जदाताओं को प्रोत्साहित करने और कर्ज उपलब्धता आसान बनाने के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसएमई) के लिए बिना गिरवी के कर्ज की सीमा को 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रु. किया गया है.
यह कुटीर और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट योजना का हिस्सा है, जिसने एमएसएमई को 1 करोड़ ऐसे ऋण की सुविधा प्रदान की है. साथ ही 10 लाख माइक्रो उद्यमों को 5 लाख रु. लिमिट के क्रेडिट कार्ड मिलेंगे और महिला व एससी-एसटी समेत 5,00,000. पहली बार के उद्यमियों को 2 करोड़ रु. तक का कर्ज अगले 5 साल में दिया जाएगा. इसके अतिरिक्त, निर्यात-आधारित एमएसएमई को अब 20 करोड़ रु. तक के सावधि ऋण के लिए कवर मिलेगा.
फायदे
इन उपायों से पांच वर्ष में एमएसएमई को 1.5 लाख करोड़ रु. का अतिरिक्त ऋण मिलने की उम्मीद है. पीएचडीसीसीआई के प्रेसिडेंट हेमंत जैन कहते हैं कि बजट का फोकस वृद्धिशील कर्ज पर है ताकि तरलता बढ़े. इस बीच, एमएसएमई को बैंक ऋण बड़े उद्यमों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है. नवंबर 2024 तक, एमएसएमई को ऋण ने बड़े उद्यमों के लिए 6.1 फीसद की तुलना में 13 फीसद की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की थी.
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विज्ञान और तकनीक
निजी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा
देश में बुनियादी विज्ञान अनुसंधान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को 38,613 करोड़ रुपए के आवंटन से बड़ी मदद मिली है. यह 2024-25 के संशोधित अनुमानों में प्राप्त 14,472 करोड़ रुपए से लगभग तीन गुना है. 20,000 करोड़ रुपए में से आधी से अधिक राशि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को 'निजी क्षेत्र की ओर से रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (आरडीआइ) पहल’ शुरू करने के लिए जाती है. पिछले साल जुलाई के बजट में पहली बार घोषित इस फंड में अंतत: 1 लाख करोड़ रुपए का विशाल पूल बनाने की योजना है.
फायदे
देश में आरऐंडडी पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का एक फीसद से भी कम खर्च होता है. इसलिए ''लोगों, अर्थव्यवस्था और नवाचार" में यह निवेश जरूरी है. फाउंडेशन फॉर एडवांसिंग साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी इंडिया की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, आरऐंडडी में उद्योग जगत का योगदान जीडीपी का महज 0.2 फीसद है.
आरडीआई योजना निजी क्षेत्र को डीप टेक और सनराइज सेक्टर में निवेश करने और कारोबार के लिए प्रेरित करेगी. यह टेक्नोलॉजी में रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में एक बड़ा कदम है. इसके अलावा इससे जो नौकरियां पैदा होंगी, वे भी गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं.
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पर्यटन
अनदेखे-अनजाने हॉट स्पॉट तक पहुंचेंगे लोग
बजट में राज्यों के सहयोग से 50 शीर्ष पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना घोषित की गई है. सरकार ने पर्यटन के विकास में तेजी के लिए कुछ पूरक उपाय प्रस्तावित किए हैं. आलीशान होटलों की कमी को देखते हुए इन गंतव्य स्थलों पर आतिथ्य उद्योग को बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया है.
यह जानते हुए कि इन 50 जगहों पर नए होटल खोलने में समय लगेगा, बजट में अनोखा प्रस्ताव किया गया है और वह है होमस्टे के लिए मुद्रा लोन. इससे स्थानीय उद्यमों और दूर-दराज के इलाकों में छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा.
फायदे
इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने का अर्थ है कि होटलों को सस्ता कर्ज, भूमि और बिजली पर कम खर्च और अन्य प्रोत्साहनों से लाभ मिलेगा जिससे इस सेक्टर की तेज रफ्तार से ग्रोथ होगी. अभी भारत के होटल ऊंची कीमत के रियल एस्टेट और कर्ज लेने की बोझिल प्रक्रिया जैसी शुरुआती बड़ी बाधाओं का सामना कर रहे हैं जिससे कारोबार महंगा हो जाता है. मांग-आपूर्ति में अंतर के कारण होटलों का किराया लोगों की जेब पर काफी भारी पड़ता है.
यही वजह है कि घरेलू पर्यटक इसकी बजाय वियतनाम और थाइलैंड जैसी किफायती जगहों का रुख करते हैं. इसके अलावा, कनेक्टिविटी बढ़ाने में उड़ान योजना का विस्तार अहम भूमिका निभाएगा, जिससे 88 हवाईअड्डों को पहले ही जोड़ा जा चुका है. इसमें 120 नए गंतव्य जोड़े जाएंगे, जिसका लक्ष्य अगले एक दशक में चार करोड़ यात्रियों को आवाजाही की सुविधा मुहैया कराना है. पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे हवाईअड्डों तक हवाई यात्रा के विस्तार से दूरदराज के इलाकों में पर्यटन बढ़ने की उम्मीद है.
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बीमा
एक खुला बाजार
बजट में बीमा क्षेत्र को 100 फीसद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने का प्रस्ताव रखा गया है, जो सीमा अब तक 74 फीसद है. लेकिन शर्त यह होगी कि विदेशी निवेशक भारत में एकत्र प्रीमियम का पुन: निवेश करेंगे. एफडीआई सीमा बढ़ाने के लिए बीमा अधिनियम 1938 सहित कुछ प्रमुख कानूनों में संशोधन को पारित करने की जरूरत है.
फायदे
भारत में अभी तकरीबन आधी आबादी बीमा रहित है. इसलिए सरकार का लक्ष्य एक मजबूत बीमा पारिस्थितिकी तंत्र को तैयार करना और 2047 तक सार्वभौमिक कवरेज हासिल करना है. बीमा क्षेत्र में इस सुधार का उद्देश्य विदेशी निवेशकों को पूरी तरह परिचालन संबंधी नियंत्रण देना है, जिससे उनके लिए भारतीय भागीदारों को खोजने और उनके साथ मिलकर काम करने की बाध्यता नहीं रह जाएगी.
वर्ष 2000 में एफडीआई की शुरुआत के बाद से बीमा क्षेत्र को सितंबर 2024 तक विदेशी स्रोतों से 82,847 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं. एफडीआई से बीमाकर्ता उन्नत तकनीकों को अपनाने, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और सस्ता बीमा उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे.
अनुमान है कि यह क्षेत्र अगले पांच वर्षों में वैश्विक बाजारों से आगे निकलकर सालाना 7.1 फीसद की दर से बढ़ेगा. हालांकि, इस कदम को राजनैतिक विरोधियों और यहां तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों की तरफ से भी संभावित विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जो लाभांश लौटाने और पुन: बीमा जैसे प्रावधानों से नाखुश हैं.
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निर्यात
भारतीय कारोबार को मिलेगी रफ्तार
भारत अपने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती के लिए बहुआयामी रणनीति अपना रहा है. 2,250 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का गठन निर्यात ऋण को सुगम बनाने, सीमा पार कारोबार संबंधी सुविधाएं बढ़ाने और एमएसएमई की गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के वाणिज्य, एमएसएमई और वित्त मंत्रालयों के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा.
वहीं, यूनीफायड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म के तौर पर एक डिजिटल मंच भारत ट्रेडनेट (बीटीएन) व्यापार दस्तावेजीकरण और वित्तपोषण को सुव्यवस्थित करेगा.
वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के साथ कदमताल करने के उद्देश्य के साथ मैन्युफैक्चरिंग सहायता के लिए प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की जाएगी. और एक उच्च-स्तरीय समिति एक वर्ष के भीतर गैर-वित्तीय सिफारिशों की समीक्षा करेगी. बजट ने रणनीतिक लिहाज से कुछ खास उत्पादों के कच्चे माल पर सीमा शुल्क भी घटाया और चमड़ा, समुद्री उत्पाद और हस्तशिल्प जैसे निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए कुछ नियमों में ढील दी है.
फायदे
निर्यात संवर्धन मिशन की स्थापना ऐसे समय में निर्यात परिदृश्य को समझने और उसे विस्तार देने के प्रभावी तरीके पता लगाने में देश के लिए मददगार साबित होगी, जब विभिन्न देश अपने घरेलू बाजार को लेकर अत्यधिक सुरक्षात्मक रुख अपना रहे हैं.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष अश्विनी कुमार कहते हैं, ''इस पहल से खासकर एमएसएमई को लाभ होगा, जो भारतीय निर्यात परिदृश्य में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हैं."
बंदरगाह आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल व्यापार प्लेटफॉर्म में निवेश से लेन-देन की लागत कम होगी और सीमा पार व्यापार की दक्षता में सुधार होगा. वहीं, बीटीएन से प्रशासनिक बोझ घटने की उम्मीद है.
प्रमुख उपाय
सेक्टर और मंत्रालय के लक्ष्यों के साथ एक्पोर्ट प्रमोशन मिशन का गठन.
कुछ रणनीतिक उत्पादों पर सीमा शुल्क में कटौती. निर्यात उन्मुख सेक्टरों को प्रोत्साहन देने के लिए नियमों में ढील.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप व्यापार संचालन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत ट्रेडनेट.
भारत का व्यापार घाटा नवंबर 2024 में बढ़कर 37.84 अरब डॉलर हो गया. बजट प्रस्तावों में इसे कम करने का लक्ष्य.
भारत का निर्यात लक्ष्य 2030 तक 20 खरब डॉलर है.
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स्वास्थ्य
कैंसर पर हमला
इस बार केंद्रीय बजट ने सबसे भयावह आम बीमारी—कैंसर—से निबटने पर ध्यान दिया है, जो रुपए-पैसे के लिहाज से किसी को भी तोड़ सकती है. 36 जीवनरक्षक दवाओं को बुनियादी सीमा शुल्क से छूट देने के साथ छह अतिरिक्त दवाइयों पर 5 फीसद के रियायती शुल्क की बदौलत कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बहुत जरूरी इलाज कहीं ज्यादा सस्ते हो जाएंगे.
37 अतिरिक्त दवाइयां और 13 नए रोगी सहायता कार्यक्रम जोड़ने से मरीजों का वित्तीय बोझ और कम हो जाएगा. अगले तीन साल में सभी जिला अस्पतालों में डेकेयर कैंसर केंद्रों की स्थापना का फैसला समाज के सभी तबकों के लिए कैंसर की देखभाल को ज्यादा सुलभ बनाने की दिशा में बदलाव लाने वाला कदम है.
फायदे
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मुताबिक, भारत में कैंसर के अनुमानित नए मामले 15 लाख थे और 2025 तक इनमें 12.8 फीसद की बढ़ोतरी होने की संभावना है. ये खर्चे कई मरीजों को तबाह कर देते हैं. कैंसर की अच्छी देखभाल तक पहुंच में भारी फर्क है. यही वजह है कि जानलेवा बीमारियों के वित्तीय बोझ को कम करने और जिला अस्पतालों में देखभाल को सुलभ बनाने में सुधार लाने पर बजट में दिया गया जोर सराहनीय है.
बजट में 'हील इन इंडिया' पहल को भी बढ़ावा दिया गया है, जिसके तहत सेवाओं में सुधार और निजी क्षेत्र की ज्यादा बड़ी भागीदारी के जरिए भारत को स्वास्थ्य सेवाओं के ठिकाने के तौर पर विकसित किया जाएगा. इससे चिकित्सा के बुनियादी ढांचे में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और नौकरियों का सृजन होगा, जिससे अर्थव्यवस्था में उछाल आएगा. बजट में गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था भी की गई है और इस तरह उनकी भले-चंगे रहने में अहम कमी को पाटा गया है.
घातक बीमारियों के खिलाफ
95,957 करोड़ रु.
कुल आवंटन स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए, जो पिछले साल के 86,582 करोड़ रु. से ज्यादा है.
9,406 करोड़ रु.
आवंटित किए गए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए, जो पिछले साल के 8,300 करोड़ रु. से 29 फीसद ज्यादा है.
4,200 करोड़ रु. आवंटित किए गए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के लिए, जो पिछले साल से 40 फीसद ज्यादा है.
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बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग
समुद्री साजसज्जा
बजट में 25,000 करोड़ रुपए के समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) के साथ भारत के समुद्री क्षेत्र के कायाकल्प पर जोर दिया गया है, जिससे जहाज निर्माण, बंदरगाहों को आधुनिक बनाने और अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए लंबे वक्त और कम लागत वाला ऋण मिलेगा. सरकार की तरफ से 49 फीसद निधि और निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ 2030 तक 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश आने की उम्मीद है.
दुरुस्त की गई नई जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति में जहाज निर्माण के लिए 20-30 फीसद सब्सिडी दी जाएगी. कच्चे माल पर 10 साल के लिए सीमा शुल्क से छूट देने और इन्फ्रास्ट्रक्चर हार्मोनाइज्ड मास्टर लिस्ट (आईएचएमएल) में बड़े जहाजों को शामिल करने से लागत प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ेगी. शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट (कबाड़ मूल्य का 40 फीसद) से जहाजों की टिकाऊ रिसाइक्लिंग और पुनर्निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा.
फायदे
एमडीएफ का लक्ष्य भारत के शिप-लीजिंग या पट्टे पर जहाज लेने के 75 अरब डॉलर के सालाना खर्च में कमी लाना है. इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और भारत के ध्वजवाहक बेड़े में बढ़ोतरी होगी. जहाज निर्माण के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल 1 फीसद से भी कम है, फिर भी एमडीएफ के बल पर दिए गए प्रोत्साहन लाभों की बदौलत उद्योग की वृद्धि में चीन, दक्षिण कोरिया और जापान की कामयाबियों की झलक दिख सकती है.
शिप-लीजिंग के लिए करों में छूट की शुरुआत से भारत वैश्विक समुद्री निवेशों के लिए ज्यादा आकर्षक ठिकाना बनेगा. यही नहीं, शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट व्यवस्था से न केवल भारत की चक्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि नए जहाजों के निर्माण में निधियों का पुनर्निवेश होगा.
लंबे समय से कम इस्तेमाल किए गए भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग क्षेत्र को टन भार टैक्स विस्तार से जबरदस्त बढ़ावा मिला है, जिससे नदी-आधारित परिवहन सड़क और रेल प्रचालन तंत्र का लागत-प्रभावी विकल्प बन सकेगा. यही नहीं, जहाज निर्माण क्षमता विकास केंद्रों के लिए 1,200 रुपए और जहाज डिजाइन और प्रशिक्षण पहलों के लिए 1,400 करोड़ रुपए का आवंटन हुनर के संवर्धन पर जोर देता है.
25,000 करोड़ रु.
49% सरकारी योगदान के साथ समुद्री विकास कोष का लक्ष्य 2030 तक जहाजरानी क्षेत्र में 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश लाना है.
6,100 करोड़ रु.
आवंटित किए गए शिपयार्डों को उन्नत और आधुनिक बनाने के लिए.
1.1 लाख नौकरियों का सृजन होने की उम्मीद है समुद्री क्षेत्र में होने वाले निवेश से.
—एम.जी. अरुण, कौशिक डेका, अमरनाथ के. मेनन, अनिलेश एस. महाजन, सोनल खेत्रपाल, प्रदीप आर. सागर, सोनाली आचार्जी और अभिषेक जी. दस्तीदार.