वक्फ कानून बदलने पर मचे हंगामे की क्या है असल वजह; इसमें कौन से 10 बड़े बदलाव होंगे?  

मोदी सरकार ने 6 महीने के भीतर दूसरी बार वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा में पेश किया है

लोकसभा में पेश हुआ वक्फ संशोधन बिल
लोकसभा में पेश हुआ वक्फ संशोधन बिल

मोदी सरकार ने आज यानी 2 अप्रैल 2025 को दूसरी बार लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश किया है. इस बिल के सदन में पेश होते ही देश की सबसे बड़ी और ताकतवर मुस्लिम संस्था वक्फ बोर्ड एक बार फिर से चर्चा में है. 

लोकसभा में इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय दिया गया है. इसमें 4 घंटे 40 मिनट का समय सत्ता पक्ष यानी NDA को दिया गया है. मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इस बिल का कड़ा विरोध किया है. 

इससे पहले भी 8 अगस्त 2024 को वक्फ बिल लोकसभा में पेश किया गया था. तब विपक्षी दलों के भारी विरोध के बाद इसे 31 संसदों वाले संयुक्त संसदीय कमेटी को भेजा गया था. 

अब बिल में कुछ प्रमुख संशोधन के बाद एक बार फिर सरकार इसे संसद में पेश कर रही है. लेकिन, मोदी सरकार इस पुराने वक्फ कानून को क्यों बदलना चाहती है, इसमें कौन से 10 बड़े बदलाव होने वाले हैं? 

वक्फ बोर्ड क्या है और इसका काम क्या है?

‘वक्फ’ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है रुकना या ठहरना. इस्लाम में वक्फ दान का एक तरीका है, ऐसी संपत्ति जो समाज के लिए समर्पित की गई हो. अपनी संपत्ति वक्फ को देने वाला इंसान वकिफा कहलाता है. वकिफा दान देते वक्त ये शर्त रख सकता है कि उसकी संपत्ति से होने वाली आमदनी सिर्फ पढ़ाई पर या अस्पतालों पर ही खर्च हो.

27 देशों के वक्फ की संपत्तियों पर काम करने वाली संस्था ‘औकाफ प्रॉपर्टीज इन्वेस्टमेंट फंड’ यानी AIPF के मुताबिक कानूनी शब्दों में कहें तो इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी संपत्ति दान करता है तो वो वक्फ कहलाता है. इसमें चल या अचल संपत्ति दोनों हो सकती है.  

इस संपत्ति की देखरेख करने वाली संस्था ही वक्फ बोर्ड कहलाती है. वक्फ को कोई गैर-मुस्लिम भी अपनी संपत्ति दान दे सकता है. बशर्ते वह व्यक्ति इस्लाम को मानता हो और उसके उद्धेश्य इस्लामिक हो. 

1954 में वक्फ एक्ट बना, जिसे 1955 में लागू किया गया. पाकिस्तान जाने वाले ज्यादातर मुस्लिमों की संपत्ति भी इस बोर्ड के देखरेख में आ गया. इस देश के अलग-अलग प्रदेशों में करीब 32 वक्फ बोर्ड हैं. जो वक्फ की संपत्तियों की देखरेख कर रहे हैं. 

वक्फ कानून क्यों बदलना चाहती है मोदी सरकार?

वक्फ बोर्ड से जुड़े कानून में बदलाव को लेकर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है, “कानून में बदलाव का मुख्य मकसद वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाना है. उनका हिसाब-किताब रखा जाएगा तो इससे उनका मैनेजमेंट ज्यादा प्रभावी होगा. अगर वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को ऐसे ही डिक्लेयर कर देगा कि यह वक्फ की जमीन है तो उसका तो हिसाब-किताब होना चाहिए.” 

इसके आगे रिजिजू ने कहा, “हम ट्रांसपेरेंसी ला रहे हैं. जो आम मुसलमान हैं- चाहे वो दरगाह के हों, चाहे वो अलग-अलग संगठन में हों... सब लोग समर्थन कर रहे हैं. वक्फ अमेंडमेंट बिल का विरोध करने वाले वो लोग हैं, जो करोड़ों की वक्फ जमीन को कब्जा करके बैठे हैं और यह चीज सबको मालूम है, इसलिए जब आप आम मुसलमान को पूछेंगे तो सब लोग इस बिल का समर्थन कर रहे हैं.” 

इस कानून में बदलाव की एक अन्य वजह बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी भागीदारी तय करना है. 

नया वक्फ कानून बनने से पुराने कानून में क्या 10 बड़े बदलाव होंगे?

वक्फ से जुड़े नए बिल में दो दर्जन से ज्यादा बदलाव प्रस्तावित हैं. इनमें से होने वाले 10 बड़े बदलाव कुछ इस तरह से हैं- 

1. वक्फ बोर्ड में अब तक मेंबर के तौर पर महिलाओं का होना तय नहीं है. अब नए बिल के कानून बनते ही वक्फ बोर्ड में दो महिला मेंबर होना अनिवार्य होगा. 
2. वक्फ बोर्ड में अभी सिर्फ मुस्लिम सदस्य होते हैं. प्रस्तावित बिल के कानून बनते ही हर वक्फ बोर्ड में 2 गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य होगा.  हालांकि, इस मुद्दे पर विरोध के बाद संसद में बिल पर चर्चा के वक्त गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं होंगे. अमित शाह ने कहा,"वक्फ में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है, न ही हमारा ऐसा कोई इरादा है. मुस्लिम धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा. विपक्ष केवल वोट बैंक के लिए इसका विरोध कर रहा है."
3. अब तक मुस्लिमों में कौन इस बोर्ड के सदस्य होंगे तय नहीं था. ज्यादातर रसूख वाले मुस्लिम ही इसके सदस्य होते थे. हालांकि, नए बिल के कानून बनते ही शिया, सुन्नी के अलावा पिछड़े मुस्लिम भी इस बोर्ड में शामिल हो सकेंगे. 
4. अब तक बोहरा और अगखानी मुस्लिमों के लिए अलग से वक्फ बोर्ड बनाने की इजाजत नहीं थी. नए बिल में इस मुस्लिम समुदाय को अपना वक्फ बोर्ड बनाने का अलग से अधिकार दिया गया है. 
5. वक्फ काउंसिल में 2 लोकसभा और 1 राज्यसभा के सदस्य होंगे. अब तक ये सांसद मुस्लिम ही होते हैं, लेकिन नया बिल पास होने पर ये हिंदू या गैर-मुस्लिम भी हो सकते हैं. 
6. नए वक्फ बिल के मुताबिक CAG वक्फ से जुड़ी संपत्ति का हिसाब-किताब रखेगी. जिला कलेक्टर के क्षेत्राधिकार में वक्फ संपत्ति होगी. जिला कलेक्टर दफ्तर में संपत्ति को दर्ज कराना अनिवार्य है. 
7. नए बिल में ये भी प्रावधान है कि जिला कलेक्टर के आदेश के बाद ही कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो सकेगी. 
8. नए बिल में साफ जिक्र है कि जिसने भी संपत्ति वक्फ के नाम की है, उसके नाम वक्फनामे की कागज होने के बाद ही संपत्ति को वक्फ माना जाएगा. 
9. वक्फ बोर्ड के ट्रिब्यूनल में लिए गए फैसले को अब तक कोर्ट में चुनौती देने के प्रावधान नहीं थे. सिर्फ विशेष स्थिति में कोर्ट में चुनौती दे सकते थे. सरकार का दावा है कि अब नया कानून बनने के बाद ट्रिब्यूनल के फैसले को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं. 
10. नए बिल के मुताबिक इस कानून के बनने से पहले या बाद में जिस भी सरकारी जमीन पर वक्फ ने दावा किया है, वह संपत्ति वक्फ की नहीं मानी जाएगी. 

विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठन वक्फ का विरोध क्यों कर रही है?

मुस्लिम पक्ष इस कानून का विरोध कई वजहों से कर रही है. इनमें से एक यह है कि नए बिल में लिखा है कि वक्फ से जुड़े पक्के कागज नहीं होने पर संपत्ति वक्फ नहीं माना जा सकता है. कई वक्फ की संपत्ति 500 से 600 साल पुराने हैं. इन संपत्तियों के कागज पक्के नहीं हैं. ऐसे में मुस्लिमों को डर है कि उनके कब्रिस्तान, मस्जिद और स्कूल कानूनी विवाद में फंस सकते हैं. 

बिहार शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद अफजल अब्बास के मुताबिक अनुच्छेद 26(B) धार्मिक संप्रदायों को धर्म के मामलों में खुद प्रबंधन करने के अधिकार की गारंटी देता है. वक्फ की संपत्ति अल्लाह के नाम की संपत्ति है. ऐसे में अगर मोदी सरकार वक्फ के कानून में बदलाव करके वक्फ बोर्ड की स्वतंत्रता और स्वायत्ता छीनना चाहती है तो सही नहीं है.

अफजल अब्बास बताते हैं कि इस नए कानून के लागू होने पर कलेक्टर राज लागू हो सकता है. यह मुस्लिमों को उसके धार्मिक कानून के मुताबिक सिर्फ बोलकर अपनी संपत्ति वक्फ को दान देने से रोकेगा, जो सही नहीं है. 

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पत्रकारों से इसी बातचीत में कैरोलिन लेविट ने कहा, "भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 100 फीसदी टैक्स वसूलता है. इतना ज्यादा टैक्स लेने की वजह से भारतीय बाजार में अमेरिकी सामान महंगे हो जाते हैं. इससे अमेरिका के सामानों का निर्यात लगभग असंभव हो जाता है.” पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 

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