छत्तीसगढ़- आतंक का जाल
'केमिकल अली' ने कथित रूप से उन लोगों को शरण दी थी जिन्होंने 2013 में पटना में मोदी की रैली में विस्फोट किए

रायपुर में जन्मे सिमी (स्टुडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के गुर्गे अजहरुद्दीन उर्फ 'केमिकल अली' से पूछताछ के दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) ने यह भी पूछा कि उसे उप-नाम क्यों दिया गया था? पुलिस को उसने बेपरवाही से जवाब दिया कि उसे खुद नहीं पता. उसने कथित तौर पर कहा ''आप लोग पता कीजिए और मुझे भी बता दीजिए.'' इस तरह उसने अपने नाम के इराकी सैन्य कमांडर से जुड़े होने की बात को खारिज किया, जिसे 1988 में 5,000 कुर्दों को गैस से मार देने के लिए मौत की सजा दे दी गई थी.
पूछताछ के विवरण से वाकिफ एक व्यक्ति के अनुसार, अजहर ने शुरू में 2013 के पटना और गया विस्फोट मामलों में किसी किस्म की लिप्तता से साफ इनकार कर दिया, लेकिन फिर 'अनजाने में आतंकवादियों की मदद करने' के लिए अफसोस जाहिर किया. रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) आसिफ शेख ने कहा कि अजहर ही वह शख्स था जिसने सारे इंतजाम किए और विस्फोटों में अभियुक्तों की मदद की.
अक्तूबर, 2013 में पटना के गांधी मैदान में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में पांच आइईडी विस्फोट किए गए थे. उसमें पांच लोग मारे गए और 89 लोग घायल हुए थे. उससे पहले 7 जुलाई, 2013 को बोधगया मंदिर परिसर में विस्फोट किए गए थे.
अजहर 2013 से फरार था और पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से बिहार-छत्तीसगढ़ में स्लीपर सेल की और भी जानकारी सामने आएगी. एसएसपी ने कहा, ''शायद अपने सहयोगियों के पकड़े जाने और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद वह डर गया था और भारत से भाग गया.'' अजहर ने सऊदी अरब में छह साल बिताए और वह 11 अक्तूबर को भारत लौटा पर रायपुर पुलिस की टीम ने उसे हैदराबाद हवाइ अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया.
इससे पहले, एनआइए जांच में यह सामने आया था कि सिमी के एक अन्य सदस्य रायपुर निवासी उमर सिद्दीकी ने आतंकवादियों को शरण दी थी. उमर ने रायपुर पुलिस के सामने यह स्वीकार किया था कि उसने और सिमी कार्यकर्ताओं के एक समूह ने (जिसमें पुलिस के अनुसार, अजहर भी शामिल था) आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर संचालित किए और स्लीपर सेल संगठित किए. उमर ने कथित रूप से यह भी स्वीकार किया कि पटना विस्फोटों के कम से कम तीन अभियुक्तों—हैदर अली, नुमान अंसारी और मुजीबुल्लाह अंसारी—ने उसके बाद रायपुर में शरण ली थी. इस ऑपरेशन के लिए सिमी की टीम कथित रूप से मिर्जापुर, इलाहाबाद और रायपुर से आई थी. आइईडी रांची में तैयार किए गए थे.
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